खुशी कपूर को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री हटाने का आदेश

खुशी कपूर को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री हटाने का आदेश

प्रेषित समय :21:05:14 PM / Wed, Aug 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. अभिनेत्री खुशी कपूर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभिनेत्री से संबंधित कथित अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही कोर्ट ने खुशी कपूर के व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने उनकी पहचान, नाम, छवि और व्यक्तित्व का बिना अनुमति इस्तेमाल कर व्यावसायिक लाभ उठाने वाली सामग्री पर भी रोक लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया है.

खुशी कपूर ने अपने व्यक्तित्व और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मामले की सुनवाई बुधवार को न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की अदालत में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने अभिनेत्री की ओर से दायर याचिका पर विचार करते हुए सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध कथित अश्लील तथा पोर्नोग्राफिक सामग्री को हटाने के निर्देश दिए. अदालत ने ऐसे कंटेंट को भी हटाने को कहा, जिसमें अभिनेत्री की पहचान या व्यक्तित्व का अनधिकृत तरीके से इस्तेमाल किया गया हो.

अदालत के समक्ष खुशी कपूर की ओर से उनके व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों की सुरक्षा का मुद्दा रखा गया. याचिका में कथित तौर पर ऐसी सामग्री और गतिविधियों के खिलाफ संरक्षण मांगा गया था, जिनमें अभिनेत्री की पहचान का उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया जा रहा था. इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक सामग्री के अलावा उनकी तस्वीर, नाम अथवा व्यक्तित्व से जुड़े तत्वों का उपयोग कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने का मुद्दा भी शामिल था.

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि खुशी कपूर के पक्ष में जॉन डो आदेश पारित किया जाएगा. इस तरह के आदेश का उद्देश्य उन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराना होता है, जिनकी पहचान फिलहाल सामने नहीं आई है, लेकिन वे किसी व्यक्ति की पहचान या व्यक्तित्व का अनधिकृत इस्तेमाल कर रहे हैं. डिजिटल दुनिया में इस तरह की सामग्री अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग खातों या वेबसाइटों के माध्यम से सामने आ सकती है. ऐसे में अज्ञात लोगों के खिलाफ संरक्षण का आदेश प्रभावी उपाय माना जाता है.

अदालत ने कथित अश्लील और पोर्नोग्राफिक सामग्री को हटाने के अलावा अभिनेत्री के व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के अनधिकृत इस्तेमाल पर भी रोक लगाने के निर्देश दिए. इनमें अभिनेत्री की पहचान का इस्तेमाल कर कथित रूप से बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जा रहे मर्चेंडाइज का मामला भी शामिल है. कोर्ट के निर्देश के बाद ऐसे कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, जिसमें खुशी कपूर के नाम, तस्वीर या व्यक्तित्व का इस्तेमाल बिना अनुमति के किया गया है.

खुशी कपूर के मामले में यह घटनाक्रम उनकी बहन और अभिनेत्री जान्हवी कपूर को दिल्ली हाई कोर्ट से मिली इसी तरह की राहत के एक दिन बाद सामने आया है. मंगलवार को जान्हवी कपूर ने भी आपत्तिजनक सामग्री और उनके व्यक्तित्व के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत का रुख किया था. उस मामले में अदालत ने कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दिया था. हालांकि, कोर्ट ने जान्हवी कपूर की मांग के अनुरूप सभी फैन पेजों पर blanket injunction लगाने से इनकार कर दिया था.

जान्हवी कपूर के मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने की थी. अदालत ने फैन पेजों को एक ही श्रेणी में रखने के बजाय उनके स्वरूप और सामग्री के आधार पर अंतर करने की जरूरत बताई थी. कोर्ट ने माना था कि कुछ फैन साइट किसी कलाकार के काम की प्रशंसा कर सकती हैं, जबकि कुछ अन्य आलोचनात्मक सामग्री भी प्रकाशित कर सकती हैं. इसलिए सभी फैन पेजों को एक साथ बंद करने का आदेश देना उचित नहीं होगा.

खुशी कपूर और जान्हवी कपूर से जुड़े इन मामलों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट में सेलिब्रिटीज के व्यक्तित्व अधिकारों से संबंधित याचिकाओं की बढ़ती संख्या भी चर्चा में है. पिछले कुछ समय में कई कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों ने अपने नाम, फोटो, आवाज, पहचान और अन्य व्यक्तित्व विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत का रुख किया है. डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार होने वाली सामग्री के बढ़ते इस्तेमाल के कारण ऐसे मामलों की प्रकृति भी लगातार बदल रही है.

कई मशहूर हस्तियां अपने व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा चुकी हैं. इनमें अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, अभिषेक बच्चन, सलमान खान, करण जौहर, ऋतिक रोशन, तब्बू, जूनियर एनटीआर, अल्लू अर्जुन, नागार्जुन और आर. माधवन जैसे नाम शामिल हैं. इन मामलों में सेलिब्रिटीज ने अपने नाम, तस्वीर, आवाज, समानता और पहचान के व्यावसायिक अथवा डिजिटल इस्तेमाल पर नियंत्रण की मांग की है.

सेलिब्रिटी पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े मामलों में अदालतों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह संतुलन बनाए रखना होती है कि किसी व्यक्ति की पहचान और प्रतिष्ठा का अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल न हो, लेकिन वैध अभिव्यक्ति और आलोचना के अधिकार भी प्रभावित न हों. यही कारण है कि अदालतें कई मामलों में आपत्तिजनक या अनधिकृत सामग्री पर कार्रवाई का निर्देश देती हैं, लेकिन सभी प्रकार के प्रशंसक पेज या आलोचनात्मक सामग्री पर blanket रोक लगाने से बचती हैं.

खुशी कपूर ने वर्ष 2023 में जोया अख्तर की फिल्म ‘द आर्चीज’ के जरिए अभिनय की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘लवयापा’ के जरिए थिएटर में डेब्यू किया. इसी वर्ष वह नेटफ्लिक्स की फिल्म ‘नादानियां’ में भी नजर आईं. रिपोर्ट्स के अनुसार, वह आगामी समय में ‘मॉम 2’ में दिखाई दे सकती हैं. इस बीच उनके व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़ा मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कलाकारों की पहचान के इस्तेमाल को लेकर एक और महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम बन गया है.

दूसरी ओर जान्हवी कपूर भी लगातार फिल्मों में सक्रिय हैं. उन्होंने ‘होमबाउंड’, ‘परम सुंदरी’ और ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ जैसी फिल्मों में काम किया है. इसके अलावा वह तेलुगु फिल्म ‘पेड्डी’ में भी नजर आई हैं और उनके आगामी प्रोजेक्ट्स में ‘लग जा गले’ शामिल है.

खुशी कपूर के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के बुधवार के निर्देश के बाद अब संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्मों और अन्य माध्यमों पर मौजूद कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी. अदालत का आदेश उन अज्ञात लोगों के खिलाफ भी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में है, जो अभिनेत्री की पहचान या व्यक्तित्व का बिना अनुमति इस्तेमाल कर रहे हैं. इस मामले की आगे की कार्यवाही में यह स्पष्ट हो सकता है कि संबंधित प्लेटफॉर्म और अन्य पक्ष अदालत के निर्देशों का किस तरह पालन करते हैं.

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है, जब इंटरनेट और सोशल मीडिया पर किसी सार्वजनिक व्यक्ति की तस्वीर, नाम और पहचान का इस्तेमाल कुछ ही समय में बड़े स्तर पर फैल सकता है. ऐसे में अदालतों के सामने व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के साथ डिजिटल अभिव्यक्ति की सीमाओं को निर्धारित करने की चुनौती भी बढ़ रही है. खुशी कपूर को मिली राहत इसी व्यापक कानूनी विमर्श का हिस्सा है, जिसमें किसी व्यक्ति की पहचान और व्यक्तित्व का अनधिकृत इस्तेमाल रोकने के साथ-साथ वैध डिजिटल अभिव्यक्ति के अधिकारों के बीच संतुलन कायम करने की कोशिश की जा रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-