ह्यूस्टन में आईआईटी खड़गपुर का एआई केंद्र शुरू, भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग को मिलेगी नई दिशा

ह्यूस्टन में आईआईटी खड़गपुर का एआई केंद्र शुरू, भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग को मिलेगी नई दिशा

प्रेषित समय :22:01:57 PM / Sun, Aug 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ह्यूस्टन. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की शैक्षणिक और तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच से जोड़ने की दिशा में आईआईटी खड़गपुर ने एक महत्वपूर्ण पहल की है. अमेरिका के ह्यूस्टन स्थित टैगोर सेंटर में टेक्सास एआई लर्निंग सेंटर की शुरुआत की गई है. केंद्र का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी शिक्षा, कौशल विकास और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तकनीकी समाधान तैयार करने के लिए भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को मजबूत करना है.

आईआईटी खड़गपुर आउटरीच नेटवर्क के सहयोग से स्थापित इस केंद्र का उद्घाटन भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस और आईआईटी खड़गपुर की स्थापना के 75वें वर्ष के अवसर पर किया गया. उद्घाटन समारोह में ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्यदूत डीसी मनोज कुमार, टैगोर सेंटर फाउंडेशन के सह-संस्थापक तथा आईआईटी खड़गपुर फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. अशोक डेयसरकर और आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे.

नए केंद्र को केवल एआई प्रशिक्षण का संस्थान बनाने के बजाय वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीकी शिक्षा और उद्योग के बीच सेतु के रूप में विकसित करने की योजना है. आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रोफेसर सुमन चक्रवर्ती ने केंद्र के भविष्य को व्यापक स्वरूप देने की बात कही. उनके अनुसार, आने वाले समय में इसे पैन-आईआईटी मंच के रूप में विकसित किया जा सकता है, जहां दुनिया भर में काम कर रहे आईआईटी के पूर्व छात्र, उद्योग विशेषज्ञ और अन्य वैश्विक भागीदार एक साथ आकर पेशेवर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ जटिल औद्योगिक समस्याओं के समाधान पर काम कर सकेंगे.

भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग के बढ़ते दायरे को देखते हुए इस पहल को खास महत्व दिया जा रहा है. ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्यदूत डीसी मनोज कुमार ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग लगातार नए अवसर पैदा कर रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस साझेदारी को संस्थागत स्तर पर और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

केंद्र की स्थापना के पीछे करीब एक वर्ष से तैयारियां चल रही थीं. आयोजकों के अनुसार, आने वाले समय में इसे पूर्ण विकसित विदेशी आईआईटी आउटरीच केंद्र का रूप देने की दिशा में काम किया जाएगा. इसका दायरा केवल विद्यार्थियों तक सीमित रखने के बजाय तकनीकी पेशेवरों, उद्योगों, शोधकर्ताओं और वैश्विक स्तर पर मौजूद भारतीय समुदाय तक बढ़ाने की योजना है.

केंद्र ने औपचारिक रूप से कामकाज की शुरुआत दो दिवसीय एआई प्रमाणपत्र प्रशिक्षण कार्यक्रम से की. इस प्रशिक्षण शिविर का समन्वय टेक्सास एएंडएम विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. देब्यज्योति बनर्जी ने किया. कार्यक्रम के जरिए प्रतिभागियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े व्यावहारिक और उद्योग उपयोगी कौशल से परिचित कराया गया.

उद्घाटन समारोह में आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्रों के अलावा तकनीकी क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों, भारतीय मूल के उद्योग प्रतिनिधियों और प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्यों ने भाग लिया. हैरिस काउंटी कमिश्नर लेस्ली ब्रियोन्स के कार्यालय के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे. इससे संकेत मिलता है कि केंद्र को शैक्षणिक गतिविधियों के साथ स्थानीय उद्योग और प्रशासनिक तंत्र से जोड़ने की भी कोशिश की जा रही है.

अमेरिका में भारतीय तकनीकी संस्थानों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिहाज से भी यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है. आईआईटी खड़गपुर की अकादमिक विशेषज्ञता, भारतीय तकनीकी प्रतिभा और अमेरिका के तकनीकी एवं औद्योगिक परिवेश को एक मंच पर लाने से प्रशिक्षण और शोध के नए अवसर पैदा हो सकते हैं. खासकर एआई जैसे तेजी से बदलते क्षेत्र में उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने और वास्तविक समस्याओं पर आधारित समाधान विकसित करने में ऐसे केंद्र उपयोगी साबित हो सकते हैं.

अमेरिका में आईआईटी के पूर्व छात्रों का बड़ा नेटवर्क भी इस पहल की ताकत बन सकता है. आईआईटी खड़गपुर फाउंडेशन से जुड़े उद्योग जगत के लोगों ने केंद्र के विस्तार में सहयोग का भरोसा जताया है. ऐसे में आने वाले वर्षों में यह केंद्र केवल प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चलाने तक सीमित रहेगा या वास्तव में भारत-अमेरिका के बीच एआई अनुसंधान, कौशल और उद्योग सहयोग का बड़ा मंच बनेगा, इस पर नजर रहेगी. फिलहाल दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ शुरू हुई यह पहल आईआईटी खड़गपुर की वैश्विक शैक्षणिक पहुंच को एआई के उभरते क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-