नई दिल्ली.केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का वजन कम करने का सफर इन दिनों चर्चा में है. कभी करीब 135 किलोग्राम वजन वाले गडकरी ने अपने वजन में लगभग 46 किलोग्राम की कमी की है और अब उनका वजन करीब 89 किलोग्राम बताया गया है. गडकरी ने अपने इस बदलाव को किसी त्वरित उपाय या दिखावे से जोड़ने के बजाय जीवनशैली में आए बड़े परिवर्तन का परिणाम बताया है. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और नियमित व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से उन्हें इस बदलाव में मदद मिली.
गडकरी ने एक बातचीत के दौरान अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य से जुड़े अनुभव साझा किए थे. फिल्म निर्माता फराह खान द्वारा साझा किए गए यूट्यूब वीडियो में उन्होंने बताया कि उनका कामकाजी जीवन बेहद व्यस्त रहता है. इसके बावजूद उन्होंने व्यायाम के लिए नियमित समय निकालना शुरू किया. गडकरी के अनुसार, अब वह प्रतिदिन करीब दो से ढाई घंटे तक व्यायाम करते हैं और इसे अपनी दिनचर्या का जरूरी हिस्सा मानते हैं.
उन्होंने बताया कि रात देर तक बैठकों और कार्यक्रमों का सिलसिला चलने के बावजूद वह अगले दिन सुबह उठकर अपनी फिटनेस पर ध्यान देते हैं. गडकरी ने अपने पुराने जीवन के बारे में बात करते हुए स्वीकार किया कि पहले उनकी जीवनशैली काफी अनियोजित और अनुशासनहीन थी. समय के साथ उन्होंने अपनी आदतों में बदलाव किया और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना शुरू किया. उनके अनुसार, वजन कम करने की प्रक्रिया केवल शरीर में बदलाव तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे उनके दैनिक जीवन और सोच में भी परिवर्तन आया.
गडकरी के मुताबिक, एक समय उनका वजन 135 किलोग्राम तक पहुंच गया था. अब वह इसे घटाकर करीब 89 किलोग्राम तक ले आए हैं. यानी उनके वजन में लगभग 46 किलोग्राम की कमी हुई है. उन्होंने नियमित व्यायाम को इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. उनका कहना है कि व्यायाम करने के बाद उन्हें इसके सकारात्मक प्रभाव महसूस हुए और इसका असर उनके चेहरे पर भी दिखाई देने लगा.
गडकरी ने अपनी फिटनेस यात्रा के पीछे कोरोना महामारी के दौरान हुए अनुभव को भी महत्वपूर्ण कारण बताया. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौर में उनके कई ऐसे मित्र दुनिया से चले गए, जो उनके साथ रहे थे. इस घटना ने उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीरता से सोचने के लिए मजबूर किया. उन्होंने महसूस किया कि व्यस्त जीवन और काम की जिम्मेदारियों के बीच स्वास्थ्य की अनदेखी करना उचित नहीं है.
कोविड के दौरान हुए व्यक्तिगत अनुभवों ने उनके लिए स्वास्थ्य को प्राथमिकता बनाने का काम किया. गडकरी ने इसी संदर्भ में कहा था कि स्वास्थ्य ही वास्तविक संपत्ति है. इसके बाद उन्होंने अपनी जीवनशैली में बदलाव करने पर ध्यान केंद्रित किया. उनका जोर किसी तात्कालिक वजन घटाने के उपाय पर नहीं, बल्कि नियमितता और अनुशासन पर रहा.
गडकरी की फिटनेस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उन्होंने अपने व्यस्त राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यक्रम के बीच व्यायाम के लिए समय निर्धारित किया. केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके सामने लगातार बैठकें, यात्राएं और अन्य आधिकारिक जिम्मेदारियां रहती हैं. इसके बावजूद उन्होंने रोजाना लंबा समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालने की बात कही है. उनका अनुभव यह बताता है कि नियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता जीवनशैली में बड़े बदलाव का आधार बन सकती है.
हालांकि, वजन घटाने के किसी भी व्यक्तिगत अनुभव को सभी लोगों के लिए समान फार्मूला नहीं माना जा सकता. किसी व्यक्ति का वजन, उम्र, शारीरिक स्थिति, खानपान, नींद और व्यायाम की क्षमता अलग-अलग होती है. इसलिए विशेषज्ञों की सलाह के बिना किसी अन्य व्यक्ति की फिटनेस दिनचर्या को सीधे अपनाना उचित नहीं माना जाता. गडकरी के मामले में भी उनकी बताई गई दिनचर्या उनके व्यक्तिगत अनुभव का हिस्सा है.
गडकरी ने अपनी बातचीत में अपने पुराने जीवन को लेकर भी स्पष्टता दिखाई. उन्होंने माना कि पहले उनकी दिनचर्या में अनुशासन की कमी थी. काम के दबाव और अनियमित जीवनशैली के बीच स्वास्थ्य पीछे छूट गया था. बाद में उन्होंने इसे बदलने का निर्णय लिया. नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने के साथ-साथ उन्होंने स्वास्थ्य को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को भी बदला.
46 किलोग्राम वजन कम होना उनके लिए एक बड़ा शारीरिक बदलाव है. लेकिन उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि इस परिवर्तन के पीछे मानसिक स्तर पर आया बदलाव महत्वपूर्ण रहा. कोरोना काल में परिचित लोगों की मौत ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने की कीमत भारी हो सकती है. इसी अनुभव ने उन्हें अपने जीवन में व्यायाम और स्वास्थ्य को अधिक महत्व देने के लिए प्रेरित किया.
गडकरी के अनुसार, अब व्यायाम उनके लिए केवल वजन घटाने का माध्यम नहीं है. यह उनकी नियमित जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है. करीब दो से ढाई घंटे प्रतिदिन व्यायाम करने की बात उन्होंने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद बताई. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नियमित शारीरिक गतिविधि से उन्हें अपने स्वास्थ्य और ऊर्जा में सकारात्मक बदलाव महसूस हुआ है.
उनकी वजन घटाने की कहानी ऐसे समय में सामने आई है जब सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों की फिटनेस और स्वास्थ्य पर भी लगातार चर्चा होती है. लंबे समय तक काम करने वाले नेताओं और सार्वजनिक पदों पर रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है. गडकरी का अनुभव इसी संदर्भ में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है.
हालांकि गडकरी ने अपने वजन कम होने का श्रेय मुख्य रूप से जीवनशैली में बदलाव और नियमित व्यायाम को दिया है, लेकिन उनकी पूरी व्यक्तिगत डाइट या चिकित्सकीय निगरानी से जुड़ी विस्तृत जानकारी इस बातचीत में सामने नहीं आई. इसलिए उनके वजन घटाने को किसी एक विशेष डाइट या व्यायाम पद्धति का परिणाम बताना उचित नहीं होगा.
गडकरी की यात्रा का सबसे प्रमुख संदेश यही है कि स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने के बजाय उसे दैनिक जीवन की प्राथमिकता बनाया जाए. उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि एक समय 135 किलोग्राम वजन होने के बाद अब वह 89 किलोग्राम के आसपास हैं. नियमित व्यायाम, अनुशासन और स्वास्थ्य के प्रति बदली सोच को उन्होंने इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार बताया है. कोविड महामारी के दौरान हुए अनुभवों ने उन्हें स्वास्थ्य के महत्व को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित किया और इसके बाद उन्होंने अपनी दिनचर्या में व्यापक बदलाव किए.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

