नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में दिल्ली के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार को गिरफ्तार किया है. समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, यह कार्रवाई 2024 में दर्ज एक एफआईआर के आधार पर की गई है. मामला दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) के विस्तार और उन्नयन से जुड़े टेंडर की प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, टेंडर की शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोपों से जुड़ा है.
सत्येंद्र जैन उस समय दिल्ली सरकार में जल मंत्री थे. मामले में उनके अलावा पांच अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) उदित प्रकाश राय और बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव शामिल हैं. इसके अलावा नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को भी ACB ने मामले में गिरफ्तार किया है.
जांच की शुरुआत दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर हुई थी. शिकायत में दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के विस्तार या उन्नयन के लिए जारी टेंडर की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था. आरोपों के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया में शर्तों के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई और इसके पीछे आपराधिक साजिश का सहारा लिया गया.
मामला वर्ष 2024 में दर्ज एफआईआर से संबंधित है और अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की है. जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद मामले में दिल्ली जल बोर्ड की टेंडर प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.
आरोपों का केंद्र दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स से जुड़ी परियोजनाएं हैं. इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाना और मौजूदा संयंत्रों का उन्नयन करना था. इनसे संबंधित टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर नियमों और निर्धारित शर्तों में हेरफेर किए जाने की शिकायत सामने आई थी. जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताओं से किसे लाभ पहुंचा और पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की क्या भूमिका रही.
सत्येंद्र जैन के अलावा पूर्व DJB CEO उदित प्रकाश राय की गिरफ्तारी को भी मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है. बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव के साथ नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा की गिरफ्तारी से जांच का दायरा और बढ़ गया है. ACB अब गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पूछताछ के जरिए टेंडर प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों को सामने लाने का प्रयास करेगी.
मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी. किसी आरोपी की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होती. जांच एजेंसी को आरोपों से संबंधित साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे और मामले में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा.
सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार में मंत्री रहते हुए कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. दिल्ली की राजनीति में उनका नाम आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में लिया जाता रहा है. उनकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है, क्योंकि आरोप उस अवधि से जुड़े हैं जब वह दिल्ली सरकार में जल मंत्री के पद पर थे.
दिल्ली जल बोर्ड राजधानी की जल आपूर्ति और सीवेज व्यवस्था से जुड़ी प्रमुख संस्था है. इसके तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का संचालन और उनका उन्नयन शहर की पर्यावरणीय एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में STP से जुड़ी परियोजनाओं के टेंडर में कथित अनियमितताओं का मामला प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है.
ACB की कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसी के सामने टेंडर प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जांच करने की चुनौती होगी. इसमें टेंडर की शर्तें कैसे तैयार हुईं, किन अधिकारियों और सलाहकारों की भूमिका रही, निविदाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया कैसे हुई और कथित तौर पर किसी विशेष पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव किया गया या नहीं, जैसे पहलुओं की जांच की जा सकती है.
जांच में यह भी देखा जाएगा कि दिल्ली जल बोर्ड की परियोजनाओं से संबंधित निर्णयों में तत्कालीन अधिकारियों और राजनीतिक पदाधिकारियों की क्या भूमिका थी. गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जांच एजेंसी मामले में दस्तावेजी साक्ष्यों और अन्य संभावित कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी.
फिलहाल ACB ने सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन, पूर्व DJB CEO उदित प्रकाश राय, पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव तथा नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा शामिल हैं. मामला 2024 में दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के बाद दर्ज एफआईआर से जुड़ा है.
टेंडर प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार, शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोपों की जांच अब गिरफ्तारी के बाद अगले चरण में पहुंच गई है. आने वाले दिनों में आरोपियों से पूछताछ और जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज इस मामले की दिशा तय करेंगे. वहीं, आरोपियों के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी.