मरिजाने कैप के बयान पर अनाया बांगर का पलटवार, बोलीं आलोचना से पहले नियमों को समझें

मरिजाने कैप के बयान पर अनाया बांगर का पलटवार, बोलीं आलोचना से पहले नियमों को समझें

प्रेषित समय :21:28:45 PM / Fri, Aug 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट से जुड़ी अनाया बांगर की महिला क्रिकेट में वापसी की कोशिश अब मैदान से बाहर भी बहस का विषय बन गई है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से महिला क्रिकेट में खेलने की अनुमति मिलने के बाद दक्षिण अफ्रीका की अनुभवी क्रिकेटर मरिजाने कैप ने इस फैसले पर तीखी आपत्ति जताई थी. कैप ने इसे ‘बिल्कुल बेतुका’ बताते हुए कहा था कि ऐसा नहीं होना चाहिए. अब अनाया ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोचकों से पहले इस पूरे मामले और लागू नियमों को समझने की अपील की है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी पात्रता और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की ओर से तय शर्तों को लेकर जरूरी जानकारी पहले ही साझा की है. 

अनाया ने कहा कि इस मुद्दे पर अपनी राय रखने वाले लोगों को पहले संबंधित नियमों और प्रक्रिया के बारे में खुद को शिक्षित करना चाहिए. उनके मुताबिक क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उनकी भागीदारी को किसी विशेष छूट के आधार पर मंजूरी नहीं दी है, बल्कि निर्धारित पात्रता प्रक्रिया के तहत उन्हें महिला क्रिकेट में वापसी का रास्ता दिया गया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी प्रतियोगिता में खेलने की पात्रता और किसी टीम में चयन दो अलग-अलग बातें हैं. अभी उनका लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया में क्लब और घरेलू स्तर पर क्रिकेट खेलकर अपनी क्षमता साबित करना है.

दरअसल, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अनाया को ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में सामुदायिक तथा प्रीमियर क्रिकेट में खेलने की अनुमति दी है. हालांकि उच्च स्तर के क्रिकेट के लिए उनकी पात्रता कुछ शर्तों से जुड़ी है. महिला बिग बैश लीग जैसे एलीट क्रिकेट में खेलने के लिए उन्हें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की निर्धारित पात्रता नीति के तहत हार्मोन संबंधी मानकों को पूरा करना होगा. उपलब्ध जानकारी के अनुसार एलीट क्रिकेट की पात्रता के लिए सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर निर्धारित सीमा के भीतर होना आवश्यक है और संबंधित शर्तें मार्च 2027 से लागू होने वाली पात्रता से जुड़ी हैं. 

यही कारण है कि अनाया की ऑस्ट्रेलिया में वापसी को सीधे महिला बिग बैश लीग में चयन के रूप में देखना सही नहीं होगा. उन्हें फिलहाल टीम में स्थान नहीं मिला है. उन्हें क्रिकेट खेलने का रास्ता मिला है, जिसके जरिए वह घरेलू स्तर पर प्रदर्शन कर आगे एलीट क्रिकेट में जगह बनाने की कोशिश करेंगी. अनाया भी पहले स्पष्ट कर चुकी हैं कि उनका उद्देश्य किसी टीम में सीधे जगह हासिल करना नहीं, बल्कि अपने प्रदर्शन के आधार पर अवसर अर्जित करना है. 

दक्षिण अफ्रीकी ऑलराउंडर मरिजाने कैप की आपत्ति ने हालांकि इस मामले को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत की बहस के केंद्र में ला दिया है. कैप ने सोशल मीडिया पर ऑस्ट्रेलिया से जुड़ी खबर साझा करते हुए लिखा कि यह फैसला बिल्कुल बेतुका है और इसे अनुमति नहीं मिलनी चाहिए. उनका बयान महिला क्रिकेट में पात्रता, प्रतिस्पर्धात्मक समानता और विभिन्न क्रिकेट बोर्डों की नीतियों को लेकर चल रही बहस को सामने लाता है. 

अनाया का जवाब भी इसी बहस के बीच आया है. उन्होंने व्यक्तिगत टिप्पणी का जवाब देने के बजाय क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की नीति और अपनी पात्रता प्रक्रिया पर जोर दिया. उनका कहना है कि आलोचना करने से पहले इस विषय से संबंधित वैज्ञानिक, चिकित्सकीय और खेल संबंधी मानकों को समझना जरूरी है. अनाया ने संकेत दिया कि उनकी ओर से जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा चुकी है और वह उन शर्तों का पालन कर रही हैं जो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने तय की हैं.

इस पूरे घटनाक्रम में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के नियमों के बीच अंतर भी महत्वपूर्ण है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की 2023 में लागू की गई नीति के अनुसार, पुरुष यौवन का अनुभव कर चुकी ट्रांसजेंडर महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में खेलने की अनुमति नहीं है. दूसरी ओर, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की घरेलू नीति पात्रता की अलग प्रक्रिया अपनाती है, जिसके तहत निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले खिलाड़ियों के लिए घरेलू महिला क्रिकेट में रास्ता उपलब्ध हो सकता है. इसलिए ऑस्ट्रेलिया में घरेलू क्रिकेट खेलने की अनुमति को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने की अनुमति के बराबर नहीं माना जा सकता. 

अनाया का क्रिकेट से रिश्ता नया नहीं है. उन्होंने पहले मुंबई की आयु वर्ग की क्रिकेट व्यवस्था में खेला है और उस दौर में उनका सामना उन खिलाड़ियों से भी हुआ जो बाद में भारतीय क्रिकेट में आगे बढ़े. संक्रमण की प्रक्रिया के दौरान उन्हें क्रिकेट से दूरी बनानी पड़ी. उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया है कि एक समय उन्हें लगा था कि उनकी क्रिकेट यात्रा शायद पूरी तरह खत्म हो जाएगी. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से मिला अवसर उनके लिए केवल किसी प्रतियोगिता में खेलने की अनुमति नहीं, बल्कि खेल में वापसी का रास्ता भी है.

अनाया ने इस दौरान भारतीय क्रिकेट बोर्ड के रवैये पर भी निराशा जताई है. उनका कहना है कि उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. वह चाहती हैं कि भारत में भी ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की महिला क्रिकेट में भागीदारी को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए. उनका तर्क है कि उनके मामले से भविष्य के लिए नियम तैयार करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारतीय बोर्ड इस विषय पर नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू करता है तो वह अपने अनुभव साझा करने के लिए तैयार हैं.

अनाया के लिए यह यात्रा आसान नहीं रही है. उन्होंने बताया कि संक्रमण के दौरान उन्हें क्रिकेट से दूर होना पड़ा और व्यक्तिगत तथा पारिवारिक स्तर पर भी कई बदलावों का सामना करना पड़ा. उनके अनुसार यह दौर भावनात्मक रूप से कठिन था, लेकिन अब उन्हें लगता है कि वह फिर से उस खेल की ओर लौट रही हैं जिसे उन्होंने लंबे समय तक अपने जीवन का हिस्सा माना. ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट खेलने की अनुमति मिलने को वह इसी लंबी यात्रा का नया पड़ाव मानती हैं.

अब उनकी नजर अगले चरण पर है. उन्हें ऑस्ट्रेलिया में पहले ऐसा क्लब तलाशना होगा जहां वह प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट खेल सकें. इसके बाद प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. यदि वह क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की एलीट पात्रता शर्तों को पूरा करती हैं तो मार्च 2027 के बाद महिला बिग बैश लीग जैसे उच्च स्तर के क्रिकेट के लिए उनका रास्ता खुल सकता है. लेकिन पात्रता मिलने के बाद भी अंतिम चयन संबंधित टीम या फ्रेंचाइजी के प्रदर्शन और चयन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.

इस विवाद का एक दूसरा पहलू यह भी है कि महिला क्रिकेट तेजी से पेशेवर और प्रतिस्पर्धात्मक खेल बन चुका है. ऐसे में खिलाड़ियों की पात्रता से जुड़े नियमों को लेकर बहस केवल किसी एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहती. खेल संस्थाओं को एक तरफ भागीदारी और समावेश से जुड़े सवालों पर विचार करना होता है, वहीं दूसरी तरफ प्रतिस्पर्धा में समानता और निर्धारित खेल मानकों को भी ध्यान में रखना पड़ता है. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अपने नियमों के आधार पर अनाया को एक रास्ता दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद का ढांचा अलग है. यही अंतर इस मामले को और महत्वपूर्ण बनाता है.

फिलहाल अनाया और कैप के बीच यह विवाद सोशल मीडिया की बहस से आगे बढ़कर महिला क्रिकेट में पात्रता के नियमों पर चर्चा का हिस्सा बन गया है. अनाया ने साफ कर दिया है कि वह आलोचनाओं से पीछे हटने के बजाय अपने क्रिकेट करियर को दोबारा खड़ा करने पर ध्यान देना चाहती हैं. उनका अगला लक्ष्य किसी बहस को जीतना नहीं, बल्कि मैदान पर लौटना और प्रदर्शन के जरिए अपने लिए आगे का रास्ता बनाना है. दूसरी ओर, कैप की टिप्पणी ने यह संकेत दिया है कि महिला क्रिकेट में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं. आने वाले समय में अनाया का प्रदर्शन और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की पात्रता प्रक्रिया दोनों ही इस बहस को नया रूप दे सकते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-