जबलपुर. आधारताल क्षेत्र के ग्राम चांटी में करीब आठ एकड़ कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लाटिंग का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. शिकायत खसरा नंबर 122 और 123 से जुड़ी जमीन को लेकर की गई है. आरोप है कि कुछ लोग गरीब किसानों को बहला-फुसलाकर उनकी जमीन कम कीमत पर हासिल कर रहे हैं और बाद में बिना वैधानिक अनुमति के जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर अधिक कीमत पर बेच रहे हैं. शिकायत सामने आने के बाद आधारताल अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त तहसीलदार को जांच के निर्देश दिए हैं.
यह शिकायत अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद राष्ट्रीय बजरंग दल के प्रांत मंत्री अर्पित सिंह ठाकुर की ओर से एसडीएम को लिखित रूप में दी गई है. शिकायत में जमीन की खरीद-फरोख्त और कथित अवैध प्लाटिंग की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है. शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की स्थिति का फायदा उठाकर उनकी जमीन कम कीमत में लेने का प्रयास किया जा रहा है. इसके बाद उसी भूमि को बिना आवश्यक अनुमति के आवासीय प्लाट के रूप में विकसित कर बेचने की बात कही गई है.
मामले में प्रशासन ने अतिरिक्त तहसीलदार को एक सप्ताह की समय-सीमा में निष्पक्ष जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. जांच के दौरान राजस्व रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा रहा है. राजस्व अमले ने मौके पर पहुंचकर जमीन के सीमांकन तथा वहां किए जा रहे कथित विकास कार्यों की स्थिति देखना शुरू कर दिया है. इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जमीन का वास्तविक स्वरूप क्या है और मौके पर किस तरह का निर्माण या विकास किया गया है.
जांच में प्लाटिंग के लिए तैयार किए गए ले-आउट और सड़क निर्माण की स्थिति भी देखी जा रही है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग और पंचायत से आवश्यक अनुमति लिए बिना सड़कें और बाउंड्रीवाल बनाई जा रही हैं. प्रशासनिक अमला मौके पर इन दावों का भौतिक सत्यापन कर रहा है. जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि संबंधित भूमि के संबंध में किसी विभाग से अनुमति या स्वीकृति प्राप्त की गई थी या नहीं.
कृषि भूमि के उपयोग में बदलाव से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं. प्रशासन पुराने विक्रय पत्रों और राजस्व अभिलेखों का मिलान कर यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि जमीन का हस्तांतरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ. साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि कृषि भूमि को आवासीय उपयोग के लिए परिवर्तित करने संबंधी कोई वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई थी या नहीं.
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि दस्तावेजों में हेराफेरी, अवैध विकास या अन्य अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. शिकायत में आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की गई है. प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह तय होगा कि मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की स्थिति बनती है या नहीं.
मामले ने क्षेत्र में जमीन की खरीद-फरोख्त और अनधिकृत प्लाटिंग को लेकर सवाल खड़े किए हैं. ग्रामीण क्षेत्र में कृषि भूमि को छोटे भूखंडों में बांटकर बेचने से पहले संबंधित नियमों और अनुमतियों का पालन आवश्यक होता है. ऐसे मामलों में दस्तावेजों की सही जांच नहीं होने पर जमीन खरीदने वाले लोगों को भी बाद में कानूनी और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
फिलहाल प्रशासन की जांच जारी है और एक सप्ताह के भीतर अतिरिक्त तहसीलदार से रिपोर्ट मांगी गई है. रिपोर्ट में जमीन के स्वामित्व, सीमांकन, कथित प्लाटिंग, निर्माण और आवश्यक अनुमतियों से संबंधित तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है. जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

