कोलंबो. भारतीय टेस्ट टीम के प्रदर्शन को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच मुख्य कोच गौतम गंभीर ने आलोचकों को साफ शब्दों में जवाब दिया है. श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर ने टीम की मौजूदा स्थिति को संकट के रूप में देखने से इनकार करते हुए कहा कि भारतीय टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है और उसका लक्ष्य सही दिशा में आगे बढ़ना है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाहरी चर्चाओं, रैंकिंग और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया से ज्यादा उनके लिए भारतीय टीम के साथ ट्रॉफियां जीतना महत्वपूर्ण है.
गंभीर ने आलोचना के सवाल पर कहा कि उनका काम ट्रॉफियां जीतना है, व्यूज और लाइक्स हासिल करना नहीं. उनके इस बयान को टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के हालिया प्रदर्शन को लेकर हो रही बहस के बीच बेहद स्पष्ट जवाब माना जा रहा है. कोच ने कहा कि वह बाहरी शोर पर ध्यान देने के बजाय टीम को आगे ले जाने पर केंद्रित हैं. उनके मुताबिक भारतीय क्रिकेट इस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है और ऐसे दौर में प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है.
भारतीय टीम इस समय विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की तालिका में पांचवें स्थान पर है. इसके बावजूद गंभीर ने रैंकिंग को टीम की वास्तविक स्थिति का पैमाना मानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि रैंकिंग उनके लिए मायने नहीं रखती और भारत टेस्ट क्रिकेट में संघर्ष नहीं कर रहा है. उनका मानना है कि पिछले साल इंग्लैंड दौरे के बाद से भारतीय टीम ने टेस्ट क्रिकेट में अपेक्षाकृत निरंतर प्रदर्शन किया है. गंभीर ने यह भी कहा कि टीम जानती है कि उसे किस दिशा में आगे बढ़ना है और वह सही दिशा में बढ़ रही है.
भारतीय टेस्ट टीम में पिछले कुछ समय में बड़े बदलाव हुए हैं. विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद टीम को नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है. ऐसे में टीम का संतुलन तैयार करना और युवा खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप के दबाव के लिए तैयार करना भारतीय क्रिकेट प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती है. गंभीर इसी प्रक्रिया को टीम के मौजूदा दौर का हिस्सा बता रहे हैं.
गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट क्रिकेट में भारत को कुछ कठिन परिणामों का सामना करना पड़ा है. न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में भारत को हार का सामना करना पड़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भी टीम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी. इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट की सीरीज 2-2 से बराबर रही. इन परिणामों के कारण गंभीर और टीम प्रबंधन की रणनीति पर सवाल उठते रहे हैं.
हालांकि श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने 165 रन से जीत दर्ज कर दो मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल की. इस जीत ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान में भारत को महत्वपूर्ण अंक दिलाए और टीम को दूसरे टेस्ट से पहले आत्मविश्वास भी दिया. अब दोनों टीमों के बीच दूसरा और सीरीज का अंतिम टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में शुरू होना है.
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से भारत के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं है. टीम को अभी न्यूजीलैंड के खिलाफ उसके घर में दो टेस्ट और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत में पांच टेस्ट खेलने हैं. ऐसे में मौजूदा चक्र में मजबूत स्थिति हासिल करने के लिए लगातार जीत दर्ज करना जरूरी होगा. यही कारण है कि टीम के प्रदर्शन को लेकर हर टेस्ट महत्वपूर्ण होता जा रहा है. इसके बावजूद गंभीर तत्काल दबाव की बजाय लंबी अवधि की योजना पर जोर दे रहे हैं.
गंभीर ने टीम में बदलाव को लेकर खिलाड़ियों से धैर्य रखने की जरूरत भी बताई. नए खिलाड़ियों को एक-दो मैच के प्रदर्शन के आधार पर आंकने के बजाय उन्हें पर्याप्त अवसर देने की जरूरत है. गॉल टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल और मानव सुथार जैसे खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन को सकारात्मक संकेत दिए हैं. गंभीर के अनुसार नए खिलाड़ियों का तुरंत योगदान भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा संकेत है, लेकिन उनके बारे में अंतिम राय बनाने से पहले उन्हें पर्याप्त समय देना जरूरी है.
भारतीय टीम के गेंदबाजी संयोजन पर भी गंभीर ने भरोसा जताया. उन्होंने संकेत दिया कि टीम प्रबंधन का लक्ष्य ऐसा गेंदबाजी आक्रमण उतारना है जो मैच में 20 विकेट लेने की क्षमता रखता हो. कुलदीप यादव को लेकर भी उन्होंने धैर्य रखने का संदेश दिया. गॉल टेस्ट में कुलदीप को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी और उन्होंने दोनों पारियों में कुल 25 ओवर गेंदबाजी करते हुए एक विकेट लिया था. इसके बावजूद गंभीर ने उनका समर्थन किया और उन्हें विकेट के लिए जरूरत से ज्यादा बेचैन न होने की सलाह दी.
टीम संयोजन को लेकर गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर के बीच लगातार बातचीत भी चर्चा का विषय रही है. दोनों को टेस्ट मैचों के दौरान कई बार बातचीत करते देखा गया है. जब गंभीर से इस बातचीत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि चर्चाएं भारतीय क्रिकेट को आगे ले जाने, सही फैसले लेने और टीम के भविष्य की दिशा तय करने से संबंधित होती हैं. उन्होंने संकेत दिया कि कोच और चयन समिति के बीच संवाद का उद्देश्य टीम के लिए बेहतर फैसले करना है.
गंभीर के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नई टीम को तैयार करते हुए तत्काल परिणाम भी हासिल किए जाएं. टेस्ट क्रिकेट में बदलाव की प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन विश्व टेस्ट चैंपियनशिप जैसे प्रतियोगिता चक्र में हर हार और जीत का सीधा असर तालिका पर पड़ता है. इसलिए युवा खिलाड़ियों को मौका देने और मजबूत परिणाम हासिल करने के बीच संतुलन बनाना टीम प्रबंधन के लिए अहम होगा.
दूसरे टेस्ट से पहले गंभीर का बयान इसी व्यापक रणनीति की ओर संकेत करता है. वह टीम की मौजूदा स्थिति को असफलता की बजाय संक्रमण और पुनर्निर्माण के दौर के रूप में देख रहे हैं. उनका जोर रैंकिंग या आलोचना से ज्यादा टीम की दिशा और भविष्य पर है. वहीं मैदान पर टीम के प्रदर्शन से ही इस दावे की वास्तविक परीक्षा होगी.
भारत के लिए श्रीलंका के खिलाफ दूसरा टेस्ट केवल सीरीज जीतने का अवसर नहीं है, बल्कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान में अपनी स्थिति मजबूत करने का भी मौका है. पहले टेस्ट में मिली बड़ी जीत के बाद भारतीय टीम के पास सीरीज 2-0 से अपने नाम करने का अवसर है. दूसरी ओर श्रीलंका घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाकर वापसी करना चाहेगा.
गंभीर ने जिस अंदाज में आलोचकों को जवाब दिया है, उससे साफ है कि टीम प्रबंधन फिलहाल बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होना चाहता. उनका संदेश सीधा है—रैंकिंग और चर्चाओं से ज्यादा महत्व मैदान पर मिलने वाली सफलता का है. अब इस सोच को सही साबित करने की जिम्मेदारी भारतीय टीम पर है. दूसरे टेस्ट से शुरू होने वाला मुकाबला बताएगा कि बदलाव के दौर से गुजर रही टीम वास्तव में कितनी मजबूती से आगे बढ़ रही है और गंभीर जिस सही दिशा की बात कर रहे हैं, उसका असर मैदान पर कितना दिखाई देता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

