हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में बड़ा फैसला: कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के वित्तीय अधिकार रद्द, DSW डॉ. नीलू श्रीवास्तव को जिम्मेदारी

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में बड़ा फैसला: कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के वित्तीय अधिकार रद्द, DSW डॉ. नीलू श्रीवास्तव को जिम्मेदारी

प्रेषित समय :15:55:36 PM / Sat, Aug 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के समस्त वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिए हैं. अब विश्वविद्यालय के किसी भी बैंकिंग लेन-देन, भुगतान संबंधी प्रपत्रों और वित्तीय फाइलों पर कुलसचिव के हस्ताक्षर नहीं होंगे. उनकी जगह अधिष्ठाता छात्र कल्याण (DSW) डॉ. नीलू श्रीवास्तव को वित्त अधिकारी के साथ द्वितीय अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में नियुक्त किया गया है.

यह फैसला कुलसचिव के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उनके जमानत पर होने के बाद पैदा हुए प्रशासनिक व वित्तीय विवाद के कारण लिया गया है. वित्त विभाग के नियमों और सिविल सेवा आचरण संहिता के तहत जमानत पर चल रहा कोई भी अधिकारी वित्तीय देयकों और शासकीय भुगतानों पर हस्ताक्षर नहीं कर सकता. विश्वविद्यालय ने इस निर्णय की जानकारी और एफआईआर की प्रति उच्च शिक्षा संचालनालय के आयुक्त को भेजकर मार्गदर्शन मांगा है, ताकि अभिलेखों की सुरक्षा और निष्पक्षता बनी रहे.

कार्यपरिषद की बैठक में बना तनावपूर्ण माहौल

कार्यपरिषद की बैठक में जब कुलसचिव की भूमिका पर चर्चा शुरू हुई, तो माहौल काफी गरमा गया. कुलपति द्वारा निष्पक्ष चर्चा की बात कहे जाने पर कुलसचिव ने सदस्यों की सहमति मांगी. इसके बाद सभी सदस्यों ने लिखित में हस्ताक्षर कर कुलसचिव को इस विषय की चर्चा से अलग कराया. तत्पश्चात, डॉ. नीलू श्रीवास्तव को प्रभारी सचिव बनाकर बैठक की कार्यवाही पूरी की गई.

छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के तहत कार्रवाई

कार्यपरिषद ने छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 24 एवं 24-क में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह संकल्प पारित किया. विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि वित्तीय अनियमितता की जांच के दौरान जिम्मेदार पद पर बने रहने से साक्ष्यों और रिकॉर्ड्स के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी रहती है.

पिछले 3 वर्षों के ऑडिट और 92 लाख के भुगतान की जांच की मांग

मामले के तूल पकड़ने के साथ ही विश्वविद्यालय के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय लेन-देन, कैशबुक और क्रय संबंधी फाइलों के गहन ऑडिट की मांग उठने लगी है. विशेष रूप से सत्र 2024-25 की परीक्षाओं के लिए एक बाहरी फर्म को स्वीकृत लगभग 92.10 लाख रुपये के भुगतान और अन्य खर्चों की स्वतंत्र जांच कराने के लिए कुलाधिपति से अनुरोध किया गया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-