मुंबई में मैकडॉनल्ड्स पर एफडीए की कार्रवाई से मचा हड़कंप, कंपनी ने कहा खाद्य सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस

मुंबई में मैकडॉनल्ड्स पर एफडीए की कार्रवाई से मचा हड़कंप, कंपनी ने कहा खाद्य सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस

प्रेषित समय :22:17:13 PM / Sat, Aug 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. मुंबई के कोलाबा स्थित मैकडॉनल्ड्स आउटलेट के खाद्य कारोबार लाइसेंस को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा निलंबित किए जाने के बाद कंपनी ने शनिवार को अपनी प्रतिक्रिया जारी की. कंपनी ने कहा कि वह खाद्य सुरक्षा के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में उसकी नीति किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं करने की है. महाराष्ट्र एफडीए की कार्रवाई के बाद मैकडॉनल्ड्स इंडिया ने नियामकीय प्रक्रिया का सम्मान करने और निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों की समीक्षा करने की बात कही है.

कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मैकडॉनल्ड्स खाद्य गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े मानकों का पालन करता है. कंपनी ने यह भी कहा कि वह खाद्य सुरक्षा के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाती है. एफडीए की ओर से की गई कार्रवाई और निरीक्षण में सामने आई टिप्पणियों को लेकर कंपनी ने कहा कि वह नियामकीय प्रक्रिया का सम्मान करती है और रिपोर्ट में उल्लिखित बिंदुओं की समीक्षा कर रही है.

यह कार्रवाई एफडीए के निरीक्षण के बाद सामने आई, जिसमें कोलाबा स्थित आउटलेट में कथित तौर पर खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां पाई गईं. निरीक्षण के दौरान परिसर में कीटों की मौजूदगी, कॉकरोच, खाद्य सामग्री के तापमान को उचित स्तर पर बनाए रखने में कमी, सड़ा हुआ खाद्य कचरा और कर्मचारियों की स्वच्छता से जुड़ी कमियां मिलने की बात सामने आई है. इन टिप्पणियों के बाद खाद्य कारोबार लाइसेंस को निलंबित किया गया.

एफडीए की जांच में कथित तौर पर रसोई और खाद्य भंडारण तथा तैयारी वाले हिस्सों के आसपास भी गंदगी से जुड़ी स्थिति सामने आई. अधिकारियों को वहां कॉकरोच मिलने के साथ ही रसोई के फर्श पर खाद्य सामग्री के भंडारण और तैयारी वाले क्षेत्र के पास सड़ा हुआ खाद्य कचरा मिलने की जानकारी दी गई है. निरीक्षण में तापमान नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठे. खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित तापमान बनाए रखना खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, ऐसे में इस तरह की कमी को एफडीए ने गंभीरता से लिया.

मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू मैकडॉनल्ड्स आउटलेट की ओर से पहले जमा कराई गई अनुपालन रिपोर्ट से जुड़ा है. एफडीए के एक अधिकारी के अनुसार, आउटलेट ने 12 अगस्त को 148 पृष्ठों की अनुपालन रिपोर्ट जमा कर यह दावा किया था कि पहले बताई गई कमियों को दूर कर दिया गया है. हालांकि, इसके बाद हुए निरीक्षण में कथित तौर पर पाया गया कि अधिकांश कमियां अभी भी बनी हुई थीं. इसी वजह से नियामकीय कार्रवाई का दायरा बढ़ गया.

एफडीए के अनुसार, लाइसेंसिंग प्राधिकरण को गलत जानकारी देना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 61 के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है. ऐसे में इस मामले में केवल रसोई की स्वच्छता या खाद्य पदार्थों की स्थिति ही जांच का विषय नहीं है, बल्कि अनुपालन रिपोर्ट में किए गए दावों की वास्तविकता भी महत्वपूर्ण हो गई है. हालांकि उपलब्ध जानकारी में इस संबंध में आगे की दंडात्मक कार्रवाई का अंतिम विवरण सामने नहीं आया है.

मैकडॉनल्ड्स इंडिया ने अपने जवाब में यह भी कहा कि कंपनी खाद्य गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े अपने मानकों को लेकर गंभीर है. कंपनी ने अपने बयान में वास्तविक चीज और वास्तविक पनीर के इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उसकी खाद्य प्रक्रियाओं और रसोई व्यवस्था को सही तरीके से समझना जरूरी है. कंपनी ने ग्राहकों को अपनी रसोई का दौरा करने की सुविधा का भी उल्लेख किया और कहा कि ग्राहक वहां जाकर खाद्य तैयार करने की प्रक्रिया को समझ सकते हैं.

कंपनी की यह प्रतिक्रिया एफडीए की कार्रवाई के एक दिन बाद सामने आई है. इससे पहले नियामक की कार्रवाई के कारण कोलाबा आउटलेट की गतिविधियां प्रभावित हुईं. खाद्य कारोबार लाइसेंस का निलंबन किसी खाद्य प्रतिष्ठान के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई होती है, क्योंकि इसका सीधा संबंध वहां खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री से होता है. ऐसे में कंपनी की ओर से अब निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा करने की बात कही गई है.

यह पूरा मामला महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर चल रहे व्यापक निरीक्षण अभियान के बीच सामने आया है. राज्य में खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच तेज किए जाने के दौरान कई जगहों पर खाद्य गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा मानकों के पालन की पड़ताल की जा रही है. एफडीए द्वारा नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. कोलाबा स्थित मैकडॉनल्ड्स आउटलेट पर हुई कार्रवाई को भी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा बताया गया है.

इसी अभियान के दौरान मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित सुविधा के खाद्य कारोबार लाइसेंस को भी एफडीए ने हाल ही में निलंबित किया था. वहां भी खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े कथित उल्लंघनों के आधार पर कार्रवाई की गई थी. इस कार्रवाई के बाद एमसीए क्लब ने अपने सदस्यों को जानकारी दी थी कि परिसर में सभी खाद्य एवं पेय सेवाएं और रेस्तरां तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक बंद रहेंगे. हालांकि खेल सुविधाओं को चालू रखने की बात कही गई थी.

एक ही अवधि में बड़े और चर्चित प्रतिष्ठानों पर हुई इन कार्रवाइयों से यह संकेत मिलता है कि एफडीए खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों में स्वच्छता और सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त रुख अपना रहा है. नियामक की कार्रवाई का उद्देश्य केवल किसी एक प्रतिष्ठान पर नियंत्रण करना नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों की सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन को सुनिश्चित करना है.

कोलाबा आउटलेट के मामले में कीटों की कथित मौजूदगी और सड़े खाद्य कचरे का पाया जाना विशेष रूप से गंभीर माना जा रहा है. खाद्य पदार्थों के संपर्क में आने वाले क्षेत्रों में स्वच्छता की कमी से उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं. इसी तरह तापमान नियंत्रण में कमी भी खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षित उपयोग से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू है. एफडीए निरीक्षण में सामने आई इन कमियों के आधार पर लाइसेंस निलंबन किया गया है.

कंपनी ने हालांकि अपने बयान में अपने व्यापक खाद्य सुरक्षा मानकों पर भरोसा जताया है. उसका कहना है कि वह कठोर गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वच्छता प्रक्रियाओं का पालन करती है. साथ ही उसने नियामकीय निरीक्षण में सामने आए बिंदुओं की समीक्षा करने की बात कही है. इससे आगे की प्रक्रिया में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत अनुपालन और सुधार संबंधी दावों का एफडीए के निरीक्षण के आधार पर क्या निष्कर्ष निकलता है.

इस कार्रवाई ने एक बार फिर बड़े खाद्य प्रतिष्ठानों में नियमित निगरानी और वास्तविक स्तर पर नियमों के पालन के महत्व को सामने ला दिया है. किसी प्रतिष्ठान के पास खाद्य सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानक और प्रक्रियाएं होना अलग बात है, जबकि उनका जमीन पर लगातार पालन होना अलग. एफडीए की हालिया कार्रवाई इसी अंतर की जांच पर केंद्रित दिखाई देती है.

फिलहाल मैकडॉनल्ड्स इंडिया ने एफडीए के निष्कर्षों पर अंतिम टिप्पणी करने के बजाय निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों की समीक्षा करने का रुख अपनाया है. कंपनी ने खाद्य सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए जीरो टॉलरेंस की नीति का उल्लेख किया है. दूसरी ओर, नियामक की जांच में सामने आई कथित कमियों और पहले जमा कराई गई अनुपालन रिपोर्ट के बीच अंतर की बात इस मामले को गंभीर बना रही है.

अब आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि निरीक्षण में दर्ज कमियों को लेकर कंपनी क्या सुधारात्मक कदम उठाती है और एफडीए उन उपायों को किस तरह देखता है. फिलहाल कोलाबा का यह मामला मुंबई में खाद्य सुरक्षा निगरानी के बढ़ते दायरे और प्रतिष्ठित खाद्य प्रतिष्ठानों के लिए भी नियमों के सख्त अनुपालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-