शिवपुरी गुना को जल्द मिलेगा 34 किलोमीटर का नया बायपास, शहरों के भीतर घटेगा भारी ट्रैफिक का दबाव

शिवपुरी गुना को जल्द मिलेगा 34 किलोमीटर का नया बायपास,  शहरों के भीतर घटेगा भारी ट्रैफिक का दबाव

प्रेषित समय :17:04:46 PM / Sat, Aug 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. ग्वालियर-चंबल अंचल में बढ़ते सड़क यातायात को शहरों के भीतर से बाहर निकालने की दिशा में एक बड़ी सड़क परियोजना आकार लेने जा रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने शिवपुरी और गुना के लिए प्रस्तावित करीब 34 किलोमीटर लंबे ईस्टर्न बायपास की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. परियोजना पूरी होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले ऐसे वाहनों को शहर के भीतरी हिस्सों में प्रवेश करने की जरूरत नहीं होगी, जिन्हें स्थानीय यातायात से कोई लेना-देना नहीं है. इससे दोनों शहरों में जाम और धीमी यातायात व्यवस्था से राहत मिलने की उम्मीद है.

प्रस्तावित बायपास में शिवपुरी हिस्से की लंबाई करीब 13 किलोमीटर और गुना हिस्से की लंबाई लगभग 21 किलोमीटर होगी. दोनों सड़कों को नए मार्ग यानी ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट पर विकसित करने की योजना है और इनका निर्माण चार लेन के रूप में किया जाएगा. खास बात यह है कि फिलहाल इसका अंतिम मार्ग तय नहीं हुआ है. विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने वाली परामर्श एजेंसी अलग-अलग संभावित मार्गों का तकनीकी और आर्थिक अध्ययन करेगी. इसी प्रक्रिया के बाद यह तय होगा कि बायपास को किन क्षेत्रों से निकालना सबसे उपयुक्त रहेगा.

इस परियोजना की जरूरत का एक बड़ा कारण दोनों शहरों में बढ़ता यातायात है. राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरने वाले लंबी दूरी के वाहनों और स्थानीय यातायात के एक ही सड़क पर आने से शहरों के प्रमुख हिस्सों में दबाव बढ़ता है. भारी वाहन जब बाजार, आबादी वाले इलाकों और प्रमुख चौराहों से होकर गुजरते हैं तो न केवल यात्रा का समय बढ़ता है, बल्कि दुर्घटना और यातायात अव्यवस्था का जोखिम भी बढ़ता है. बायपास बनने पर लंबी दूरी के यातायात को वैकल्पिक मार्ग मिलने से शहरों के भीतर वाहनों की संख्या कम होने की संभावना है.

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने केवल सड़क की लंबाई तय करके परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया है. प्रस्तावित मार्ग के चयन से पहले मौजूदा सड़क नेटवर्क, पुलों, जल निकासी व्यवस्था और अन्य संरचनाओं का विस्तृत सर्वे कराया जाएगा. इसके साथ यातायात की वर्तमान स्थिति जानने के लिए ट्रैफिक सर्वे और वाहनों के भार का आकलन करने वाला एक्सल लोड सर्वे भी किया जाएगा. इन आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान लगाया जाएगा कि आने वाले वर्षों में इस मार्ग पर कितने वाहनों का दबाव रहेगा.

परियोजना की योजना में अगले 30 वर्षों की यातायात मांग का आकलन भी शामिल किया गया है. इसका अर्थ है कि सड़क का डिजाइन केवल मौजूदा यातायात को ध्यान में रखकर नहीं किया जाएगा, बल्कि भविष्य में वाहनों की बढ़ती संख्या और क्षेत्र के संभावित विकास को भी ध्यान में रखा जाएगा. इससे सड़क की क्षमता और निर्माण मानकों को लंबे समय के लिए निर्धारित करने में मदद मिलेगी.

बायपास की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में सड़क की सतह, पुल, कलवर्ट, जल निकासी, सर्विस रोड और सड़क सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों का भी अध्ययन किया जाएगा. परियोजना की अनुमानित लागत और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन भी इसी चरण में किया जाएगा. यानी डीपीआर के माध्यम से केवल यह तय नहीं होगा कि सड़क कहां से गुजरेगी, बल्कि उसके निर्माण और संचालन से जुड़े तकनीकी तथा वित्तीय पहलुओं की भी तस्वीर सामने आएगी.

परियोजना का सबसे संवेदनशील पक्ष भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है. संभावित मार्ग तय करते समय एजेंसी को उन जमीनों की पहचान करनी होगी, जिनकी आवश्यकता बायपास निर्माण के लिए पड़ेगी. इसके बाद राजस्व रिकॉर्ड का मिलान, संयुक्त माप और जमीन पर मौजूद मकानों, पेड़ों, फसलों तथा अन्य परिसंपत्तियों का आकलन किया जाएगा. अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज भी तैयार किए जाएंगे. इस प्रक्रिया का उद्देश्य आगे चलकर भूमि अधिग्रहण के कारण परियोजना में अनावश्यक देरी को कम करना है.

किसानों और स्थानीय आबादी को होने वाली परेशानी को लेकर भी परियोजना की योजना में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश हैं. अलाइनमेंट तय करते समय कोशिश की जाएगी कि किसी किसान की जमीन बायपास के कारण दो हिस्सों में इस तरह न बंटे कि उसे खेत के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने के लिए बार-बार मुख्य सड़क पार करनी पड़े. जहां संभव हो, मार्ग को दो राजस्व क्षेत्रों की सीमा के साथ रखने के विकल्प पर भी विचार किया जाएगा.

बायपास का उद्देश्य केवल शहर के बाहर से वाहनों को निकालना नहीं होगा, बल्कि स्थानीय संपर्क भी बनाए रखना होगा. इसलिए मार्ग तय करते समय स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की पहुंच प्रभावित न हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा. ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क का निर्माण यदि स्थानीय संपर्क मार्गों को काट देता है तो लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ सकता है. डीपीआर में इस पहलू का अध्ययन भी किया जाना है.

पर्यावरणीय दृष्टि से भी संभावित मार्गों की तुलना की जाएगी. जंगल और वन्यजीव क्षेत्रों से बायपास को यथासंभव दूर रखने का प्रयास किया जाएगा. इससे परियोजना के कारण होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के साथ भविष्य में मंजूरियों से जुड़ी संभावित अड़चनों को भी सीमित किया जा सकेगा.

परामर्श एजेंसी को सर्वे और डीपीआर से जुड़े काम को सात महीने के भीतर पूरा करना होगा. इसके बाद सामने आने वाली रिपोर्ट के आधार पर परियोजना के अगले चरण की दिशा तय होगी. अभी निर्माण शुरू होने की स्थिति नहीं है और न ही अंतिम अलाइनमेंट तय किया गया है. इसलिए परियोजना की वास्तविक लागत, निर्माण की शुरुआत और पूरा होने की समयसीमा आगे की स्वीकृतियों तथा डीपीआर के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी.

शिवपुरी और गुना के लिए प्रस्तावित यह बायपास ग्वालियर में विकसित किए जा रहे पश्चिमी बायपास की व्यापक यातायात योजना से भी जुड़ा हुआ है. इसका उद्देश्य अंचल के प्रमुख शहरों से गुजरने वाले यातायात को शहरों के भीतर से हटाकर बाहरी मार्गों पर ले जाना है. यदि प्रस्तावित दोनों बायपास निर्धारित योजना के अनुसार विकसित होते हैं तो लंबी दूरी के यातायात के लिए शहरों में प्रवेश की आवश्यकता कम होगी और स्थानीय सड़कों पर दबाव घट सकता है.

परियोजना का असर केवल जाम कम करने तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है. शहरों के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही घटने से यात्रा समय में कमी, सड़क सुरक्षा में सुधार और स्थानीय यातायात के अधिक सुचारु होने की संभावना है. वहीं गुना से आगे जाने वाले वाहनों को भी शहरों के भीतर की भीड़ से बचते हुए अपेक्षाकृत निर्बाध मार्ग मिल सकता है.

फिलहाल पूरा ध्यान डीपीआर के लिए होने वाले सर्वे पर है. अलग-अलग मार्गों के तकनीकी, आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहलुओं की तुलना के बाद जिस अलाइनमेंट को सबसे व्यवहारिक पाया जाएगा, उसी के आधार पर परियोजना का स्वरूप आगे तय होगा. सात महीने में प्रस्तावित सर्वे पूरा होने के बाद शिवपुरी और गुना के ईस्टर्न बायपास की दिशा और जमीन पर उतरने वाली योजना की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-