सीए से 21 करोड़ की साइबर ठगी में कंबोडिया गैंग का मुख्य हैंडलर गिरफ्तार, इंदौर में चला रहा था फर्जी कॉल सेंटर

सीए से 21 करोड़ की साइबर ठगी में कंबोडिया गैंग का मुख्य हैंडलर गिरफ्तार, इंदौर में चला रहा था फर्जी कॉल सेंटर

प्रेषित समय :19:12:16 PM / Thu, Aug 20th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय से क्रिप्टो ट्रेडिंग के नाम पर हुई 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में राज्य साइबर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. पुलिस ने कंबोडिया में बैठे अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के भारत में मुख्य हैंडलर पिंकेश सूर्यवंशी को मंदसौर से गिरफ्तार किया है. आरोपी मूल रूप से मल्हारगढ़, मंदसौर का रहने वाला है और इंदौर में डिजिटल मार्केटिंग तथा इन्वेस्टमेंट कंपनी की आड़ में फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहा था. पुलिस की जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम में से 10 लाख रुपये सीधे आरोपी के करंट अकाउंट में पहुंचे थे. इसके बाद उसने यह रकम देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय म्यूल खातों में ट्रांसफर कर दी.

पुलिस के मुताबिक पिंकेश सूर्यवंशी कंबोडिया में बैठे साइबर गिरोह के सरगनाओं के निर्देश पर भारत में बैंक खातों और रकम के नेटवर्क को संभाल रहा था. आरोपी ने इंदौर में कथित तौर पर डिजिटल मार्केटिंग और इन्वेस्टमेंट कंपनी के नाम पर एक फर्जी कॉल सेंटर तैयार किया था. यहां बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर जोड़ा जाता था. इसके बाद उन्हें प्रशिक्षण देकर साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल खातों के नेटवर्क को संचालित करने का काम दिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों में ऐसे बैंक खातों का नेटवर्क चला रहा था, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए किया जाता था.

अशोक विजयवर्गीय से हुई 21.05 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के बाद राज्य साइबर पुलिस ने रकम के लेनदेन और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया था. इसी दौरान पिंकेश का नाम सामने आया. जांच में पता चला कि ठगी की रकम में से करीब 10 लाख रुपये उसके करंट अकाउंट में सीधे ट्रांसफर किए गए थे. रकम प्राप्त होने के बाद आरोपी ने उसे अलग-अलग राज्यों में मौजूद म्यूल खातों में भेज दिया. पुलिस का मानना है कि इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को कई स्तरों पर घुमाने और उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था.

जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के नेटवर्क के तकनीकी तौर पर संचालित होने के भी संकेत मिले. प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि बैंक खातों को संचालित करने के लिए विशेष एपीके फाइल और संदिग्ध मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जाता था. इन तकनीकी माध्यमों के जरिए दूसरे राज्यों में मौजूद बैंक खातों को कंबोडिया में बैठे गिरोह के सदस्यों के निर्देश पर रिमोटली नियंत्रित किया जाता था. इसी वजह से पुलिस के लिए इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की वास्तविक लोकेशन और गतिविधियों का पता लगाना चुनौतीपूर्ण रहा.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पिंकेश केवल बैंक खातों के संचालन तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर में फैले म्यूल अकाउंट नेटवर्क को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था. ऐसे खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था. रकम को कई खातों में भेजे जाने के बाद उसे निकालने या आगे ट्रांसफर करने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी के संपर्क में देश के किन-किन राज्यों में कितने लोग थे और कितने बैंक खाते इस नेटवर्क से जुड़े हुए हैं.

इंदौर में चल रहे कथित फर्जी कॉल सेंटर को लेकर भी पुलिस जांच कर रही है. आरोपी बेरोजगार युवाओं को डिजिटल मार्केटिंग और इन्वेस्टमेंट से संबंधित काम के नाम पर अपने साथ जोड़ता था. इसके बाद उन्हें साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खातों और नेटवर्क को संभालने का प्रशिक्षण दिया जाता था. पुलिस अब कॉल सेंटर से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस सेंटर के माध्यम से कितने लोगों को नेटवर्क में शामिल किया गया और उनसे किस तरह का काम कराया जाता था.

यह मामला सामने आने के बाद राज्य साइबर पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश तेज कर दी थी. पिंकेश की गिरफ्तारी इस मामले में तीसरी बड़ी गिरफ्तारी बताई जा रही है. इससे पहले पुलिस ने जगदीश मालवीय को गिरफ्तार किया था, जो भाजपा नेता और शाजापुर का जिला पंचायत सदस्य बताया गया है. इसके अलावा गैंग के हैंडलर अंकित वर्मा को सागर से पकड़ा गया था. अब पिंकेश सूर्यवंशी की गिरफ्तारी से पुलिस को कंबोडिया से संचालित हो रहे साइबर नेटवर्क की भारत में मौजूद कड़ियों तक पहुंचने की उम्मीद है.

पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में भेजने के लिए सुनियोजित नेटवर्क तैयार किया गया था. आरोपियों की भूमिका केवल एक-दूसरे को रकम ट्रांसफर करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि बैंक खातों की व्यवस्था, उनके संचालन और रकम को अलग-अलग स्तर पर भेजने की पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा था. पुलिस अब इस नेटवर्क के आर्थिक लेनदेन और तकनीकी कड़ियों की जांच कर रही है.

राज्य साइबर पुलिस के डीएसपी संजीव नयन शर्मा ने बताया कि सीए से हुई साइबर ठगी के मामले में एक और गिरफ्तारी की गई है. आरोपी के खाते में 10 लाख रुपये की रकम पहुंची थी. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और उसके माध्यम से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा खातों की जानकारी जुटाई जा रही है.

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कंबोडिया में बैठे गिरोह के सदस्यों और भारत में सक्रिय हैंडलरों के बीच किस माध्यम से संपर्क होता था. एपीके फाइल और संदिग्ध मोबाइल एप्लीकेशन के इस्तेमाल से जुड़े तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है. पुलिस को उम्मीद है कि पिंकेश से पूछताछ के बाद साइबर ठगी की रकम के प्रवाह, म्यूल खातों के नेटवर्क और फर्जी कॉल सेंटर से जुड़े लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है.

21 करोड़ रुपये से अधिक की इस साइबर ठगी ने एक बार फिर यह सामने ला दिया है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह भारत में स्थानीय स्तर पर नेटवर्क तैयार कर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों के जरिए घुमाने की कोशिश कर रहे हैं. राज्य साइबर पुलिस की ताजा कार्रवाई से इस नेटवर्क की कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आई हैं. अब जांच का फोकस कंबोडिया में बैठे सरगनाओं तक पहुंचने और भारत में सक्रिय पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-