सीमा बंद होने के बावजूद नहीं टूटा रिश्तों का सिलसिला, 150 पाकिस्तानी दुल्हनों ने भारत आकर रचाई शादी

सीमा बंद होने के बावजूद नहीं टूटा रिश्तों का सिलसिला, 150 पाकिस्तानी दुल्हनों ने भारत आकर रचाई शादी

प्रेषित समय :21:42:53 PM / Sun, Aug 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नागपुर. भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों और आवाजाही पर लगी पाबंदियों के बीच कुछ ऐसी कहानियां भी सामने आई हैं, जिनमें राजनीतिक सीमाओं से कहीं अधिक मजबूत पारिवारिक रिश्ते दिखाई देते हैं. दोनों देशों के बीच जमीनी रास्ते बंद होने के बावजूद करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें विशेष अनुमति लेकर अलग-अलग रास्तों से भारत पहुंचीं और अपने भारतीय जीवनसाथियों के साथ विवाह के बंधन में बंधीं. इन शादियों की खास बात यह रही कि सीमा पार करने का सामान्य रास्ता बंद होने के बाद भी परिवारों ने रिश्तों को टूटने नहीं दिया. कई दुल्हनों को भारत पहुंचने के लिए तीसरे देशों के रास्ते लंबी हवाई यात्रा करनी पड़ी, जबकि उनके परिजनों को भी सीमित समय के लिए भारत आने की अनुमति मिली.

भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा पार आवाजाही लंबे समय से दोनों देशों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों से प्रभावित रही है. ऐसे माहौल में जब सामान्य यात्राओं पर रोक या कड़े प्रतिबंध हों, तब विवाह जैसे निजी और पारिवारिक आयोजनों के लिए यात्रा करना अपने आप में चुनौती बन जाता है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गृह मंत्रालय की विशेष अनुमति के बाद अप्रैल से जून के बीच बड़ी संख्या में पाकिस्तानी नागरिक विवाह संबंधी कार्यक्रमों के लिए भारत पहुंचे. इनमें लगभग 150 दुल्हनों के साथ करीब 450 रिश्तेदारों के भारत आने की बात सामने आई है.

इन लोगों को सामान्य वाघा-अटारी मार्ग से भारत आने का विकल्प नहीं मिला. इसके बजाय कई परिवारों ने मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर जैसे रास्तों का सहारा लिया. लंबी यात्रा, अतिरिक्त खर्च, वीजा संबंधी औपचारिकताएं और सीमित समय के बावजूद विवाह की रस्में पूरी की गईं. कई मामलों में समारोह को जानबूझकर छोटा रखा गया, क्योंकि पाकिस्तान से आए रिश्तेदारों को निर्धारित अवधि के भीतर वापस लौटना था.

नागपुर सहित जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे शहरों में ऐसे विवाह होने की जानकारी सामने आई है. इन शादियों में पारंपरिक उत्सव का विस्तार सीमित रहा, लेकिन परिवारों के लिए यह अवसर भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रहा. सामान्य परिस्थितियों में जहां दूल्हा-दुल्हन के परिवार कई दिनों तक साथ रहकर शादी की तैयारियां करते हैं, वहीं सीमा और यात्रा प्रतिबंधों के कारण कई परिवारों को बेहद कम समय में सारी रस्में पूरी करनी पड़ीं.

ऐसी ही एक कहानी उन परिवारों की है, जिनकी शादी की योजना सीमा संबंधी परिस्थितियों के कारण लंबे समय तक टलती रही. भारत में लंबे समय के वीजा पर रह रहे एक युवक की सगाई पाकिस्तान की युवती से हुई थी. दोनों परिवारों ने विवाह की तैयारी की, लेकिन सीमा पर आवाजाही बंद होने के कारण दुल्हन भारत नहीं पहुंच सकी. एक समय वह भारत-पाकिस्तान सीमा के करीब तक पहुंच गई थी, लेकिन परिस्थितियां बदलने के बाद उसे वापस लौटना पड़ा. इसके बाद विवाह की तारीख और यात्रा की योजना बार-बार प्रभावित होती रही.

कई महीनों के इंतजार के बाद जब विशेष अनुमति और वैकल्पिक हवाई मार्ग का रास्ता खुला तो दुल्हन मस्कट होते हुए नागपुर पहुंची और विवाह की रस्म पूरी हुई. हालांकि इस यात्रा में भी पूरा परिवार उसके साथ नहीं आ सका. वीजा और यात्रा संबंधी सीमाओं के कारण केवल उसके भाई को भारत आने की अनुमति मिली, जबकि माता-पिता पाकिस्तान में ही रह गए. विवाह का अवसर खुशी का था, लेकिन परिवार के कई सदस्य इसमें शामिल नहीं हो सके, इसका भावनात्मक असर भी रहा.

एक अन्य मामले में पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र से एक दूल्हा अपने माता-पिता के साथ भारत पहुंचा. उसे नागपुर में अपनी होने वाली पत्नी से विवाह करना था. सीमा और यात्रा संबंधी परिस्थितियों के बीच परिवार ने भारत पहुंचकर विवाह की रस्म पूरी की. इस मामले में खास बात यह रही कि विवाह के बाद दूल्हे ने भारत में ही रहने की इच्छा जताई. उसका कहना था कि परिस्थितियां सामान्य होने पर वह अपने माता-पिता को भी भारत बुलाना चाहता है.

इन घटनाओं ने भारत-पाकिस्तान संबंधों के उस मानवीय पक्ष को सामने रखा है, जो अक्सर राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी खबरों के बीच दब जाता है. दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव का सीधा असर उन परिवारों पर भी पड़ता है, जिनके रिश्ते सीमा के दोनों ओर बने हुए हैं. विवाह जैसे संबंध केवल दो व्यक्तियों को ही नहीं जोड़ते, बल्कि दो परिवारों को भी एक-दूसरे से जोड़ते हैं. ऐसे में सीमा बंद होने का असर केवल यात्रियों पर नहीं, बल्कि उन परिवारों पर भी पड़ता है जिनके जीवन के महत्वपूर्ण अवसर इससे जुड़े होते हैं.

हालांकि इन विवाहों को किसी राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में नहीं देखा जा सकता, लेकिन इनसे यह जरूर पता चलता है कि दोनों देशों के बीच सामान्य आवाजाही बाधित होने के बावजूद पारिवारिक रिश्तों को निभाने के लिए लोग वैकल्पिक रास्ते तलाश रहे हैं. हवाई मार्ग से तीसरे देश के रास्ते यात्रा करना आसान नहीं था. इसमें समय और धन दोनों अधिक लगे, साथ ही वीजा तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ा. इसके बावजूद परिवारों ने कोशिश जारी रखी.

इन शादियों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि पाकिस्तानी रिश्तेदारों की भारत में मौजूदगी को लेकर समय सीमा निर्धारित थी. ऐसे में विवाह समारोहों को सीमित दायरे में आयोजित करना पड़ा. सामान्य भारतीय शादियों में जहां कई दिनों तक कार्यक्रम चलते हैं, रिश्तेदार दूर-दूर से आते हैं और पूरा परिवार उत्सव में शामिल होता है, वहीं इन परिवारों के सामने परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं. उन्हें यात्रा, अनुमति और वापसी की समय सीमा को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तय करने पड़े.

भारत आने वाली पाकिस्तानी दुल्हनों और उनके परिवारों के लिए यह यात्रा सिर्फ एक देश से दूसरे देश पहुंचने की प्रक्रिया नहीं थी. यह उन रिश्तों को पूरा करने की कोशिश भी थी, जो सीमा विवाद और बदलते राजनीतिक हालात के कारण लगातार कठिन होते जा रहे थे. कई परिवारों के लिए विवाह की तारीख तय होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि दुल्हन या दूल्हा भारत तक पहुंचेगा कैसे. विशेष अनुमति मिलने के बाद इसका रास्ता निकला, लेकिन सामान्य सीमा मार्ग के बजाय लंबा और घुमावदार हवाई सफर करना पड़ा.

इन घटनाओं के बीच उन परिवारों की चिंता भी सामने आती है, जो अभी भी अपने रिश्तेदारों से मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. विवाह के बाद भी कई दुल्हनों के माता-पिता और करीबी रिश्तेदार पाकिस्तान में रह गए. ऐसे परिवारों के लिए शादी का उत्सव पूरा होने के बावजूद अपनों से दोबारा मिलना आसान नहीं है. यही वजह है कि कुछ नवविवाहितों ने भविष्य में दोनों देशों के बीच आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद जताई है.

भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों का राजनीतिक भविष्य अलग विषय है, लेकिन इन विवाहों ने यह जरूर दिखाया है कि आम लोगों के पारिवारिक संबंध कई बार राजनीतिक परिस्थितियों से अलग अपनी राह तलाश लेते हैं. सीमा पर बंद दरवाजों के बीच तीसरे देशों के रास्ते भारत पहुंची दुल्हनों की ये कहानियां इस बात का उदाहरण हैं कि रिश्तों को निभाने की इच्छा मुश्किल परिस्थितियों में भी रास्ता खोज लेती है. उनके लिए यह सिर्फ विवाह का आयोजन नहीं था, बल्कि लंबे इंतजार के बाद उस रिश्ते को सामाजिक और पारिवारिक रूप से पूरा करने का अवसर था, जिसे दूरी और प्रतिबंध लंबे समय से रोक रहे थे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-