रक्षाबंधन को लेकर असमंजस खत्म, 28 अगस्त शुक्रवार को पूरे दिन मनाएं राखी: आचार्य नवीन चंद्र मिश्र

रक्षाबंधन को लेकर असमंजस खत्म, 28 अगस्त शुक्रवार को पूरे दिन मनाएं राखी: आचार्य नवीन चंद्र मिश्र

प्रेषित समय :21:39:00 PM / Thu, Aug 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र/गया. रक्षाबंधन की तिथि और भद्रा को लेकर हर वर्ष की तरह इस बार भी लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. अलग-अलग पंचांगों में पूर्णिमा और भद्रा की समाप्ति के समय में अंतर के कारण लोग यह जानना चाहते हैं कि भाई-बहन के प्रेम और रक्षा-संकल्प का पर्व आखिर किस समय मनाया जाए. गया जी धाम के प्रसिद्ध आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ‘वैदिक’ ने इस असमंजस को दूर करते हुए कहा है कि 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व नि:संकोच मनाया जा सकता है.

आचार्य मिश्र के अनुसार रक्षाबंधन पर्व और त्योहार दोनों रूपों में महत्वपूर्ण है. धार्मिक दृष्टि से यह श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं, कुमकुम से तिलक करती हैं, अक्षत लगाती हैं और मिठाई खिलाकर उनके सुख, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करती हैं. इसके बदले भाई बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं. यही कारण है कि रक्षाबंधन को भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है.

आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ने बताया कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक सीमित परंपरा नहीं है. धार्मिक परंपरा में पंडित, पुरोहित और आचार्य भी अपने शिष्यों और यजमानों को रक्षा सूत्र बांधते हैं. यह रक्षा, मंगल और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों में देवराज इंद्र और इंद्राणी से जुड़ा रक्षाबंधन का प्रसंग भी मिलता है. मान्यता के अनुसार युद्ध के लिए प्रस्थान करते समय इंद्राणी ने इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा था.

इस वर्ष विक्रम संवत 2083 यानी 2026 की श्रावण पूर्णिमा को लेकर मुख्य सवाल पूर्णिमा और भद्रा की स्थिति को लेकर है. आचार्य मिश्र के अनुसार 27 अगस्त को पूर्णिमा का प्रारंभ हुआ और इसके साथ ही भद्रा भी लग गई. विभिन्न पंचांगों में भद्रा समाप्त होने के समय में कुछ अंतर बताया गया है. निर्णय सागर में भद्रा की समाप्ति रात 9 बजकर 33 मिनट, मार्तंड में 9 बजकर 28 मिनट, रूपेश महावीर में 8 बजकर 46 मिनट और विश्व पंचांग में 8 बजकर 28 मिनट बताई गई है.

इसी तरह हरिहर हृषीकेश पंचांग में भद्रा की समाप्ति रात 8 बजकर 56 मिनट, हृषीकेश यानी शिवमूर्ति, अन्नपूर्णा एवं हनुमान पंचांगों में रात 8 बजकर 55 मिनट, आदित्य पंचांग में 8 बजकर 44 मिनट तथा महावीर पंचांग में 8 बजकर 54 मिनट बताई गई है. यानी अलग-अलग पंचांगों में समय में कुछ मिनटों का अंतर जरूर है, लेकिन सभी में भद्रा का अंत 27 अगस्त की रात में ही बताया गया है.

आचार्य मिश्र के अनुसार इसके बाद 28 अगस्त को पूर्णिमा की अवधि दिन के कुछ हिस्से तक रहने को लेकर भी अलग-अलग पंचांगों में समय दिया गया है. निर्णय सागर में पूर्णिमा सुबह 8 बजकर 42 मिनट तक, मार्तंड में 9 बजकर 48 मिनट तक, रूपेश महावीर में 9 बजकर 19 मिनट तक और विश्व पंचांग में 8 बजकर 52 मिनट तक बताई गई है. हरिहर हृषीकेश पंचांग में पूर्णिमा सुबह 9 बजकर 9 मिनट तक है, जबकि शिवमूर्ति हृषीकेश, अन्नपूर्णा और हनुमान पंचांगों में 9 बजकर 19 मिनट तक पूर्णिमा बताई गई है. आदित्य पंचांग में यह समय 9 बजकर 2 मिनट और महावीर पंचांग में 9 बजकर 18 मिनट तक बताया गया है.

इसी समय को लेकर लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि 28 अगस्त को पूर्णिमा सुबह कुछ समय तक ही है तो क्या रक्षाबंधन भी केवल उसी अवधि में मनाया जाना चाहिए. आचार्य नवीन चंद्र मिश्र का कहना है कि इस मामले में संकल्पादि में औदयिक तिथि का उच्चारण किया जाता है. उनका तर्क है कि पूर्व के वर्षों में भी ऐसी स्थिति बनी है, जब पूर्णिमा थोड़े समय के लिए रहने के बावजूद पूरे दिन रक्षाबंधन मनाया गया था.

उन्होंने इस संदर्भ में 1998, 2004, 2013 और 2022 के पंचांगों का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व वर्षों की पंचांग परंपरा और तिथि-विचार का अवलोकन करने पर इस वर्ष भी 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने में किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए. उनके अनुसार केवल कुछ मिनटों के अंतर को लेकर आम लोगों में अनावश्यक भ्रम पैदा करने की आवश्यकता नहीं है.

आचार्य मिश्र ने कहा कि 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को पूरे दिन रक्षाबंधन मनाया जाए. उन्होंने लोगों से अपील की कि पंचांगों में समय के मामूली अंतर को लेकर भ्रमित होने के बजाय पर्व की धार्मिक परंपरा और तिथि-विचार को समझें. उनके अनुसार सनातन धर्म की परंपराओं का मूल उद्देश्य जीवन को सरल, सहज और संस्कारयुक्त बनाना है.

उन्होंने कहा कि धार्मिक तिथियों और मुहूर्तों को लेकर कई बार अलग-अलग गणनाओं के कारण आम लोगों के सामने ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिनमें उन्हें यह तय करने में कठिनाई होती है कि पर्व कब मनाया जाए. ऐसे में परंपरागत पंचांगों, धर्मशास्त्रीय मान्यताओं और पूर्व के उदाहरणों का अध्ययन करके निर्णय लिया जाना चाहिए.

रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है. सुबह से ही घरों में राखी, पूजा की तैयारी और मिठाई की व्यवस्था शुरू हो जाती है. भाई-बहन एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और परिवार में उत्सव का माहौल रहता है. कई परिवारों में बहनें दूर शहरों से अपने भाइयों के घर पहुंचती हैं, जबकि जो बहनें किसी कारण से नहीं आ पातीं, वे डाक या अन्य माध्यमों से राखी भेजती हैं. इस तरह यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि पारिवारिक भावनाओं और रिश्तों को जोड़ने का अवसर भी बनता है.

आचार्य नवीन चंद्र मिश्र ने अंत में कहा कि “सनातन धर्म को सरल बनाने की आवश्यकता है, न कि जटिल.” उन्होंने रक्षाबंधन के अवसर पर सभी लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व परिवारों में प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और सद्भाव की भावना को मजबूत करे.

उन्होंने लोगों से अपील की कि 28 अगस्त शुक्रवार को पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाएं तथा भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को और मजबूत बनाएं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-