350 करोड़ के स्कूल ड्रेस टेंडर पर हाई कोर्ट की बड़ी रोक, सरकार से एक सप्ताह में जवाब तलब

350 करोड़ के स्कूल ड्रेस टेंडर पर हाई कोर्ट की बड़ी रोक, सरकार से एक सप्ताह में जवाब तलब

प्रेषित समय :16:58:34 PM / Fri, Aug 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म की आपूर्ति से जुड़े करीब 350 करोड़ रुपये के टेंडर पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए टेंडर प्रक्रिया को फिलहाल अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को एक सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जवाब दाखिल होने तक टेंडर प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया जाएगा. इस आदेश को प्रदेश के पावरलूम उद्योग और बुनकर समुदाय के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.

मामले की सुनवाई अल्पसंख्यक पिछड़ा वर्ग पावरलूम बुनकर संघ सहित तीन बुनकर संगठनों द्वारा दायर याचिकाओं पर हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्रेयस धर्माधिकारी और तीर्थेश भारिल्ल ने पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से डॉ. एस.एस. चौहान ने न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया. याचिकाओं में मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम द्वारा 3 जून 2026 को जारी स्कूल ड्रेस आपूर्ति संबंधी टेंडर प्रक्रिया को चुनौती दी गई है.

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह टेंडर मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम, 2023 के प्रावधानों के विपरीत जारी किया गया है. उनका तर्क है कि वर्ष 1993 से राज्य स्तरीय पावरलूम सहकारिता समिति को सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म आपूर्ति के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करने की व्यवस्था रही है. इसके अलावा वर्ष 2023 के भंडार क्रय नियमों के अनुसार राज्य उपक्रमों से स्कूल ड्रेस की खरीदी के लिए खुली निविदा जारी करने की आवश्यकता नहीं है. इसके बावजूद मध्य प्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम ने लगभग 350 करोड़ रुपये का खुला टेंडर जारी कर दिया, जिससे स्थापित व्यवस्था प्रभावित हुई है.

याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि यदि वर्तमान टेंडर प्रक्रिया लागू होती है तो प्रदेश के पावरलूम और स्पिनिंग मिल उद्योग से जुड़े लगभग दो लाख बुनकर परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ सकता है. बुनकर संगठनों का दावा है कि इस उद्योग से जुड़े अनेक परिवारों ने अपने व्यवसाय के संचालन और विस्तार के लिए बैंकों से ऋण लिया है. यदि यूनिफॉर्म आपूर्ति का कार्य निजी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से अन्य एजेंसियों को दिया जाता है तो इन बुनकरों के सामने रोजगार और आर्थिक स्थिरता का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से विस्तृत जवाब मांगा तथा अंतरिम व्यवस्था के रूप में टेंडर को अंतिम रूप देने पर रोक लगा दी. साथ ही निर्देश दिया कि इन याचिकाओं को पहले से विचाराधीन संबंधित याचिका के साथ सूचीबद्ध किया जाए, ताकि सभी जुड़े मुद्दों पर एक साथ सुनवाई की जा सके.

हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल 350 करोड़ रुपये की यूनिफॉर्म खरीदी प्रक्रिया पर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है. अब सभी पक्षों की नजर राज्य सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी या याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों के आधार पर इसमें कोई बदलाव अथवा अन्य निर्देश जारी किए जाएंगे. न्यायालय के अंतिम निर्णय का प्रभाव न केवल सरकारी खरीद प्रक्रिया पर पड़ेगा, बल्कि प्रदेश के लाखों बुनकरों और उनसे जुड़े उद्योग के भविष्य पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-