पेरू में प्लेन क्रैश: 13 लोगों की गई जान, 2 हजार साल पुरानी नाज्का लाइन्स देखने गए थे

पेरू में प्लेन क्रैश: 13 लोगों की गई जान, 2 हजार साल पुरानी नाज्का लाइन्स देखने गए थे

प्रेषित समय :15:57:40 PM / Sun, Aug 2nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. दक्षिणी अमेरिकी देश पेरू में शनिवार को बड़ा हादसा हो गया, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई. जानकारी के अनुसार, सभी पर्यटक थे और विमान में सवार थे. इसी दौरान प्लेन क्रैश हुआ और क्रू सहित 13 लोगों की मौत हो गई. घटना पेरू के नाज्का शहर के पास की है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नाज्का लाइन्स पहुंचने के बाद प्लेन खेत में गिर गया था. क्रैश होते ही प्लेन में आग लग गई. 13 मृतकों में 11 पर्यटक और 2 पायलट्स थे. क्रैश के बाद प्लेन के मलबे के पास जले हुए शव बिखरे पड़े थे. बता दें, नाज्का लाइन्स 2000 साल पुराना दार्शनिक स्थल है. नाज्का लाइन्स को पूरी तरह से सिर्फ प्लेन या फिर व्यूइंग टॉवर से ही देखा जा सकता है. इस वजह से पर्यटक प्लेन में सवार होकर नाज्का लाइन्स देखने जा रहे थे.

मृतकों की अब तक पहचान नहीं हुई

जानकारी के अनुसार, मृतकों की अब तक पहचान नहीं हो पाई है. उनके बारे में अब तक कोई जानकारी भी सामने नहीं आई है, मसलन- क्या सभी एक ही परिवार के सदस्य थे? क्या सभी एक दूसरे को जानते थे? वे लोग कहां से आए थे? आदि-आदि. स्थानीय पुलिस तमाम जानकारियां ढूंढने में जुटी हुई है.  

पेरू प्लेन हादसे के बाद खेत में बिखरे शव

हादसे में जो प्लेन शिकार हुआ, वह पेरू की एरोडियाना कंपनी द्वारा ऑपरेट किया जा रहा था. एयरलाइन की वेबसाइट के अनुसार, कंपनी ऊपर से नाज्का लाइन्स दिखाने की सुविधा पर्यटकों को देती है और इसके लिए पिछले 14 वर्षों से कंपनी सेसना ग्रैंड कारवां प्लेन का इस्तेमाल कर रही है. हादसे की जांच की जा रही है कि आखिर हादसा किस वजह से हुआ?

किसने बनाई थी नाज्का लाइन्स?

नाज्का लाइन्स पेरू की राजधानी लीमा से करीब 400 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. यहां नाज्का और पाल्पा रेगिस्तान में कुछ आकृतियां बनी हुई हैं. माना जाता है कि करीब 200 ईसा पूर्व से 600 ईस्वी के बीच नाज्का सभ्यता के लोगों ने इसे बनाया था. यहां रेगिस्तान की गहरे रंग की पत्थरीली सतह हटाकर नीचे की हल्की मिट्टी को दिखाया गया है, जिससे ये आकृतियां बनी हैं.

करीब 2 हजार वर्षों से कैसे सुरक्षित है नाज्का लाइन्स

कई आकृतियां 100 से 300 मीटर और उससे भी बड़ी है. कुछ सीधी रेखाएं तो कई किलोमीटर तक फैल जाती है. आखिर इन्हें क्यों बनाया गया था, ये आज भी एक रहस्य ही है. वैज्ञानिकों के अनुसार ये धार्मिक अनुष्ठान, वॉटर सोर्स, अंतरिक्ष की गणनाओं या फिर संस्कृति से जुड़ी हो सकती हैं. इस इलाके में बहुत कम बारिश होती है और शुष्क जलवायु होने की वजह से ये आकृतियां करीब 2 हजार वर्षों से सुरक्षित हैं

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-