जबलपुर बनेगा सेना के टी-72 टैंकों का नया ओवरहालिंग हब, 27 अगस्त को राजनाथ सिंह रख सकते हैं प्लांट की नींव

जबलपुर बनेगा सेना के टी-72 टैंकों का नया ओवरहालिंग हब, 27 अगस्त को राजनाथ सिंह रख सकते हैं प्लांट की नींव

प्रेषित समय :20:18:06 PM / Wed, Aug 19th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. देश के रक्षा उत्पादन मानचित्र पर जबलपुर की भूमिका और मजबूत होने जा रही है. सेना के प्रमुख युद्धक टैंक टी-72 की ओवरहालिंग और तकनीकी उन्नयन के लिए व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में नया प्लांट स्थापित करने की तैयारी है. प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 27 अगस्त को जबलपुर पहुंचकर इस महत्वपूर्ण परियोजना की आधारशिला रख सकते हैं. नए प्लांट के अस्तित्व में आने के बाद जबलपुर केवल सैन्य वाहनों के उत्पादन और मरम्मत से जुड़ा केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि सेना के टी-72 टैंकों को दोबारा युद्धक क्षमता के अनुरूप तैयार करने वाले प्रमुख केंद्र के रूप में भी उसकी भूमिका बढ़ जाएगी.

आर्मर्ड व्हीकल निगम लिमिटेड (एवीएनएल) की प्रमुख इकाई व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर में प्रस्तावित यह सुविधा रक्षा उत्पादन के विकेंद्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. अभी तक टी-72 टैंकों की ओवरहालिंग से जुड़ा बड़ा दायित्व तमिलनाडु के अवाडी स्थित हेवी व्हीकल फैक्ट्री से जुड़ा रहा है. वहां नए टैंकों के निर्माण का दबाव बढ़ने के बाद रक्षा मंत्रालय के स्तर पर ओवरहालिंग कार्य को अलग केंद्र पर विकसित करने की आवश्यकता महसूस की गई. इसके लिए जबलपुर की तकनीकी क्षमता और उपलब्ध संसाधनों को उपयुक्त पाया गया.

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अवाडी की उत्पादन इकाई नए सैन्य वाहनों और टैंकों के निर्माण पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगी, जबकि सेवा में मौजूद टी-72 टैंकों की मरम्मत, जीर्णोद्धार और आवश्यक तकनीकी उन्नयन का काम जबलपुर में किया जा सकेगा. इससे दोनों इकाइयों के बीच कार्य का स्पष्ट विभाजन होने के साथ सेना को आवश्यक टैंकों की उपलब्धता बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.

व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर के लिए यह जिम्मेदारी अचानक नहीं आई है. करीब दो वर्ष पहले तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक एसके भोला के कार्यकाल में टी-72 टैंकों की ओवरहालिंग से जुड़े कार्य की आधारभूमि तैयार की गई थी. प्रारंभिक स्तर पर मिले काम में फैक्ट्री ने सेना द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप प्रदर्शन किया. इसके बाद यहां इस क्षमता को स्थायी और बड़े संस्थागत ढांचे में विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया.

नए प्लांट से जबलपुर के रक्षा औद्योगिक क्षेत्र को भी नई गति मिलने की संभावना है. टैंक ओवरहालिंग केवल सामान्य मरम्मत तक सीमित प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि इसमें विभिन्न मैकेनिकल और तकनीकी प्रणालियों की जांच, आवश्यक बदलाव और युद्धक उपयोग के अनुरूप वाहन को फिर तैयार करने जैसे कार्य शामिल होते हैं. ऐसे में परियोजना के विस्तार से विशेषज्ञ तकनीकी कार्यों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रक्षा उत्पादन से जुड़े सहायक उद्योगों और तकनीकी गतिविधियों के लिए भी संभावनाएं बन सकती हैं.

रक्षा मंत्री के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए व्हीकल फैक्ट्री प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं. परियोजना के भूमिपूजन का कार्यक्रम करीब तीन महीने पहले भी प्रस्तावित था, लेकिन रक्षा मंत्री की अन्य व्यस्तताओं के कारण दौरा स्थगित हो गया था. अब 27 अगस्त की संभावित तारीख सामने आने के बाद फैक्ट्री परिसर में कार्यक्रम से संबंधित व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

यदि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का दौरा होता है तो यह जबलपुर के रक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा. टी-72 ओवरहालिंग प्लांट की नींव के साथ व्हीकल फैक्ट्री को दीर्घकालीन रूप से एक नई विशेषज्ञ भूमिका मिलेगी और जबलपुर सेना के बख्तरबंद युद्धक वाहनों की परिचालन क्षमता बनाए रखने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उभरेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-