- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 8875863494
* हरियाली अमावस्या - 12 अगस्त 2026, बुधवार
* अमावस्या तिथि प्रारम्भ - 12 अगस्त 2026 को 01:52 एएम बजे
* अमावस्या तिथि समाप्त - 12 अगस्त 2026 को 11:06 पीएम बजे
अमावस्या हर माह की 30वीं अर्थात कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है, जिस तिथि में चन्द्र और सूर्य साथ रहते हैं, वही अमावस्या तिथि है.
सावन की अमावस्या, हरियाली अमावस्या कहलाती है, जो प्रकृति की हरियाली की रक्षा करने की हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाती है.
श्रावण कृष्ण अमावस्या को हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाता है. यह सावन में पृथ्वी पर हरियाली के जन्मोत्सव की खुशियों का त्योहार है. इसका मुख्य उद्देश्य आमजन को प्रकृति के करीब लाना, हरियाली का महत्व दर्शाना एवं इसके प्रति हमारी जिम्मेदारी की याद दिलाना है. कई जगहों पर इस दिन मेले लगते हैं.
इस दिन कल्पवृक्ष, पीपल आदि पवित्र वृक्षों की पूजा करने का उत्तम फल मिलता है. यदि इस दिन पौधा लगाकर उसकी रक्षा की जाए तो जैसे-जैसे पौधा वृद्धि करेगा वैसे-वैसे हमारी प्रगति होगी. पौधा अपने प्रियजन की समृद्धि की कामना के साथ भी लगा सकते हैं. उत्तम होगा यदि प्रकृति धर्म कर्म के लिए हरियाली अमावस्या पर हर साल एक पौधा लगाने का संकल्प लें!
हिन्दू धर्म में माना जाता है कि वृक्षों में देवताओं का वास होता है. धर्म शास्त्रों के अनुसार पीपल के वृक्ष में त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास होता है तो केले के पौधे में श्रीविष्णु निवास करते हैं. आंवले के पौधे में भगवान लक्ष्मीनारायण बसते हैं तो बरगद में पितृ देवों का अंश होता है. श्वेत आक में गणपति का निवास होता है. इसलिए हरियाली अमावस्या के दिन पौधे लगाना बहुत पुण्य का कार्य माना गया है. धर्म शास्त्रों के अनुसार एक वृक्ष दस योग्य पुत्रों के समान होता है.
हिंदू धर्म की मान्यता है कि पितृदेव अपने कुल के रक्षक होते हैं, अमावस्या के दिन किए गए दान, श्राद्ध, तर्पण से उन्हें प्रसन्नता मिलती है जो आशीर्वाद के रूप में हमें प्राप्त होती है और भाग्योदय होता है.
अमावस्या के अवसर पर किसी पवित्र तीर्थ में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है. हरियाली अमावस्या पर कई जगहों पर मेलों का आयोजन किया जाता है जिसमें सभी लोगों उत्साह के साथ शामिल होते हैं. इस अवसर पर गुड़ और गेहूं की धानी का प्रसाद वितरित जाता है. इस अवसर पर धान की सांकेतिक बुआई भी होती है ताकि आने वाली फसल का अनुमान लगाया जा सके. धर्मग्रंथों के अनुसार वृक्ष योनि पूर्व जन्मों के कर्मों का फल है जो परोपकार के लिए है.
अलग-अलग मनोकामनाएं पूर्ण करने हेतु विविध वृक्ष लगाए जाते हैं-
* धनलाभ प्राप्ति के लिए- तुलसी, आंवला, केल, बिल्वपत्र के वृक्ष लगाये.
* उत्तम स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए- ब्राह्मी, पलाश, अर्जुन, आंवला, सूरजमुखी, तुलसी लगाये.
* भाग्योदय के लिए- कल्पवृक्ष, अशोक, अर्जुन, नारियल, बड़ के वृक्ष लगाये.
* संतान सुख के लिए- पीपल, नीम, बिल्व, नागकेसर, गुड़हल, अश्वगंधा लगाये.
* पद-पदोन्नति के लिए- आंकड़ा, शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी, तुलसी लगाये.
* सुख-समृद्धि के लिए- नीम, कदम्ब और छायादार वृक्ष लगाये.
* जीवन में आनन्द के लिए- पारिजात, रातरानी, मोगरा, गुलाब आदि लगाये.
आज का राशिफल : 12 अगस्त 2026
वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ राशियों के लिए उत्तम समय, शेष राशियों के लिए सामान्य दिन, धनु राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र, शिवोपासना करें!
अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

