सुभाष घई ने ‘ताल’ के लिए ऐश्वर्या राय को किया था रिजेक्ट, ‘इरुवर’ देखकर बदली सोच

सुभाष घई ने ‘ताल’ के लिए ऐश्वर्या राय को किया था रिजेक्ट, ‘इरुवर’ देखकर बदली सोच

प्रेषित समय :21:03:39 PM / Sat, Aug 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. फिल्मी दुनिया में किसी कलाकार की पहली छवि कई बार उसके अगले सफर की दिशा तय करती है, लेकिन कभी-कभी एक दमदार अभिनय उस छवि को पूरी तरह बदल देता है. अभिनेत्री ऐश्वर्या राय के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था. निर्देशक सुभाष घई ने अपनी चर्चित फिल्म ‘ताल’ में उन्हें लेने का फैसला तुरंत नहीं किया था. विश्व सुंदरी का खिताब जीतने के बाद ऐश्वर्या की पहचान उस समय मुख्य रूप से मॉडलिंग और सौंदर्य प्रतियोगिता से जुड़ी हुई थी. ऐसे में घई को लगा था कि वह उनकी फिल्म की उस साधारण लड़की की भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं होंगी, जिसकी कहानी आगे चलकर ग्लैमर और स्टारडम तक पहुंचती है. लेकिन मणि रत्नम की तमिल फिल्म ‘इरुवर’ में ऐश्वर्या का काम देखने के बाद उनका नजरिया बदल गया.

सुभाष घई ने हालिया बातचीत में ‘ताल’ के निर्माण से जुड़ा यह किस्सा साझा किया. उनके मुताबिक फिल्म के लिए ऐसी अभिनेत्री की तलाश थी जो अभिनय के साथ-साथ नृत्य में भी मजबूत हो. फिल्म की कहानी में नृत्य और संगीत की अहम भूमिका थी, इसलिए मुख्य महिला किरदार के चयन को लेकर वह काफी सतर्क थे. इसी दौरान चर्चित कोरियोग्राफर सरोज खान ने ऐश्वर्या राय का नाम सुझाया. घई के लिए यह नाम उस समय चौंकाने वाला था, क्योंकि उनकी नजर में ऐश्वर्या की सार्वजनिक पहचान अभी भी सौंदर्य प्रतियोगिता और मॉडलिंग से अधिक जुड़ी हुई थी.

घई ने बताया कि जब उन्होंने सरोज खान से पूछा कि मौजूदा अभिनेत्रियों में कौन सबसे अच्छा नृत्य कर सकती है, तो उन्होंने ऐश्वर्या का नाम लिया. निर्देशक को इस सुझाव पर विश्वास नहीं हुआ. उन्होंने ऐश्वर्या को उस समय सौंदर्य और मॉडलिंग की दुनिया से जुड़ी अभिनेत्री के रूप में देखा था. उनकी चिंता केवल नृत्य को लेकर नहीं थी, बल्कि यह भी थी कि क्या ऐश्वर्या ‘ताल’ के किरदार की भावनात्मक और सामाजिक पृष्ठभूमि को विश्वसनीय तरीके से पर्दे पर उतार पाएंगी.

‘ताल’ में ऐश्वर्या ने मानसी नाम की युवती का किरदार निभाया था. यह भूमिका शुरुआत में बेहद सादगीपूर्ण रूप में दिखाई जाती है और कहानी के आगे बढ़ने के साथ उसके व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव आता है. यही बदलाव फिल्म के चरित्र-चित्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा था. घई को ऐसी अभिनेत्री की जरूरत थी जो एक ओर सामान्य और सहज दिखाई दे तथा दूसरी ओर कहानी के अगले पड़ाव पर मंच की चमक और आत्मविश्वास को भी उतनी ही मजबूती से प्रस्तुत कर सके.

ऐश्वर्या को लेकर निर्देशक की शुरुआती धारणा मणि रत्नम की फिल्म ‘इरुवर’ देखने के बाद बदली. घई के अनुसार एक मित्र ने उन्हें ऐश्वर्या का काम देखने की सलाह दी थी. इसके बाद उन्होंने मणि रत्नम की फिल्म देखी और पहली बार उन्हें ऐश्वर्या में वह अभिनय क्षमता दिखाई दी, जिसकी तलाश ‘ताल’ के लिए की जा रही थी. इसके बाद उन्होंने तय किया कि मानसी के किरदार के लिए ऐश्वर्या को ही चुना जाएगा.

घई के लिए ‘इरुवर’ केवल एक फिल्म देखने का अनुभव नहीं था, बल्कि एक कलाकार को उसके बाहरी व्यक्तित्व से अलग करके देखने का अवसर भी था. विश्व सुंदरी रह चुकी ऐश्वर्या की खूबसूरती उनकी सबसे बड़ी पहचान बन चुकी थी, लेकिन ‘इरुवर’ में उनके अभिनय ने यह साबित किया कि कैमरे के सामने उनका प्रभाव केवल रूप-रंग तक सीमित नहीं है. इसी प्रदर्शन ने घई की उस धारणा को बदल दिया, जिसके कारण वह शुरुआत में उन्हें ‘ताल’ के लिए उपयुक्त नहीं मान रहे थे.

निर्देशक ने ऐश्वर्या को लेकर अपनी योजना भी स्पष्ट की. उनका विचार था कि फिल्म की शुरुआत में उन्हें बिना अधिक मेकअप के दिखाया जाए. किरदार जैसे-जैसे कहानी के नए पड़ाव पर पहुंचे, उसके रूप और प्रस्तुति में भी बदलाव आए. इस तरह दर्शक एक सामान्य लड़की से एक ग्लैमरस कलाकार के रूप में उसके परिवर्तन को महसूस कर सकें. यानी ऐश्वर्या की वास्तविक जिंदगी में मौजूद ग्लैमर को सीधे पर्दे पर उतारने के बजाय उसे कहानी का हिस्सा बनाया गया.

‘ताल’ वर्ष 1999 में प्रदर्शित हुई थी और इसके साथ ऐश्वर्या राय, अनिल कपूर और अक्षय खन्ना प्रमुख भूमिकाओं में थे. फिल्म की सबसे बड़ी विशेषताओं में उसका संगीत, नृत्य और दृश्यात्मक प्रस्तुति शामिल रही. ऐश्वर्या के नृत्य को विशेष रूप से सराहा गया और फिल्म के गीतों ने उनकी पहचान को एक अलग स्तर तक पहुंचाया. जिस अभिनेत्री की क्षमता पर निर्देशक ने शुरुआत में सवाल उठाए थे, वही बाद में फिल्म के सबसे यादगार हिस्सों में शामिल हो गईं.

इस पूरे प्रसंग का दिलचस्प पहलू यह है कि ऐश्वर्या को लेकर घई की सोच किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि उनके काम को देखने के बाद बदली. ‘इरुवर’ में अभिनय देखने के बाद उन्होंने ऐश्वर्या को केवल सौंदर्य प्रतियोगिता की विजेता या मॉडल के रूप में नहीं देखा, बल्कि एक ऐसी अभिनेत्री के तौर पर पहचाना जो निर्देशक की कल्पना के अनुसार अपने व्यक्तित्व को बदल सकती है.

घई ने बातचीत में ऐश्वर्या की पेशेवर प्रतिबद्धता की भी प्रशंसा की. उनके अनुसार अभिनेत्री ने ‘ताल’ के किरदार और उनकी कल्पना के सामने खुद को पूरी तरह समर्पित किया. निर्देशक ने इसी संदर्भ में महानायक अमिताभ बच्चन का उदाहरण भी दिया. उनका कहना था कि बड़ा कलाकार होने के बावजूद जब कोई अभिनेता निर्देशक की दृष्टि को स्वीकार करता है और किरदार की जरूरत के अनुसार स्वयं को ढालता है, तभी फिल्म का परिणाम मजबूत बनता है.

‘ताल’ की सफलता ने ऐश्वर्या के करियर में भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव जोड़ा. वह पहले ही सौंदर्य प्रतियोगिता और शुरुआती फिल्मों के जरिए दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर चुकी थीं, लेकिन ‘ताल’ ने उन्हें अभिनय, नृत्य और ग्लैमर के ऐसे संयोजन के साथ स्थापित किया, जिसने हिंदी सिनेमा में उनकी अलग पहचान मजबूत की. फिल्म के गीतों और उनके प्रदर्शन ने यह भी दिखाया कि किसी कलाकार की लोकप्रिय छवि को निर्देशक किस तरह कहानी की जरूरत के अनुरूप नए रूप में इस्तेमाल कर सकता है.

सुभाष घई का यह पुराना निर्णय और बाद में बदली हुई राय फिल्म उद्योग में कलाकारों को लेकर बनने वाली शुरुआती धारणाओं पर भी सवाल खड़ा करती है. किसी अभिनेता की लोकप्रिय पहचान कई बार उसके काम से पहले पहुंच जाती है. ऐसे में उसके भीतर मौजूद वास्तविक क्षमता को पहचानने के लिए उसके काम को देखना जरूरी होता है. ऐश्वर्या के मामले में ‘इरुवर’ वही फिल्म साबित हुई, जिसने घई की शुरुआती धारणा को बदल दिया और आगे चलकर ‘ताल’ जैसी फिल्म में उन्हें यादगार भूमिका दिलाई.

आज ‘ताल’ को उसके संगीत, नृत्य और कलाकारों के प्रदर्शन के लिए याद किया जाता है. ऐश्वर्या राय के लिए यह फिल्म इसलिए भी खास रही कि इसमें उन्होंने केवल अपनी खूबसूरती का प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि किरदार के अलग-अलग चरणों को पर्दे पर निभाया. सुभाष घई की हालिया यादों से यह बात एक बार फिर सामने आती है कि किसी कलाकार की असली पहचान उसके बाहरी परिचय से नहीं, बल्कि कैमरे के सामने उसके काम से तय होती है. ‘इरुवर’ ने घई को ऐश्वर्या का अभिनय दिखाया और उसी प्रदर्शन ने ‘ताल’ के लिए उस अभिनेत्री का रास्ता खोल दिया, जिसे निर्देशक कभी इस भूमिका के लिए अनुपयुक्त मान रहे थे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-