अरब जगत में चर्चित रही फिल्म ‘7 डॉग्स’ अब भारतीय सिनेमाघरों में पहुंच गई है. फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी भव्य एक्शन प्रस्तुति, तेज रफ्तार कहानी और शानदार कैमरा वर्क है. भारतीय दर्शकों के लिए फिल्म का आकर्षण इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें सलमान खान और संजय दत्त की मौजूदगी का खासा प्रचार किया गया है. हालांकि, फिल्म देखने के बाद इन दोनों सितारों के प्रशंसकों को शायद सबसे ज्यादा निराशा इसी बात से होगी कि दोनों की मौजूदगी बेहद सीमित है.
कहानी इंटरपोल अधिकारी खालिद के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक खतरनाक आपराधिक संगठन ‘7 डॉग्स’ का पता लगाने और ‘पिंक लेडी’ नामक मादक पदार्थ की खेप को मध्य-पूर्व तक पहुंचने से रोकने की जिम्मेदारी मिलती है. इस मिशन में खालिद को संगठन के पूर्व सदस्य घाली की मदद लेनी पड़ती है. इसके बाद कहानी अपराध, पीछा, धोखे और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आपराधिक नेटवर्क के बीच आगे बढ़ती है.
फिल्म की शुरुआत ही एक बड़े एक्शन दृश्य से होती है और यहीं निर्देशक दर्शकों को संकेत दे देते हैं कि आगे का सफर सामान्य जासूसी कहानी जैसा नहीं होने वाला. शुरुआती दृश्य उम्मीदें बढ़ाता है और इसके बाद फिल्म कभी रहस्य, कभी पीछा करने वाले दृश्यों और कभी बड़े एक्शन सेट पीस के सहारे अपनी गति बनाए रखती है. फिल्म में कई ऐसे दृश्य हैं जिन्हें बड़े पर्दे पर देखने का अनुभव छोटे पर्दे की तुलना में कहीं ज्यादा प्रभावी लगता है.
निर्देशन की सबसे बड़ी उपलब्धि फिल्म का दृश्य संसार है. निर्देशक आदिल एल अर्बी और बिलाल फलाह ने कहानी को इस तरह प्रस्तुत किया है कि यह मूल रूप से अरबी फिल्म होने के बावजूद प्रस्तुति में अंतरराष्ट्रीय एक्शन फिल्म जैसा प्रभाव पैदा करती है. कई दृश्यों में कैमरे की गति, स्थानों का चयन और एक्शन का संयोजन फिल्म को हॉलीवुड शैली का रंग देते हैं.
छायांकन फिल्म की मजबूत कड़ी है. रोब्रेख्त हेयवर्ट का कैमरा काम विशेष रूप से प्रभावित करता है. बड़े एक्शन दृश्यों को अलग-अलग कोणों से शूट करने के कारण उनमें ऊर्जा बनी रहती है. कारों का पीछा, गोलीबारी और आमने-सामने की कार्रवाई को केवल शोर और गति तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें दृश्य रूप से प्रभावशाली बनाने की कोशिश की गई है.
कहानी और पटकथा को पूरी तरह असाधारण नहीं कहा जा सकता. कुछ हिस्सों में फिल्म का रहस्य वाला पक्ष एक्शन की तुलना में कमजोर महसूस होता है. फिर भी फिल्म दर्शकों को बहुत देर तक ठहरने नहीं देती. एक्शन के बड़े दृश्यों को कहानी के बीच में इस तरह रखा गया है कि गति टूटने के बजाय फिर से तेज हो जाती है. यही वजह है कि मनोरंजन की तलाश में सिनेमाघर पहुंचे दर्शकों के लिए फिल्म काम कर सकती है.
अभिनय की बात करें तो अहमद एज़ ने खालिद की भूमिका में अच्छा प्रभाव छोड़ा है. उनका व्यक्तित्व और स्क्रीन प्रेजेंस उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय जासूस वाले किरदार के लिए उपयुक्त बनाता है. एक्शन दृश्यों में उनका आत्मविश्वास और कैमरे के सामने उनकी मौजूदगी फिल्म की प्रमुख खूबियों में शामिल है. करीम अब्देल अजीज भी घाली के किरदार में प्रभावी हैं और कहानी को आगे बढ़ाने में उनका प्रदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
मोनिका बेलुची की मौजूदगी फिल्म के आकर्षण को और बढ़ाती है. उन्हें कुछ अच्छे दृश्य मिले हैं और उन्होंने अपने किरदार को प्रभावी ढंग से निभाया है. उनकी स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप के अनुरूप नजर आती है.
लेकिन भारतीय दर्शकों की निगाहें स्वाभाविक रूप से सलमान खान और संजय दत्त पर टिकी रहेंगी. दोनों कलाकार फिल्म में विशेष भूमिकाओं में दिखाई देते हैं, मगर उनका स्क्रीन टाइम करीब पांच से सात मिनट के आसपास ही बताया गया है. इससे भी बड़ी बात यह है कि दोनों को वह एक्शन स्पेस नहीं मिलता जिसकी उम्मीद उनके प्रशंसक फिल्म के प्रचार और उनके नाम से कर सकते हैं.
खास तौर पर सलमान खान के प्रशंसकों को उनकी भूमिका देखकर निराशा हो सकती है. फिल्म में उनका एक यादगार अंदाज जरूर देखने को मिलता है, लेकिन जिस स्तर के एक्शन की उम्मीद सलमान की मौजूदगी वाली फिल्म से की जाती है, वह यहां दिखाई नहीं देता. इसी तरह संजय दत्त का किरदार भी कहानी में उस विस्तार के साथ सामने नहीं आता जिसकी उम्मीद दर्शक कर सकते हैं.
फिल्म का संगीत भी उसके माहौल को मजबूत करता है. लोर्ने बाल्फ के बैकग्राउंड स्कोर में बड़े एक्शन दृश्यों के अनुरूप ऊर्जा है और कई मौकों पर संगीत पर्दे पर चल रही कार्रवाई के प्रभाव को बढ़ाता है.
कुल मिलाकर, ‘7 डॉग्स’ एक मनोरंजक अंतरराष्ट्रीय एक्शन-थ्रिलर है, जिसे बड़े पर्दे पर देखना ज्यादा बेहतर अनुभव हो सकता है. फिल्म की कहानी बहुत नई नहीं है, लेकिन निर्देशन, छायांकन, एक्शन और प्रमुख कलाकारों का प्रदर्शन इसे देखने लायक बनाता है. हालांकि, अगर कोई दर्शक खास तौर पर सलमान खान और संजय दत्त की वजह से टिकट खरीदने जा रहा है, तो उसे अपनी उम्मीदें थोड़ी कम रखनी चाहिए. फिल्म की असली ताकत ये दोनों सितारे नहीं, बल्कि उसका मुख्य एक्शन संसार और अरबी कलाकारों का प्रदर्शन है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

