मुंबई. देशभर में जारी छात्र आंदोलन को लेकर बॉलीवुड की कई हस्तियों के बयान सामने आने के बाद अभिनेता आमिर खान की बेटी इरा खान ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी है. इरा खान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने छात्र आंदोलन पर इसलिए कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि उन्हें नहीं लगा कि उनके पास ऐसा कुछ है जो इस चर्चा में सार्थक योगदान दे सके. उन्होंने यह भी कहा कि वह जानबूझकर समाचार और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखती हैं, क्योंकि ऐसी घटनाएं उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करती हैं और वह खुद को असहाय महसूस करने लगती हैं.
इरा खान ने गुरुवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा वीडियो साझा करते हुए अपनी बात रखी. वीडियो की शुरुआत में उन्होंने कहा कि वह मानसिक स्वास्थ्य की पक्षधर हैं और जब भी इस विषय पर बोलती हैं तो लोगों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश करती हैं. उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जीवन के हर पहलू से जुड़ा विषय है और उन्होंने हमेशा कुछ चुनिंदा मुद्दों पर ही अपनी बात रखने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन पर सार्वजनिक रूप से कुछ न कहने के पीछे उनके अपने कारण थे और वह उन्हें स्पष्ट करना चाहती हैं.
इरा ने कहा कि सबसे पहला कारण यह था कि उन्हें नहीं लगा कि उनके पास ऐसा कुछ है जो इस विषय पर चल रही चर्चा में कोई नया दृष्टिकोण जोड़ सके. उन्होंने बताया कि वह सामान्य तौर पर खबरों को भावनात्मक रूप से अपने ऊपर हावी नहीं होने देतीं. उन्होंने कहा कि वह न तो समाचार नियमित रूप से देखती हैं और न ही सोशल मीडिया के एक्सप्लोर सेक्शन पर जाती हैं. उन्होंने आंदोलन या हिंसा से जुड़े वीडियो भी नहीं देखे.
उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी थी कि छात्र आंदोलन चल रहा है और क्या घटनाएं हो रही हैं, लेकिन वह खुद को उन घटनाओं से भावनात्मक रूप से जुड़ने से रोकती हैं. उनके अनुसार जब वह इस तरह की खबरों में ज्यादा उलझ जाती हैं तो मानसिक रूप से बेहद परेशान हो जाती हैं, खुद को असहाय महसूस करने लगती हैं और उन पर भावनात्मक दबाव बढ़ जाता है. इसलिए वह अपनी ऊर्जा इस बात पर केंद्रित करती हैं कि एक व्यक्ति अपने स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के साथ किस तरह सकारात्मक भूमिका निभा सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह यह दावा नहीं कर रहीं कि उनका तरीका सबसे बेहतर है, बल्कि यही उनका व्यक्तिगत दृष्टिकोण है.
इरा खान ने आगे कहा कि वह समाचार और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखती हैं, इसलिए इस मुद्दे को लेकर उनके भीतर वैसी भावनात्मक प्रतिक्रिया विकसित नहीं हुई, जैसी अन्य लोगों में हुई. उन्होंने बताया कि उन्हें केवल एक रील भेजी गई थी, जिसमें उन्हें बताया गया कि उनकी एक रिश्तेदार आंदोलन के दौरान दिखाई दे रही हैं और संभव है कि उन्हें हिरासत में लिया गया हो. यह सुनकर वह घबरा गई थीं. हालांकि बाद में जब उन्हें पता चला कि उनकी रिश्तेदार सुरक्षित हैं तो उन्होंने राहत की सांस ली और अपने काम पर लौट गईं.
उन्होंने कहा कि उन्होंने इसलिए कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया क्योंकि उन्हें नहीं लगा कि उनके बोलने से इस मामले में कोई वास्तविक अंतर आएगा. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी चुप्पी से किसी को यह संदेश गया कि उन्हें छात्र आंदोलन या उससे जुड़े लोगों की कोई परवाह नहीं है, तो यह उनकी मंशा नहीं थी और इसके लिए उन्होंने खेद व्यक्त किया.
अपने पोस्ट के कैप्शन में इरा खान ने लिखा कि वह इस बात को समझती हैं कि यह आंदोलन केवल परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, असहमति और विचार रखने के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है. उन्होंने स्वीकार किया कि किसी व्यक्ति के पास किसी मुद्दे से नजरें फेर लेने का विकल्प होना भी एक विशेषाधिकार है. उन्होंने कहा कि वह यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि अपने मूल्यों के अनुरूप वह किस तरह सबसे अधिक उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं और भविष्य में उसी दिशा में काम करेंगी.
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में हिंदी फिल्म उद्योग की कई प्रमुख हस्तियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं. सलमान खान, आलिया भट्ट, सोनाक्षी सिन्हा और करीना कपूर सहित कई कलाकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से छात्र आंदोलन के प्रति समर्थन और एकजुटता व्यक्त की है.
लगभग एक महीने से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में छात्र आंदोलन जारी है. इस आंदोलन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कुछ अन्य छात्रों ने भी हिस्सा लिया तथा भूख हड़ताल की. आंदोलनकारी छात्र कथित नीट पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही वे शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू करने की भी मांग उठा रहे हैं.
इरा खान के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी प्रतिक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है. उन्होंने अपने वीडियो में यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि किसी मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया न देना हमेशा उदासीनता का संकेत नहीं होता, बल्कि कई बार यह व्यक्ति की मानसिक स्थिति, सोच और प्राथमिकताओं से भी जुड़ा हो सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

