काठमांडू. नेपाल के दक्षिणी तराई क्षेत्र में जारी हिंसा और सांप्रदायिक तनाव के बीच हालात चिंताजनक बने हुए हैं. पिछले पांच दिनों में हिंसक घटनाओं में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भारत से सटे मधेश प्रांत के कम से कम तीन जिलों में कर्फ्यू लागू कर दिया है. इस बीच नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, पूर्व प्रधानमंत्री एवं सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली तथा पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने नागरिकों से शांति, संयम और राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की अपील की है.
हिंसा की शुरुआत सुनसरी जिले में दो समूहों के बीच हुए टकराव के बाद हुई, जिसके बाद तनाव आसपास के इलाकों तक फैल गया. हालात बिगड़ने पर स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और संवेदनशील क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू कर दिया. सुरक्षा बल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी नई हिंसक घटना को रोका जा सके.
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने गुरुवार को जारी अपने संदेश में हालिया घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि नेपाल की पहचान सदियों से चली आ रही सामाजिक, धार्मिक और जातीय सौहार्द, सहिष्णुता तथा भाईचारे की परंपरा से है. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, नागरिक समाज संगठनों और आम नागरिकों से शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का आह्वान किया.
राष्ट्रपति ने हिंसा में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. उन्होंने संबंधित एजेंसियों से घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की भी अपील की.
सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने भी बयान जारी कर कहा कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा और टकराव से नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि संवाद, सहमति और जिम्मेदार सहयोग ही वर्तमान संकट से निकलने का रास्ता है. ओली ने देश के सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और विभिन्न धार्मिक समुदायों के नेताओं से राष्ट्रीय हित और सामाजिक शांति के लिए एकजुट होने का आग्रह किया.
हालांकि उन्होंने मौजूदा संकट के दौरान सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए. ओली ने आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता, बल प्रयोग और संवेदनशील समय में चुप्पी चिंता का विषय है. उनके अनुसार राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े ऐसे मामलों में सरकार को अधिक सक्रिय और जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए.
नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ने भी हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हुए देशवासियों से आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि नेपाल की पहचान उसकी बहुजातीय, बहुभाषी, बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक विरासत से है और यही विशेषता दुनिया में देश को अलग पहचान दिलाती है.
ज्ञानेंद्र शाह ने कहा कि नेपाल के लोग सदियों से परस्पर सम्मान, प्रेम और सौहार्द के साथ रहते आए हैं. उन्होंने हिंसा में हुई जनहानि और संपत्ति के नुकसान पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि देश की एकता और सामाजिक सौहार्द को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने देना चाहिए. उन्होंने सभी नागरिकों से मतभेद भुलाकर राष्ट्रहित में साथ आने का आह्वान किया.
प्रशासन के अनुसार मधेश क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि शांति बहाल होने तक प्रतिबंधात्मक उपाय जारी रहेंगे. नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति को सामान्य बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं, जबकि देश के शीर्ष नेताओं की अपील के बाद लोगों से संयम बरतने और अफवाहों से दूर रहने की भी अपील की जा रही है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

