भिलाई. भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) द्वारा संचालित 'मैत्री बाग जू' ने सफेद बाघों (White Tigers) के संरक्षण और सफल प्रजनन के क्षेत्र में देशभर में एक मिसाल कायम की है. वर्ष 1999 में ओडिशा के नंदनकानन जूलाजिकल पार्क (भुवनेश्वर) से लाई गई तापसी और तरुण नाम की जोड़ी से शुरू हुआ यह सफर आज देश के कई प्रमुख चिड़ियाघरों की शान बढ़ा रहा है.
देश के कई राज्यों में फैली 'तापसी और तरुण' की पीढ़ी
मैत्री बाग में जन्मे 13 सफेद बाघों को देश के अलग-अलग चिड़ियाघरों में पशु-विनिमय (Animal Exchange) कार्यक्रम के तहत भेजा गया है. यहाँ के बाघ आज इन शहरों के जू में पर्यटकों का दिल जीत रहे हैं:
गुजरात: राजकोट
मध्य प्रदेश: इंदौर एवं मुकुंदपुर
उत्तर प्रदेश: लखनऊ
झारखंड: बोकारो
छत्तीसगढ़: रायपुर (नंदनवन/जंगल सफारी)
मैत्री बाग में वर्तमान स्थिति और देखभाल
वर्तमान में मैत्री बाग में कुल 5 व्हाइट टाइगर मौजूद हैं, जिनमें 4 नर (रुस्तम, सिंघम, बाबी, विक्रम) और 1 मादा (गौरी) शामिल हैं.
अनुकूल माहौल है सफलता का राज: विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की देखरेख में बाघों के आहार, स्वास्थ्य और मौसम के अनुकूल व्यवस्थाओं (गर्मियों में कूलर, ठंड में अलाव और स्वच्छता) का विशेष ध्यान रखा जाता है.
दोबारा शुरू होगी प्रजनन प्रक्रिया
मैत्री बाग के महाप्रबंधक डॉ. एन.के. जैन के अनुसार, 2020 में कोविड महामारी और बढ़ती संख्या के कारण प्रजनन पर अस्थायी रोक लगाई गई थी. अब इसे पुनः शुरू करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे मैत्री बाग एक बार फिर सफेद बाघों के संवर्धन में अग्रणी भूमिका निभाएगा.

