गुजरात: कच्छ के रेगिस्तान में मिला पुरातत्व का खजाना, 100 से अधिक नरकंकाल और प्राचीन अवशेष बरामद

गुजरात: कच्छ के रेगिस्तान में मिला पुरातत्व का खजाना, 100 से अधिक नरकंकाल और प्राचीन अवशेष बरामद

प्रेषित समय :18:08:42 PM / Sat, Aug 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अहमदाबाद. गुजरात के कच्छ के रेगिस्तान से एक ऐसा ऐतिहासिक और पुरातात्विक रहस्य सामने आया है, जो भारत के प्राचीन इतिहास को एक नया मोड़ दे सकता है. कच्छ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रेगिस्तानी इलाके में एक प्राचीन मानव बस्ती के अवशेषों के साथ-साथ 100 से अधिक मानव कंकाल और मिट्टी के प्राचीन बर्तन खोज निकाले हैं. शुरुआती अध्ययन के अनुसार, यह स्थल मध्यकालीन युग या फिर सिंधु घाटी सभ्यता के उत्तर काल का हो सकता है. इस बड़ी खोज ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और पुरातत्वविदों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

वर्तमान रेगिस्तान में कभी धड़कती थी मानव बस्ती

जहां आज कच्छ का विशाल और बंजर रेगिस्तान दिखाई देता है, वहां कभी इंसानों की एक समृद्ध और सक्रिय आबादी रहा करती थी. कच्छ यूनिवर्सिटी के जियोसाइंस विभाग के प्रभारी डॉ. गौरव चौहान और उनकी टीम ने इस महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल की खोज की है. यहां खुली जमीन पर मिले 100 से अधिक नरकंकालों को एक ही निश्चित दिशा में और बेहद व्यवस्थित तरीके से दफनाया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि दफनाने का यह तरीका उस काल की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है. नरकंकालों के साथ ही इस स्थान से टेराकोटा के खिलौने, मिट्टी के बर्तन और प्राचीन इमारतों के अवशेष भी मिले हैं.

बीएसएफ जवानों की सतर्कता से खुला राज

इस प्राचीन ऐतिहासिक स्थल की जानकारी सबसे पहले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों को गश्त के दौरान मिली थी. जवानों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद, कच्छ यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक टीम ने इस क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया. प्रारंभिक जांच में यह स्थान लगभग 1000 से 1500 साल पुराना होने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसके ऐतिहासिक तार धोलावीरा और सिंधु घाटी सभ्यता के अंतिम दौर से जुड़े होने की पूरी संभावना है.

उन्नत वैज्ञानिक जांच की तैयारी
 
इस खोज के रहस्यों से पूरी तरह पर्दा उठाने के लिए अब बड़े स्तर पर वैज्ञानिक विश्लेषण की तैयारी की जा रही है. इन अवशेषों के कार्बन डेटिंग, डीएनए परीक्षण और अन्य उन्नत वैज्ञानिक जांच के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, डेक्कन कॉलेज, इसरो और पीआरएल जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ संयुक्त शोध किया जाएगा. यदि इन जांचों में शुरुआती अनुमानों की पुष्टि होती है, तो यह खोज कच्छ के प्राचीन और गौरवशाली इतिहास में एक क्रांतिकारी अध्याय जोड़ देगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-