केरल में बारिश का कहर, आठ की मौत, आठ लापता हजारों लोग राहत शिविरों में पहुंचे

केरल में बारिश का कहर, आठ की मौत, आठ लापता हजारों लोग राहत शिविरों में पहुंचे

प्रेषित समय :20:48:28 PM / Sun, Aug 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

तिरुवनंतपुरम. केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. राज्य के कई जिलों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की घटनाओं के बीच स्थिति गंभीर बनी हुई है. मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने रविवार को बताया कि पिछले 24 घंटों में भारी बारिश से जुड़ी घटनाओं में आठ लोगों की मौत हो चुकी है, 13 लोग घायल हुए हैं और आठ अन्य अब भी लापता हैं. राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है, जबकि हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी रखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य में बारिश से अब तक 27 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, जबकि 196 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है. प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए विभिन्न जिलों में 209 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहां 5,792 लोगों को अस्थायी रूप से ठहराया गया है. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जिला प्रशासन को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने राज्य के 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. पथानामथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, त्रिशूर, पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों में अगले कुछ घंटों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है. विभाग ने फ्लैश फ्लड, भूस्खलन, सड़क धंसने और निचले इलाकों में जलभराव को लेकर भी चेतावनी जारी की है.

सबसे अधिक प्रभावित जिलों में शामिल इडुक्की में शनिवार सुबह पीरूमेड और थोडुपुझा तालुकों में 200 मिलीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की गई. लगातार बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ. जिला प्रशासन ने बताया कि एहतियात के तौर पर 187 लोगों को 13 राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है. संवेदनशील इलाकों में राहत दल तैनात हैं और सड़क संपर्क बहाल करने का काम जारी है.

कासरगोड जिले में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने अगले दो दिनों के लिए हाई अलर्ट जारी रखा है. जिला कलेक्टर अर्जुन पांडियन ने सभी विभागों को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं. जिले में फिलहाल पांच राहत शिविरों में 208 लोग रह रहे हैं. प्रशासन लगातार नदी जलस्तर और वर्षा की निगरानी कर रहा है.

बारिश के बीच मछुआरों की सुरक्षा भी बड़ी चिंता बन गई है. मौसम विभाग द्वारा समुद्र में जाने पर रोक लगाने के बावजूद कई मछुआरे आजीविका के दबाव में समुद्र का रुख कर रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग तटीय क्षेत्रों से दो मछुआरों की मौत और पांच के लापता होने की घटनाएं सामने आई हैं. अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक मजबूरी के कारण कई मछुआरे चेतावनियों की अनदेखी कर रहे हैं, जिससे उनकी जान खतरे में पड़ रही है.

इस बीच एर्नाकुलम जिले के लोगों को रविवार को कुछ राहत मिली. शनिवार को लगातार बारिश और जलभराव से प्रभावित रहे कई इलाकों में पानी का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगा है. कोथामंगलम और मुवट्टुपुझा जैसे क्षेत्रों में मौसम साफ होने के साथ सामान्य जनजीवन धीरे-धीरे पटरी पर लौटता दिखाई दिया. हालांकि प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है.

अलाप्पुझा जिले में भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार पंपा और मणिमला नदियों में बढ़ते जलस्तर के बीच थोट्टापल्ली स्पिलवे के गेट समय पर खोल दिए जाने से कुट्टनाड और अंबालाप्पुझा क्षेत्रों में संभावित बड़े बाढ़ संकट को टालने में मदद मिली. सिंचाई विभाग लगातार नदी के बहाव और जलस्तर की निगरानी कर रहा है.

राज्य में बारिश के दौरान राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि आपदा की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त रहे. हालांकि सरकार का कहना है कि राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार समीक्षा की जा रही है और सभी जिला प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं.

मुल्लापेरियार बांध सहित कई जलाशयों में जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा है. विशेष रूप से घाट क्षेत्रों में रात के समय यात्रा से बचने की सलाह जारी की गई है. आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों से स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है.

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. एनडीआरएफ, राज्य आपदा मोचन बल, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन मिलकर बचाव कार्यों में जुटे हैं. मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा की संभावना व्यक्त की है, ऐसे में प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती संभावित बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की नई घटनाओं से समय रहते लोगों को सुरक्षित निकालना और जनहानि को न्यूनतम रखना है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-