नई दिल्ली. श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में दूसरा टेस्ट ड्रॉ होने के साथ ही भारत की विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने की राह बेहद कठिन हो गई है. कप्तान शुभमन गिल की अगुआई वाली भारतीय टीम को अब बचे हुए सात टेस्ट मैचों में कम से कम छह मुकाबले जीतने की जरूरत होगी, तभी वह फाइनल की दौड़ में मजबूत दावेदारी बनाए रख सकेगी. समस्या यह है कि इन सात मैचों में पांच मुकाबले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ और दो मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ होने हैं. दोनों ही टीमें भारत के लिए आसान प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं. ऐसे में कोलंबो में जीत का मौका हाथ से निकलना भारत के लिए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में ही नहीं, बल्कि फाइनल की राह में भी बड़ा झटका माना जा रहा है.
भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेला गया दूसरा टेस्ट बराबरी पर समाप्त हुआ. भारत इस मुकाबले में जीत हासिल कर सकता था, लेकिन श्रीलंका के 25 वर्षीय बल्लेबाज सोनल दिनुषा ने दोनों पारियों में शतक लगाकर भारतीय टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. उनकी शानदार बल्लेबाजी के कारण श्रीलंका मैच बचाने में सफल रहा और भारत को पूरे अंक नहीं मिल सके. टेस्ट मैच ड्रॉ होने का सीधा असर भारत के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान पर पड़ा है.
सीरीज शुरू होने से पहले ही भारत के सामने स्थिति लगभग करो या मरो जैसी थी. भारतीय टीम को मौजूदा चक्र में कुल नौ टेस्ट मैच खेलने थे, जिनमें दो श्रीलंका के खिलाफ, दो न्यूजीलैंड के खिलाफ और पांच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हैं. फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए भारत को इन मुकाबलों में छह से सात जीत की जरूरत बताई जा रही थी. श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट जीतने पर भारत के पास आगे के मुकाबलों में थोड़ी गुंजाइश बचती, लेकिन ड्रॉ ने समीकरण को और मुश्किल बना दिया है.
अब भारत के पास केवल सात टेस्ट मैच शेष हैं. इनमें से छह जीतना अपने आप में बड़ी चुनौती है. न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैच नवंबर में खेले जाने हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की घरेलू श्रृंखला अगले वर्ष होगी. न्यूजीलैंड में भारत का रिकॉर्ड बहुत प्रभावशाली नहीं रहा है और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार पांच टेस्ट मैच जीतना भी आसान लक्ष्य नहीं माना जा सकता. ऑस्ट्रेलियाई टीम पिछले दौर में भारत का दौरा कर चुकी है और उस श्रृंखला में उसने मेजबान टीम को कड़ी चुनौती दी थी.
विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की मौजूदा स्थिति में भारत ने 11 टेस्ट मैच खेले हैं. इनमें उसे पांच मुकाबलों में जीत मिली है, चार में हार का सामना करना पड़ा है, जबकि दो टेस्ट ड्रॉ रहे हैं. भारत के खाते में 68 अंक हैं और उसका अंक प्रतिशत 51.52 है. कोलंबो टेस्ट जीतने पर भारत अंक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंच सकता था और बांग्लादेश को पीछे छोड़ देता. लेकिन ड्रॉ के बाद भारतीय टीम पांचवें स्थान पर ही बनी हुई है और उसके ठीक पीछे श्रीलंका है.
अंक प्रतिशत विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की दौड़ में बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अलग-अलग टीमों के मैचों की संख्या एक समान नहीं होती. इसी वजह से केवल कुल अंक देखने के बजाय अंक प्रतिशत के आधार पर टीमों की स्थिति तय होती है. भारत का 51.52 प्रतिशत अंक उसे शीर्ष दो स्थानों से फिलहाल काफी दूर रखता है. फाइनल में पहुंचने के लिए उसे न केवल लगातार जीत दर्ज करनी होगी, बल्कि शीर्ष दावेदारों के प्रदर्शन पर भी नजर रखनी होगी.
भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका श्रृंखला से पहले ही टीम की स्थिति को लेकर कहा था कि फाइनल में जगह बनाने के लिए भारत को अपने बचे हुए मैचों में छह या सात जीत हासिल करनी होंगी. गिल के अनुसार टीम की तैयारी सही दिशा में आगे बढ़ रही थी और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल खेलना टीम का मुख्य लक्ष्य था. अब कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने के बाद वही लक्ष्य भारत के लिए और अधिक कठिन हो गया है.
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली श्रृंखलाएं हैं. न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैच भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि एक भी हार उसके समीकरण को और बिगाड़ सकती है. यदि भारत को फाइनल की दौड़ में गंभीर दावेदार बने रहना है तो उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ लगभग पूर्ण प्रदर्शन करना होगा. इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला निर्णायक भूमिका निभा सकती है.
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचों टेस्ट मैच जीतना भारतीय टीम के लिए बेहद कठिन लक्ष्य होगा. घरेलू परिस्थितियां भारत के पक्ष में जरूर रहेंगी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ लगातार पांच जीत दर्ज करना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा. पिछले ऑस्ट्रेलियाई दौरे में भी भारतीय टीम को मेहमान टीम से कड़ी चुनौती मिली थी. ऐसे में केवल घरेलू परिस्थितियों के भरोसे फाइनल का टिकट पक्का मानना जोखिम भरा होगा.
भारत की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अब प्रत्येक टेस्ट का महत्व बढ़ गया है. एक और हार या लगातार दो ड्रॉ उसके फाइनल के समीकरण को लगभग समाप्त कर सकते हैं. दूसरी ओर लगातार जीत उसे अंक प्रतिशत में तेजी से ऊपर ले जा सकती है. लेकिन भारत के प्रदर्शन के साथ दूसरी टीमों के नतीजे भी महत्वपूर्ण होंगे. शीर्ष स्थानों की दौड़ में मौजूद टीमों के बीच होने वाले मुकाबले भारत के समीकरण को प्रभावित करेंगे.
कोलंबो में ड्रॉ के पीछे श्रीलंका के सोनल दिनुषा की बल्लेबाजी निर्णायक रही. 25 वर्षीय बल्लेबाज ने दोनों पारियों में शतक लगाकर भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट से दूर रखा. उनके दो शतकों ने श्रीलंका को उस समय संभाला जब भारत जीत की स्थिति बनाने की कोशिश कर रहा था. इस प्रदर्शन ने भारतीय टीम को पूरे अंक हासिल करने से रोक दिया और अंततः मुकाबला ड्रॉ पर समाप्त हुआ.
भारतीय टीम के लिए यह ड्रॉ इसलिए भी निराशाजनक है क्योंकि श्रृंखला से पहले उसे पता था कि हर जीत फाइनल की राह में महत्वपूर्ण होगी. ऐसे में श्रीलंका जैसी टीम के खिलाफ अंक गंवाना भारत के लिए महंगा साबित हुआ. यदि अंत में भारत फाइनल की दौड़ से बाहर होता है तो इस चक्र में गंवाए गए अंक निश्चित रूप से चर्चा का विषय बनेंगे.
भारत के विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू श्रृंखला भी पहले ही बड़ा झटका दे चुकी है. पिछले वर्ष दक्षिण अफ्रीका ने भारत को दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 2-0 से हराया था. उस श्रृंखला में भारत को घरेलू परिस्थितियों का लाभ उठाकर महत्वपूर्ण अंक हासिल करने की उम्मीद थी, लेकिन दो टेस्ट मैचों में मिली हार ने उसके अंक प्रतिशत को नुकसान पहुंचाया. अब श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो का ड्रॉ भी उसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण झटका बन गया है.
भारतीय टीम के सामने अब गलती की गुंजाइश बेहद कम है. सात टेस्ट मैचों में छह जीत का लक्ष्य कागज पर संभव जरूर दिखाई देता है, लेकिन मैदान पर इसे हासिल करने के लिए लगातार उच्च स्तर का प्रदर्शन करना होगा. बल्लेबाजों को लंबे समय तक रन बनाने होंगे, गेंदबाजों को मौके का फायदा उठाकर विपक्षी टीम को दो बार आउट करना होगा और टीम को निर्णायक क्षणों में दबाव संभालना होगा.
विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की श्रृंखला भारत की असली परीक्षा होगी. यदि भारत न्यूजीलैंड के खिलाफ दोनों टेस्ट जीत भी लेता है तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कम से कम चार जीत की जरूरत पड़ सकती है. इस स्थिति में किसी भी हार के बाद भारत को बाकी मुकाबलों में लगभग पूर्ण प्रदर्शन करना होगा. इसलिए टीम प्रबंधन के सामने अब केवल अगला मैच जीतने की चुनौती नहीं है, बल्कि पूरे बचे हुए कार्यक्रम की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी है.
फिलहाल भारत 68 अंकों और 51.52 के अंक प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है. कोलंबो में जीत मिलती तो स्थिति कुछ बेहतर होती, लेकिन ड्रॉ के बाद अब टीम को लंबा और कठिन रास्ता तय करना होगा. शुभमन गिल की टीम के पास वापसी का अवसर जरूर है, लेकिन उसके लिए आने वाले सातों टेस्ट में असाधारण निरंतरता दिखानी होगी.
यदि भारत फाइनल में पहुंचने में विफल रहता है तो इस विश्व टेस्ट चैंपियनशिप चक्र में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू हार और कोलंबो टेस्ट का ड्रॉ दो ऐसे परिणाम होंगे, जिनकी सबसे अधिक चर्चा होगी. फिलहाल भारतीय टीम के लिए समीकरण साफ है—बचे सात टेस्ट में कम से कम छह जीत, न्यूजीलैंड के खिलाफ मजबूत प्रदर्शन और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बेहद कठिन पांच मैचों की श्रृंखला में लगभग असाधारण प्रदर्शन. अब भारत की विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की उम्मीदें किसी एक मुकाबले पर नहीं, बल्कि अगले सात टेस्ट में लगातार जीत हासिल करने की क्षमता पर टिकी हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

