आज का दिन- 29 अगस्त 2026, शिवांश हनुमानजी के भक्तों को कभी परेशान नहीं करते हैं- शनिदेव!

आज का दिन- 29 अगस्त 2026, शिवांश हनुमानजी के भक्तों को कभी परेशान नहीं करते हैं- शनिदेव!

प्रेषित समय :21:24:52 PM / Fri, Aug 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

* प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर, व्हाट्सएप- 6367472963
* शनि की तीन स्थितियां है- कारक, अकारक और सम!
* जीवन में शनि अकारक है तो सहकर्मियों का सहयोग नहीं मिलता है, घर क्षतिग्रस्त हो जाता है, शुभ कार्य धीमी गति से होते हैं, शरीर के विविध अंगों के बाल झड़ने लगते हैं आदि.
* अकारक शनि होने पर शनि से संबंधित वस्तुओं... लोहा, काली उड़द, कोयला, तिल, जौ, काले वस्त्र, चमड़ा, काला सरसों आदि का यथाशक्ति दान करना चाहिए.
* शनिदेव, रामभक्त हनुमान के भक्तों को कभी परेशान नहीं करते हैं इसलिए शनि द्वारा प्रदत्त परेशानियों से राहत के लिए नियमित रूप से महावीर हनुमान की पूजा-अर्चना करें!
* आज का पंचांग- 29 अगस्त 2026
शक सम्वत 1948, विक्रम सम्वत 2083, गुजराती सम्वत 2082, अमान्त महीना श्रावण, पूर्णिमान्त महीना भाद्रपद, वार शनिवार, पक्ष कृष्ण, तिथि प्रतिपदा - 09:56 एएम तक, नक्षत्र पूर्व भाद्रपद - 03:42 ए एम, 30 अगस्त 2026 तक, योग सुकर्मा - 06:36 एएम तक, क्षय योग धृति - 05:22 ए एम, 30 अगस्त 2026 तक, करण कौलव - 09:56 एएम तक, द्वितीय करण तैतिल - 09:50 पीएम तक, सूर्य राशि सिंह, चन्द्र राशि कुम्भ - 09:37 पीएम तक, राहुकाल 09:23 एएम से 10:58 एएम , अभिजित मुहूर्त 12:08 पीएम से 12:58 पीएम
* आज का राशिफल- 29 अगस्त 2026
मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ राशियों के लिए उत्तम समय, शेष राशियों के लिए सामान्य दिन, कर्क राशि में जन्मे लोगो के लिए अष्टम चन्द्र, शिवोपासना करें!
* आज का चौघड़िया- 29 अगस्त 2026
दिन का चौघड़िया
काल - 06:13 से 07:48
शुभ - 07:48 से 09:23
रोग - 09:23 से 10:58
उद्वेग - 10:58 से 12:33
चर - 12:33 से 02:08
लाभ - 02:08 से 03:43
अमृत - 03:43 से 05:18
काल - 05:18 से 06:53
रात्रि का चौघड़िया
लाभ - 06:53 से 08:18
उद्वेग - 08:18 से 09:43
शुभ - 09:43 से 11:08
अमृत - 11:08 से 12:33
चर - 12:33 से 01:58
रोग - 01:58 से 03:23
काल - 03:23 से 04:48
लाभ - 04:48 से 06:13 
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-