नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी एफआईआर को रद्द कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल किया.
हालांकि, सरकार ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2,873 लोग वहां पहुंचे थे. इनमें से जिन लोगों ने उस दौरान मारपीट या संपत्ति को नुकसान पहुंचाया हो तो उन पर यह केस चलता रहेगा. सुनवाई से पहले कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर के मार्च को वापस ले लिया. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद सीजेपी नेताओं से किए गए तीनों वादे पूरे करने के लिए सरकार वचनबद्ध है.
कोर्ट बोला- विशेष शक्तियों का इस्तेमाल इसलिए ताकि दोनों पक्ष समझौते को मानें
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि FIR रद्द करने का फैसला सिर्फ इसी मामले के खास तथ्यों और हालात को देखकर लिया गया है, इसलिए इसे दूसरे मामलों के लिए उदाहरण और बाध्यकारी फैसला नहीं माना जाएगा. कोर्ट ने यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल इस शर्त पर किया जा रहा है कि दोनों पक्ष कोर्ट के सामने हुए समझौते का पूरी तरह पालन करेंगे.
सरकार ने सोमवार को दाखिल किया था अंतरिम आवेदन
सरकार ने हृश्वश्वञ्ज पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज स्नढ्ढक्र रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका 31 अगस्त को दायर की थी. यह अंतरिम आवेदन था. किसी मुख्य मुकदमे/याचिका की सुनवाई चल रही हो, उसी दौरान किसी तत्काल या अस्थायी राहत के लिए कोर्ट में दिया गया आवेदन अंतरिम आवेदन कहलाता है. सरकार ने सोमवार को दिए आवेदन में कहा था कि 25 जुलाई के फैसले के अनुसार दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों से जुड़ी 13 स्नढ्ढक्र को आगे नहीं चलाना चाहती.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

