फ्रांस का बड़ा दांव, 2030 तक 30 हजार भारतीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बुलाने का लक्ष्य

फ्रांस का बड़ा दांव, 2030 तक 30 हजार भारतीय छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बुलाने का लक्ष्य

प्रेषित समय :21:56:12 PM / Fri, Aug 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करने की योजना बना रहे भारतीय विद्यार्थियों के लिए फ्रांस ने अपने दरवाजे और व्यापक करने की तैयारी शुरू कर दी है. फ्रांस ने वर्ष 2030 तक 30 हजार भारतीय विद्यार्थियों को अपने उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है. भारतीय विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए फ्रांस अब केवल विश्वविद्यालयों और पारंपरिक पाठ्यक्रमों तक अपनी पहुंच सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार, अभियांत्रिकी, प्रबंधन, एनीमेशन, गेमिंग और अन्य उभरते क्षेत्रों में भी भारतीय युवाओं के लिए अवसर बढ़ाने पर जोर दे रहा है. दोनों देशों के बीच शिक्षा को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा बनाया जा रहा है.

फ्रांस सरकार की उच्च शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों तक पहुंचाने वाली संस्था कैंपस फ्रांस के अनुसार, वर्ष 2024-25 में फ्रांस के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले भारतीय विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 9,100 हो गई. एक वर्ष के दौरान भारत फ्रांस में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के प्रमुख स्रोत देशों की सूची में भी आगे बढ़ा है. भारत अब 13वें स्थान से बढ़कर 11वें स्थान पर पहुंच गया है. यदि विद्यार्थी विनिमय कार्यक्रमों और कम अवधि के पाठ्यक्रमों में शामिल विद्यार्थियों को भी जोड़ा जाए तो वर्ष 2025 में फ्रांस में भारतीय विद्यार्थियों की संख्या करीब 12 हजार तक पहुंचने का अनुमान है.

फ्रांस का 2030 तक 30 हजार भारतीय विद्यार्थियों का लक्ष्य मौजूदा संख्या की तुलना में बड़ी छलांग है. इसके लिए फ्रांस ने भारत में शिक्षा संबंधी प्रचार और विद्यार्थियों से सीधे संपर्क की गतिविधियां बढ़ाने का फैसला किया है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण अक्टूबर में होने वाला ‘चूज फ्रांस टूर’ है, जिसमें 50 से अधिक फ्रांसीसी उच्च शिक्षण संस्थानों के भाग लेने की उम्मीद है. यह कार्यक्रम मुंबई, पुणे, नई दिल्ली और बेंगलुरु में आयोजित किया जाएगा. मुंबई में 11 अक्टूबर, पुणे में 13 अक्टूबर, नई दिल्ली में 15 अक्टूबर और बेंगलुरु में 17 अक्टूबर को विद्यार्थियों को फ्रांस में उच्च शिक्षा से जुड़े विकल्पों की जानकारी दी जाएगी.

इस आयोजन में इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा से जुड़े प्रमुख संस्थानों के साथ-साथ प्रबंधन और सार्वजनिक विश्वविद्यालय भी शामिल होंगे. सेंट्राल सुपेलेक, माइंस पेरिस-पीएसएल और आईएमटी अटलांटिक जैसे तकनीकी संस्थानों के अलावा ईएसएसईसी, ईएससीपी और ईडीएचईसी जैसे बिजनेस स्कूल तथा यूनिवर्सिटी पेरिस-सैक्ले और यूनिवर्सिटी ग्रेनोबल आल्प्स जैसे सार्वजनिक विश्वविद्यालय भी विद्यार्थियों से संवाद करेंगे. इससे भारतीय विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों और संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रम तथा भविष्य की संभावनाओं को सीधे समझने का अवसर मिलेगा.

कैंपस फ्रांस इंडिया की ओर से विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि छात्रवृत्ति, प्रवेश प्रक्रिया, वीजा, आवास और फ्रांस में विद्यार्थी जीवन से जुड़े सवालों के जवाब भी उपलब्ध कराए जाएंगे. इसका उद्देश्य उन विद्यार्थियों की आशंकाओं को दूर करना है जो विदेश में पढ़ाई की योजना तो बनाते हैं, लेकिन आवेदन प्रक्रिया, खर्च, रहने की व्यवस्था और वीजा संबंधी औपचारिकताओं के कारण आगे नहीं बढ़ पाते.

भारत और फ्रांस के बीच शिक्षा संबंधों को केवल विद्यार्थियों के विदेश जाने तक सीमित रखने के बजाय दोनों देश अब संस्थागत सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान जून में दोनों देशों के बीच 19 समझौतों पर सहमति बनी थी. इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के नवाचार तंत्र को मजबूत करना था. इसी क्रम में भारत-फ्रांस नवाचार रोडमैप 2030 को अपनाया गया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त भारत-फ्रांस कार्य समूह स्थापित किया गया.

फ्रांस के लिए भारत का महत्व केवल बड़ी विद्यार्थी आबादी के कारण नहीं है. भारतीय युवाओं की तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में बढ़ती रुचि तथा दोनों देशों के बीच नवाचार सहयोग ने शिक्षा को रणनीतिक महत्व दे दिया है. यही वजह है कि फ्रांस भारतीय विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग, तकनीक और प्रबंधन जैसे स्थापित क्षेत्रों के साथ भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में भी अवसर दिखाना चाहता है. प्रधानमंत्री मोदी की ओर से फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने की संभावनाएं तलाशने का निमंत्रण भी इसी व्यापक सहयोग का हिस्सा है.

फ्रांस की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रचनात्मक उद्योगों पर भी केंद्रित है. एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग, कॉमिक्स और इमर्सिव कंटेंट जैसे क्षेत्रों में भारत के विशाल प्रतिभा आधार को फ्रांसीसी संस्थानों और उद्योग से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. इसी दिशा में फ्रांस के भारत स्थित दूतावास और फ्रेंच इंस्टीट्यूट इन इंडिया की ओर से ‘डेसिबेल’ पहल शुरू की गई है. इसके जरिए भारतीय कलाकारों, रचनाकारों और पेशेवरों को फ्रांसीसी विशेषज्ञों, संस्थानों और उद्योग नेटवर्क के साथ काम करने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है.

डेसिबेल के तहत प्रशिक्षण, पेशेवर विकास और अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान पर जोर दिया जा रहा है. इसमें एनीमेशन, दृश्य प्रभाव, गेमिंग, कॉमिक्स और विस्तारित वास्तविकता जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है. यह पहल उन भारतीय युवाओं के लिए खास महत्व रखती है जो पारंपरिक डिग्री के बजाय रचनात्मक और तकनीकी उद्योगों में अपना करियर बनाना चाहते हैं. भारत में एनीमेशन और गेमिंग क्षेत्र के विस्तार को देखते हुए फ्रांस के साथ इस तरह का सहयोग रोजगार और कौशल विकास के नए अवसर भी पैदा कर सकता है.

इसी कार्यक्रम के अंतर्गत इंडिया कॉमिक्स प्रोजेक्ट भी चलाया जा रहा है, जिसमें 24 भारतीय कलाकार साहित्यिक कृतियों को ग्राफिक उपन्यासों के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं. एवीजीसी-एक्सआर से जुड़े इस सहयोग में एनीवर्स एंड विजुअल आर्ट्स फाउंडेशन की भूमिका है. एनीमेला महोत्सव और इंटरनेशनल मिफा कैंपस पिच लैब जैसी गतिविधियां भी इस साझेदारी को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ रही हैं.

जून 2026 में फ्रांस के एनेसी महोत्सव में पांच भारतीय एनीमेशन परियोजनाओं की प्रस्तुति भी हुई. इसे भारत और फ्रांस के बीच रचनात्मक क्षेत्रों में बढ़ते संपर्क के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है. इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों का सहयोग अब केवल विश्वविद्यालयी शिक्षा और शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था में भी विस्तार पा रहा है.

भारतीय विद्यार्थियों के लिए फ्रांस का आकर्षण बढ़ाने के पीछे एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि देश अब अपनी उच्च शिक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए अधिक सुलभ और विविध बनाने पर जोर दे रहा है. फ्रांस में अध्ययन का विकल्प तलाशने वाले भारतीय विद्यार्थियों के लिए तकनीकी शिक्षा, प्रबंधन, शोध और रचनात्मक क्षेत्रों में अलग-अलग रास्ते मौजूद हैं. ऐसे में 2030 का 30 हजार विद्यार्थियों का लक्ष्य केवल संख्या बढ़ाने की योजना नहीं बल्कि भारत के साथ शिक्षा और कौशल आधारित संबंधों को नए स्तर तक ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

आने वाले महीनों में होने वाला चूज फ्रांस टूर इस रणनीति की अगली बड़ी कड़ी होगा. चार शहरों में होने वाले आयोजन के जरिए फ्रांसीसी संस्थान सीधे भारतीय विद्यार्थियों तक पहुंचेंगे. इससे विद्यार्थियों को आवेदन करने से पहले संस्थानों और पाठ्यक्रमों को समझने का अवसर मिलेगा. वहीं फ्रांस को भी भारत के तेजी से बढ़ते उच्च शिक्षा बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का मौका मिलेगा.

फिलहाल फ्रांस में भारतीय विद्यार्थियों की संख्या 2030 के लक्ष्य से काफी कम है, लेकिन पिछले वर्षों में जिस गति से यह संख्या बढ़ी है, उससे फ्रांस को अपने लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद है. शिक्षा के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवाचार और रचनात्मक उद्योगों में बढ़ता सहयोग इस अभियान को केवल विदेश में पढ़ाई तक सीमित नहीं रखता. आने वाले वर्षों में भारत और फ्रांस के बीच यह साझेदारी विद्यार्थियों की आवाजाही से आगे बढ़कर शोध, कौशल, तकनीक और रोजगार के व्यापक अवसरों में बदल सकती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-