नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सार्वजनिक परीक्षा कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। सरकार का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्ती से रोक लगाना है. संशोधन विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश किया जा सकता है। इसमें परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी से जुड़े मामलों के खिलाफ कानून को और कड़ा बनाने का प्रस्ताव है।
10 साल तक की सजा का प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली करने वालों के खिलाफ 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि कड़े कानूनी प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देशभर में पेपर लीक के मामलों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और इस मुद्दे पर सरकार विपक्ष के निशाने पर है। हाल के दिनों में सरकार ने संकेत दिए थे कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कानून को और मजबूत किया जाएगा। अब सभी की नजर अगले सप्ताह संसद में पेश होने वाले संशोधन विधेयक पर रहेगी, जिसमें नए प्रावधानों का विस्तृत स्वरूप सामने आएगा।
प्रस्तावित विधेयक में पेपर लीक के दोषियों को अब 10 साल तक की कठोर कैद और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट को तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके।
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