-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
* नाग पंचमी - 17 अगस्त 2026, सोमवार
* नाग पंचमी पूजा मुहूर्त - 06:09 एएम से 08:44 एएम
* वागड़, गुजरात में नाग पंचमी - 1 सितम्बर 2026, मंगलवार
* पंचमी तिथि प्रारम्भ - 16 अगस्त 2026 को 04:52 पीएम बजे
* पंचमी तिथि समाप्त - 17 अगस्त 2026 को 05:00 पीएम बजे
जन्म पत्रिका में काल सर्प योग कई बार जीवन में सफलता में बाधा बनता है, इसे दोष मानकर परेशान न हों, कई ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी कुण्डली में काल सर्प योग होने पर भी वे सफलतम रहे हैं, इसलिए यदि कुण्डली में काल सर्प योग है तो शांति के लिए करें-
* यदि जन्म पत्रिका में काल सर्प योग है और उसके कारण नुकसान हो रहा है तो ससमय शांति पूजा करें.
* काल सर्प योग के कारण बाधा-परेशानियां हैं तो नाग पंचमी के दिन नाग प्रतिमा स्थापित कर कच्चा दूध अर्पित करते हुए पूजा करें,
* सम्भव हो तो सपेरे द्वारा पकड़े गए सर्प को बंधन मुक्त करवाएं.
* प्रतिदिन सर्प-सुक्त का पाठ करें.
* भगवान शिव का अभिषेक करें और चाँदी के नाग-नागन का जोड़ा बहते पानी में प्रवाहित करें.
* घर में मोर-मुकुट धारण किए श्रीकृष्ण की मूर्ति-चित्र रखें और यथाशक्ति 'ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय' जाप करते हुए पूजा करें.
* राहु और राहु की दशा से प्रभावित व्यक्ति प्रतिदिन सरस्वती मंत्र पूजा करें.
* देवी सरस्वती की पूजा से भ्रम की स्थिति से मुक्ति मिलती है, राहु से संबंधित परेशानी में देवी सरस्वती की पूजा-आराधना करके लाभ प्राप्त किया जा सकता है!
-सरस्वती वंदना-
या कुन्देदुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता.
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना..
या ब्रह्माच्चुत शंकरप्रभृतिभिदैवे: सदा वंदिता
सा माम् पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा..
* नागपाश मुक्तिदाता श्री हनुमान की पूजा और सुन्दरकांड का पाठ भी लाभदायक है.
अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेह दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम.
सकलगुण निधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रिय भक्तं वातजातं नमामि..
* राहु छाया ग्रह है जो व्यक्ति को मतिभ्रम की स्थिति में ले आता है, जैसे छाया का स्थाई अस्तित्व होता नहीं है, पर नजर आती है वैसे ही राहु का कुप्रभाव स्थाई होता नहीं है पर महसूस होता है!
* राहु की दशा-अंतरदशा में यह विचलित कर देता है तथा व्यक्ति अज्ञात भय से ग्रस्त रहता है!
धर्म कथानुसार.... राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नामक नाग के काटने से हुई थी. जनमेजय जो अर्जुन के पौत्र, परीक्षित के पुत्र थे, ने नागों से बदला लेने और नागवंश के विनाश के लिए नाग यज्ञ किया. नागों की रक्षा के लिए इस यज्ञ को ऋषि जरत्कारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने रोका.
जब इस यज्ञ को रोका गया उस दिन श्रावण मास की पंचमी तिथि थी इसलिए तब से नाग पंचमी पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई.
वैसे पौराणिक काल से ही नाग को देवता के रूप में पूजा जाता रहा है. धर्मग्रंथों के अनुसार ब्रह्मा के पुत्र ऋषि कश्यप की चार पत्नियाँ थी. ऐसा माना जाता है कि उनकी पहली पत्नी से देवता, दूसरी पत्नी से गरुड़ और चौथी पत्नी से दानव उत्पन्न हुए, लेकिन उनकी तीसरी पत्नी कद्रू थी, जिनका संबंध नागवंश से था, वहीं से नागों की उत्पत्ति हुई!
ऐसे करें नाग पंचमी पूजा-व्रत
* स्थानीय धर्मगुरु के निर्देशानुसार नाग पंचमी की पूजा-व्रत करें क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग पंचमियों को नाग पंचमी मनाई जाती है.
* इस पूजा के आठ नागदेव हैं- अनन्त, वासुकी, पद्म, महापद्म, तक्षक, कुलीर, कर्कट और शंख, इन अष्टनानागों की पूजा होती है.
* चतुर्थी के दिन एक समय भोजन करें और पंचमी के दिन पूजा-कथा करके शाम को भोजन करें.
* पूजा करने के लिए यदि नागमंदिर न हो तो मिट्टी की नागमूर्ति, चित्र आदि को प्रतिष्ठित कर पूजा करें.
* स्थानीय पूजा विधि से हल्दी, रोली, चावल, फूल आदि चढ़ाएं.
* पूजा के बाद कच्चा दूध, घी, चीनी मिलाकर नागदेव को अर्पित करें.
* पूजा के बाद नागदेव की कथा सुने, आरती करें.
* कथा का उद्देश्य नाग पंचमी के महत्व को दर्शाना है इसलिए स्थानीय प्रचलित कथा सुने-सुनाएं.
* जो व्यक्ति कालसर्प योग के कुप्रभाव की गिरफ्त में हैं वे इस अवसर का सदुपयोग करें, पूजा करें और संभव हो तो सपेरे के बंधन से किसी सांप को मुक्त करवाएं!
* धर्मग्रंथों के अनुसार नाग दो तरह के होते हैं- दिव्य और भौम. इनमें से दिव्य सर्प देवकार्य करते हैं जबकि पृथ्वी पर विचरण करने वाले विषयुक्त शेष सर्प करीब अस्सी प्रकार के होते हैं.
* ऐसा माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन पूजा करने वाले व्यक्ति और उसके परिवार को सर्प भय नहीं होता है.
* नाग पंचमी के दिन नागदेव को दूध अर्पित करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है!
* आज का राशिफल: 17 अगस्त 2026
मेष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु, मीन राशियों के लिए उत्तम समय, शेष राशियों के लिए सामान्य दिन, कुंभ राशि में जन्मे लोगो के लिए अष्टम चन्द्र, शिवोपासना करें!
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!
आज का दिन 17 अगस्त 2026, पंचमी.... कालसर्प योग के लिए नागपूजा!
प्रेषित समय :22:50:47 PM / Sun, Aug 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

