मुंबई के ताड़देव में 6.5 करोड़ का फ्लैट सिर्फ शाकाहारियों के लिए, वायरल लिस्टिंग पर उठा भेदभाव का सवाल

मुंबई के ताड़देव में 6.5 करोड़ का फ्लैट सिर्फ शाकाहारियों के लिए, वायरल लिस्टिंग पर उठा भेदभाव का सवाल

प्रेषित समय :21:41:44 PM / Wed, Aug 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. दक्षिण मुंबई के ताड़देव इलाके में करीब 6.5 करोड़ रुपये के 2BHK फ्लैट की एक वायरल प्रॉपर्टी लिस्टिंग ने आवासीय सोसायटियों में खानपान के आधार पर कथित पाबंदियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. करीब 900 वर्गफुट कारपेट एरिया वाले इस फ्लैट की लिस्टिंग में ‘Vegetarian Only’ यानी केवल शाकाहारी लोगों के लिए होने की शर्त का उल्लेख किया गया है. सोशल मीडिया पर यह जानकारी सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि क्या किसी व्यक्ति की खानपान की पसंद उसके घर खरीदने या उसमें रहने के अधिकार को तय कर सकती है.

यह प्रॉपर्टी ताड़देव जैसे दक्षिण मुंबई के प्रमुख और महंगे इलाके में स्थित बताई गई है. लिस्टिंग के अनुसार फ्लैट में बालकनी है, जहां से दक्षिण मुंबई और समुद्र का विस्तृत दृश्य दिखाई देता है. इसके साथ सरफेस या पोडियम पार्किंग की सुविधा भी बताई गई है. करीब 900 वर्गफुट कारपेट एरिया वाले इस फ्लैट की कीमत लगभग 6.5 करोड़ रुपये रखी गई है.

मामला उस समय चर्चा में आया जब प्रॉपर्टी डीलर और रियल एस्टेट इंफ्लुएंसर भावेश कावरे, जिन्हें ‘Property Transaction Guru’ के नाम से भी जाना जाता है, ने इस संपत्ति का वीडियो इंस्टाग्राम पर साझा किया. वीडियो में प्रॉपर्टी की जानकारी के साथ ‘Vegetarian Only’ शर्त का उल्लेख किया गया. देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसे हजारों लोगों ने देखा. रिपोर्ट के अनुसार वीडियो को 46 हजार से अधिक व्यूज और 700 से ज्यादा लाइक्स मिल चुके हैं.

वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा सवाल यही उठाया गया कि आखिर आवासीय संपत्ति खरीदने या किराये पर लेने के मामले में किसी व्यक्ति की भोजन संबंधी पसंद को किस हद तक आधार बनाया जा सकता है. कई लोगों ने सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति फ्लैट खरीदने की आर्थिक क्षमता रखता है और संपत्ति की अन्य सभी शर्तें पूरी करता है तो केवल उसके शाकाहारी या मांसाहारी होने के आधार पर उसके आवास का फैसला क्यों किया जाना चाहिए.

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने महाराष्ट्र के राजनीतिक नेताओं और संबंधित संस्थाओं को टैग करते हुए मामले पर कार्रवाई की मांग भी की. इस विवाद में शिंदे सेना के युवा नेता गुरज्योत सिंह कीर की प्रतिक्रिया भी सामने आई. उन्होंने कथित प्रतिबंध पर सवाल उठाते हुए आवासीय व्यवस्था में इस तरह की शर्तों को लेकर आपत्ति जताई. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने राजनीतिक सवाल भी खड़े किए और पूछा कि क्या मुंबई में रहने वाले लोगों के लिए समुदाय, भाषा और खानपान जैसी पहचान के आधार पर आवासीय अवसर सीमित किए जाने चाहिए.

यह विवाद मुंबई के लिए नया नहीं है. महानगर में आवासीय सोसायटियों द्वारा खानपान, समुदाय, वैवाहिक स्थिति और अन्य व्यक्तिगत पसंद के आधार पर फ्लैट देने या बेचने से जुड़े विवाद समय-समय पर सामने आते रहे हैं. मुंबई जैसे शहर में जहां जमीन और आवास की कीमतें बहुत अधिक हैं, वहां लोगों के लिए अपनी पसंद और बजट के अनुसार घर तलाशना पहले ही चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में किसी अतिरिक्त सामाजिक या व्यक्तिगत शर्त के जुड़ने से बहस और तेज हो जाती है.

हालांकि, इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य अभी स्पष्ट नहीं है. वायरल वीडियो में ‘Vegetarian Only’ शर्त दिखाई गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह वास्तव में संबंधित हाउसिंग सोसायटी का आधिकारिक और लागू नियम है या फिर फ्लैट बेचने वाले व्यक्ति की शर्त है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रॉपर्टी ब्रोकर ने अपनी ओर से इस शर्त को लिस्टिंग में शामिल किया है या सोसायटी के नियमों के आधार पर इसका उल्लेख किया गया है.

इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि पूरी सोसायटी ने औपचारिक रूप से गैर-शाकाहारी लोगों को फ्लैट खरीदने या रहने से प्रतिबंधित किया है. इस संबंध में सोसायटी के आधिकारिक दस्तावेज, बिक्री की शर्तें और संबंधित पक्षों की स्पष्ट जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी.

फिर भी इस लिस्टिंग ने मुंबई के आवासीय बाजार में समानता और समावेशिता से जुड़े पुराने सवालों को फिर सामने ला दिया है. सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि घर केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि व्यक्ति के निजी जीवन और स्वतंत्रता से भी जुड़ा विषय है. ऐसे में भोजन की पसंद के आधार पर आवासीय अवसर सीमित किए जाने को लेकर स्पष्ट नियम और पारदर्शिता जरूरी है.

दूसरी ओर, आवासीय सोसायटियों और संपत्ति मालिकों के अधिकारों को लेकर भी अलग-अलग कानूनी और सामाजिक प्रश्न जुड़े हुए हैं. किसी भी विशेष मामले में यह देखना जरूरी होता है कि संपत्ति किस प्रकार की है, सोसायटी के उपनियम क्या कहते हैं, बिक्री की शर्तें क्या हैं और लागू कानून इस संबंध में क्या व्यवस्था करते हैं. इसलिए वायरल पोस्ट या वीडियो के आधार पर किसी अंतिम कानूनी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.

ताड़देव की इस संपत्ति की कीमत करीब 6.5 करोड़ रुपये होने के कारण मामला और भी चर्चा में आ गया है. इतने महंगे फ्लैट की बिक्री के विज्ञापन में ‘Vegetarian Only’ जैसी शर्त दिखाई देने से लोगों ने सवाल किया कि क्या महानगर के प्रीमियम आवासीय बाजार में भी व्यक्तिगत पहचान और खानपान के आधार पर खरीदारों का चयन किया जाना चाहिए.

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही बना हुआ है कि ‘Vegetarian Only’ शर्त का वास्तविक स्रोत क्या है और क्या इसे किसी आधिकारिक नियम का समर्थन प्राप्त है. जब तक संबंधित सोसायटी, विक्रेता या ब्रोकर की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आती, तब तक वायरल वीडियो में किए गए दावे को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए. हालांकि, इसने मुंबई में आवासीय भेदभाव, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोसायटी के अधिकारों को लेकर एक बार फिर व्यापक बहस जरूर शुरू कर दी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-