यू-ट्यूब देखकर बनाया नाबालिगों का गैंग, ट्रेनिंग के बाद ट्रेनों में लूट-चोरी कराता था

यू-ट्यूब देखकर बनाया नाबालिगों का गैंग, ट्रेनिंग के बाद ट्रेनों में लूट-चोरी कराता था

प्रेषित समय :15:50:37 PM / Thu, Aug 20th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी के जबलपुर में रेलवे स्टेशन व ट्रेनों पर चोरी की वारदातों के पीछे नाबालिग बच्चों के गैंग का हाथ निकला है. रेलवे सुरक्षा बल यानी आरपीएफ के मुताबिक, गैंग का मास्टरमाइंड बेलबाग निवासी नीतेश कुमार उर्फ नीतू (40) है, जिसने 12 से 16 साल तक के करीब 70 बच्चों को इस अपराध में जोड़ रखा था.

बताया गया है कि नीतेश गरीब बस्तियों से बच्चों को चुनकर उन्हें करीब दो महीने तक चोरी करने और पकड़े जाने से बचने की ट्रेनिंग देता था. फिर ट्रेनों, प्लेटफॉर्म और वेटिंग रूम में वारदात के लिए भेजता था. नीतेश खुद लंबे समय से ट्रेन में चोरी और लूट करता रहा है, लेकिन करीब दो साल पहले पैर खराब होने के बाद उसने बच्चों को अपराध का जरिया बना लिया. उसे 17 अगस्त को गिरफ्तार किया गया. नीतेश ने नाबालिग बच्चों का गैंग बनाने और उन्हें चोरी के तरीके सिखाने का आइडिया यू-ट्यूब से लिया था. वह ऑनलाइन वीडियो देखकर चोरी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी जुटाता और फिर बच्चों को अपने तरीके से उसकी ट्रेनिंग देता था.

पैर खराब होने पर मांगी भीख, फिर बनाया गैंग-

आरपीएफ थाना प्रभारी राजीव खरब अनुसार नीतेश पर 8 चोरी जबकि 3-3 लूट और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं. वह चलती ट्रेन में यात्रियों का सामान चुराने के अलावा आउटर पर ट्रेन रुकते ही मोबाइल और अन्य सामान लेकर भाग जाता था. आरपीएफ ने उसे कई बार पकड़ा, लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर चोरी में लग जाता था. करीब दो साल पहले उसका दायां पैर खराब हो गया. कुछ समय तक वह स्टेशन के आसपास घूमकर भीख मांगता रहा. इसके बाद उसने खुद चोरी करने के बजाय नाबालिग बच्चों को इस काम में लगाने का तरीका अपनाया.

वारदात के लिए गरीब बस्तियों से चुनता था बच्चे-

आरपीएफ के मुताबिक, नीतेश जबलपुर की स्लम बस्तियों- हनुमानताल, मदार टेकरी, सिद्धबाबा की पहाड़ी और रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को अपने साथ जोड़ता था. कचरा बीनने और सिग्नल के आसपास घूमने वाले बच्चे भी उसके निशाने पर रहते थे. वह उन्हें रुपए कमाने का लालच देता और फिर चोरी की ट्रेनिंग के लिए अपने साथ ले जाता था. रेलवे स्टेशन पर करीब 10 साल तक वेंडर का काम करने के कारण नीतेश को प्लेटफॉर्म, ट्रेनों और यात्रियों की गतिविधियों की अच्छी जानकारी थी. पैर खराब होने के बाद उसने इसी अनुभव का इस्तेमाल बच्चों को चोरी की ट्रेनिंग देने में किया.

गैंग में काम कर चुके लड़कों ने बनाया अलग गिरोह-

नीतेश के गैंग में सिर्फ नाबालिग लड़के रहते थे. कोई भी लड़का जैसे ही 18 साल का होता, उसे गैंग से बाहर कर दिया जाता था. आरपीएफ के मुताबिक, गैंग से निकाले गए कुछ लड़कों ने बाद में अपना अलग गैंग बना लिया था. इन्हीं में से एक हर्ष सिंह कुछ दिन पहले पकड़ा गया था. उसने पूछताछ में बताया था कि चोरी की ट्रेनिंग उसे नीतेश ने ही दी थी. हर्ष पर 18 से ज्यादा चोरी के मामले दर्ज हैं.
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-