रायपुर. छत्तीसगढ़ में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की वर्ष 2021 की राज्य सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं और डीएमएफ फंड से जुड़े कथित घोटाले की जांच के दौरान ईडी ने राज्य में सात ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया. इसी कार्रवाई के बीच एजेंसी ने डीएमएफ फंड मामले में आरोपी सतपाल सिंह छाबड़ा और सीजीपीएससी मामले में आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया. दोनों को धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने दोनों को 5 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया.
ईडी की कार्रवाई भिलाई, दुर्ग और रायपुर सहित सात स्थानों पर की गई. जिन परिसरों की तलाशी ली गई, उनमें केके चंद्राकर का परिसर भी शामिल बताया गया है. केके चंद्राकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक के रूप में काम कर चुके हैं. तलाशी के दौरान एजेंसी ने क्या दस्तावेज, डिजिटल उपकरण या अन्य सामग्री बरामद की, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है. हालांकि कार्रवाई से सीजीपीएससी मामले की जांच का दायरा और व्यापक होने के संकेत मिले हैं.
सतपाल सिंह छाबड़ा और उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी मंगलवार की कार्रवाई का सबसे अहम घटनाक्रम रही. ईडी ने दोनों को गिरफ्तार करने के बाद धनशोधन निवारण अधिनियम की विशेष अदालत में पेश किया. जांच एजेंसी ने दोनों से पूछताछ के लिए पांच-पांच दिन की हिरासत की मांग की थी. ईडी की ओर से अदालत में कहा गया कि दोनों मामलों की जांच में आरोपियों से पूछताछ जरूरी है और कथित वित्तीय लेन-देन तथा अन्य पहलुओं की जानकारी हासिल करने के लिए कस्टोडियल रिमांड आवश्यक है. सुनवाई के बाद अदालत ने ईडी की मांग स्वीकार करते हुए दोनों को 5 सितंबर तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया.
सतपाल सिंह छाबड़ा के खिलाफ कार्रवाई डीएमएफ फंड से जुड़े कथित घोटाले की जांच के सिलसिले में हुई है, जबकि उत्कर्ष चंद्राकर को सीजीपीएससी भर्ती मामले में आरोपी बताया गया है. दोनों प्रकरणों की जांच ईडी अलग-अलग पहलुओं से कर रही है. अब पांच दिन की हिरासत के दौरान एजेंसी दोनों से कथित आर्थिक लेन-देन, धन के स्रोत, संबंधित लोगों और उन गतिविधियों के बारे में पूछताछ कर सकती है, जिनका संबंध जांच के दायरे में आए मामलों से बताया जा रहा है.
सीजीपीएससी प्रकरण की बात करें तो पूरा मामला वर्ष 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षा की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है. इस परीक्षा के माध्यम से डिप्टी कलेक्टर, डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस सहित विभिन्न वरिष्ठ पदों के लिए उम्मीदवारों का चयन किया गया था. परीक्षा और चयन प्रक्रिया में कथित पक्षपात, प्रश्नपत्र लीक, चयन में हेरफेर और प्रभावशाली लोगों से जुड़े उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप सामने आए थे. इन आरोपों के बाद सीजीपीएससी की कार्यप्रणाली और तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में आई.
आरोप लगाया गया कि भर्ती प्रक्रिया में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों तथा राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों और परिचितों को कथित रूप से लाभ पहुंचाया गया. मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने भी प्रकरण में कार्रवाई की. आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष तमन सिंह सोनवानी की भूमिका की भी जांच की गई. सीबीआई ने उन्हें जुलाई में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा की चयन प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था. इससे पहले वर्ष 2024 में भी उनकी गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी.
प्रवर्तन निदेशालय ने 27 जुलाई को जारी अपने बयान में आरोप लगाया था कि सीजीपीएससी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए सोनवानी ने अन्य लोक सेवकों और निजी व्यक्तियों के साथ कथित आपराधिक साजिश की. एजेंसी के मुताबिक इस कथित साजिश के तहत प्रश्नपत्र लीक किए गए और चयन प्रक्रिया में हेरफेर किया गया. ईडी ने आरोप लगाया था कि कथित तौर पर अवैध आर्थिक लाभ के बदले अपने रिश्तेदारों और अन्य पसंदीदा उम्मीदवारों को वरिष्ठ सरकारी पदों पर चयन दिलाने की कोशिश की गई.
जांच एजेंसी ने भर्ती नियमों में वर्ष 2021 में किए गए एक बदलाव को भी महत्वपूर्ण बताया था. ईडी के अनुसार सीजीपीएससी के भर्ती नियमों में परिवार की परिभाषा से ‘भतीजे’ शब्द हटा दिया गया था. एजेंसी का आरोप है कि इस बदलाव से सोनवानी के रिश्तेदारों के चयन का रास्ता आसान हुआ. हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से लगाए गए इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के परीक्षण और अदालत के निर्णय के बाद ही होगी.
मंगलवार की तलाशी और गिरफ्तारी ने मामले के आर्थिक पहलू को भी महत्वपूर्ण बना दिया है. धनशोधन निवारण कानून के तहत ईडी की जांच केवल कथित मूल अपराध तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कथित अपराध से जुड़े धन के स्रोत, उसके लेन-देन और उसके इस्तेमाल की भी पड़ताल की जाती है. यही वजह है कि सात ठिकानों पर तलाशी के साथ दो आरोपियों की गिरफ्तारी को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है.
डीएमएफ यानी जिला खनिज संस्थान न्यास से जुड़े मामले में भी ईडी वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है. डीएमएफ का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाली आबादी के विकास तथा बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए उपलब्ध राशि का उपयोग करना है. ऐसे फंड के उपयोग में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने पर इसका असर सीधे उन क्षेत्रों के विकास कार्यों पर पड़ता है, जिनके लिए यह राशि निर्धारित होती है.
दोनों मामलों में हुई कार्रवाई के बीच अदालत परिसर में भी उस समय हलचल देखने को मिली, जब सतपाल सिंह छाबड़ा की पत्नी उनकी पेशी के दौरान अदालत पहुंचीं. इस दौरान कुछ देर के लिए हंगामे जैसी स्थिति बनी और माहौल गर्म हो गया. इसके बाद अदालत की कार्यवाही आगे बढ़ी और ईडी की रिमांड अर्जी पर सुनवाई हुई. अदालत ने जांच एजेंसी की मांग पर दोनों आरोपियों को पांच दिन की हिरासत में भेज दिया.
अब ईडी की हिरासत में दोनों आरोपियों से पूछताछ जांच के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है. एजेंसी कथित वित्तीय लेन-देन, धन के स्रोत, संबंधित व्यक्तियों और दस्तावेजों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी. सात ठिकानों पर हुई तलाशी के दौरान मिले संभावित दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
केके चंद्राकर से जुड़े परिसर की तलाशी ने मामले को राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बना दिया है. हालांकि किसी व्यक्ति के परिसर की तलाशी या किसी व्यक्ति से पूछताछ अथवा गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध नहीं करती. जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी तय होगी.
फिलहाल सीजीपीएससी और डीएमएफ से जुड़े मामलों में ईडी की कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है. एक तरफ 2021 की राज्य सेवा परीक्षा की कथित अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ रही है, तो दूसरी ओर डीएमएफ फंड से जुड़े कथित आर्थिक घोटाले की परतें खंगाली जा रही हैं. सात स्थानों पर तलाशी, दो गिरफ्तारियां और पांच दिन की ईडी हिरासत ने दोनों मामलों की जांच को एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला दिया है. अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि हिरासत के दौरान पूछताछ और तलाशी से सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसी आगे किन लोगों तक पहुंचती है और अदालत के समक्ष मामले में क्या नए तथ्य रखे जाते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

