नई दिल्ली. कांग्रेस सांसद शशि थरूर और उनके बेटे ईशान थरूर के बीच सोशल मीडिया पर हुई मजाकिया नोकझोंक चर्चा का विषय बन गई है. व्हाट्सऐप पर "बूमर्स" को प्रतिबंधित करने की ईशान थरूर की टिप्पणी पर शशि थरूर ने अपनी चुटीली शैली में ऐसा जवाब दिया कि यह पोस्ट देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. दोनों के बीच हुई यह हल्की-फुल्की बहस ऐसे समय सामने आई है, जब देश में परीक्षा प्रणाली और कथित पेपर लीक को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों पर भी व्यापक चर्चा हो रही है.
दरअसल, ईशान थरूर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वह इस बात से सहमत हैं कि छोटे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखा जाना चाहिए, लेकिन भारत में सबसे पहले "बूमर्स" को व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने से रोकना चाहिए. उनकी यह टिप्पणी उद्योगपति और जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी.
ईशान की इस टिप्पणी पर शशि थरूर ने अपने खास अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत की जनसंख्या और पारिवारिक संरचना को देखते हुए उनके बेटे की पीढ़ी भी "बेबी बूमर्स" की श्रेणी में ही आती है. उनका यह व्यंग्यात्मक जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और बड़ी संख्या में लोगों ने इसे थरूर की हाजिरजवाबी का बेहतरीन उदाहरण बताया.
इस बीच, यह बहस उस समय और सुर्खियों में आ गई जब कथित परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. सोशल मीडिया से शुरू हुए छात्र आंदोलन ने देशभर में बड़ा जनसमर्थन हासिल किया और परीक्षा सुधार की मांग तेज हो गई.
शशि थरूर ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण और लगातार किए गए जनआंदोलनों की आवाज को कोई भी सरकार लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं कर सकती. उन्होंने कहा कि युवाओं, विशेषकर जेन-ज़ी पीढ़ी ने अपनी नाराजगी को सकारात्मक आंदोलन में बदलकर लोकतंत्र को मजबूत किया है.
एक वीडियो संदेश में थरूर ने कहा कि यह केवल किसी मंत्री के इस्तीफे का मामला नहीं है, बल्कि उन लाखों छात्रों की आवाज का सम्मान है, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि युवाओं ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र केवल सरकार चलाने वालों का नहीं, बल्कि सरकार से जवाब मांगने वाले नागरिकों का भी होता है.
हालांकि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल एक इस्तीफा पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में लोगों का भरोसा बहाल करने के लिए निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और व्यापक सुधार आवश्यक हैं. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सवाल पूछना, व्यवस्था को जवाबदेह बनाना और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना जारी रखें. वहीं, पिता-
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