पद्मावत के जौहर दृश्य पर स्वरा भास्कर का फिर पलटवार, बोलीं दुष्कर्म पीड़िताओं के जीने के अधिकार पर लोग क्यों भड़क रहे

पद्मावत के जौहर दृश्य पर स्वरा भास्कर का फिर पलटवार, बोलीं दुष्कर्म पीड़िताओं के जीने के अधिकार पर लोग क्यों भड़क रहे

प्रेषित समय :22:15:50 PM / Tue, Sep 1st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. फिल्म पद्मावत के चर्चित जौहर दृश्य को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की वर्ष 2018 में की गई आपत्ति एक बार फिर चर्चा में आ गई है. दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 31 अगस्त को आयोजित ‘वुमन लाइफ फ्रीडम’ विषयक कार्यक्रम में स्वरा भास्कर ने फिल्म के उस दृश्य को लेकर अपनी पुरानी टिप्पणी दोहराई, जिसमें रानी पद्मावती के नेतृत्व में चित्तौड़ की महिलाओं को जौहर करते हुए दिखाया गया है. उनके बयान के बाद सामाजिक माध्यमों पर बहस तेज हुई और आलोचनाओं के बीच स्वरा ने अब अपनी बात का बचाव करते हुए कहा है कि दुष्कर्म की पीड़ित महिलाओं को भी पूरी गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है.

स्वरा ने सामाजिक माध्यम एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बात उन्हें हैरान करती है कि बड़ी संख्या में लोग, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, इस मूल विचार से नाराज हैं कि दुष्कर्म की पीड़िता को दुष्कर्म के बाद भी जीवन जीने का अधिकार है. उनके इस बयान के सामने आने के बाद फिल्म के जौहर दृश्य को लेकर वर्षों पुरानी बहस फिर से सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गई है.

दरअसल, स्वरा भास्कर ने पद्मावत की रिलीज के बाद वर्ष 2018 में फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली को एक खुला पत्र लिखकर फिल्म के जौहर दृश्य पर सवाल उठाए थे. उनका तर्क था कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में फिल्माया गया यह दृश्य आधुनिक समाज में दुष्कर्म की पीड़िताओं के लिए गलत संदेश दे सकता है. उनका कहना था कि यदि कोई महिला यौन हिंसा का शिकार होती है तो उसका जीवन वहीं समाप्त नहीं हो जाता और उसे आगे जीवन जीने का पूरा अधिकार है.

31 अगस्त के कार्यक्रम में अपने पुराने बयान को याद करते हुए स्वरा ने कहा कि फिल्म देखते समय उनके मन में यह सवाल आया था कि यदि ईश्वर न करे वह स्वयं दुष्कर्म की पीड़िता होतीं तो फिल्म का संदेश उन्हें किस तरह प्रभावित करता. उनके अनुसार, उन्हें यह महसूस होता कि जैसे उन्होंने अपने सम्मान को बचाने के लिए आत्महत्या नहीं की, इसलिए वह कायर हैं. स्वरा ने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि क्या किसी महिला के साथ दुष्कर्म होने के बाद उसके जीवन को समाप्त मान लिया जाना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि जिस समाज में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की घटनाओं को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की जाती है, वहां फिल्मों में ऐसे दृश्यों को किस दृष्टि से प्रस्तुत किया जा रहा है, इस पर भी विचार होना चाहिए. स्वरा के मुताबिक समस्या जौहर की ऐतिहासिक घटना को दिखाए जाने मात्र से नहीं, बल्कि उसके संभावित सामाजिक संदेश से जुड़ी है.

अभिनेत्री ने फिल्म के एक विशेष दृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि जौहर के दौरान गर्भवती महिला के पेट का क्लोज-अप उन्हें बेहद विचलित करने वाला लगा था. उन्होंने सवाल उठाया कि उस दृश्य के माध्यम से क्या यह संदेश दिया जा रहा है कि गर्भ में पल रहा बच्चा, जो लड़की भी हो सकता है, इसलिए जन्म लेने का अधिकारी नहीं है क्योंकि भविष्य में उसके साथ यौन हिंसा की आशंका हो सकती है. स्वरा ने बताया कि फिल्म देखने के बाद उन्होंने तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ दिन इंतजार किया था और यह देखने की कोशिश की थी कि उनकी आपत्ति कायम रहती है या नहीं. इसके बाद उन्होंने भंसाली को पत्र लिखा था.

फिल्म पद्मावत में जौहर का दृश्य कहानी के अंतिम हिस्से में आता है. फिल्म की कथा के अनुसार चित्तौड़ पर अलाउद्दीन खिलजी की सेना के हमले और किले में प्रवेश के बाद रानी पद्मावती के नेतृत्व में महिलाएं जौहर करती हैं. दीपिका पादुकोण ने फिल्म में रानी पद्मावती की भूमिका निभाई थी. दृश्य में महिलाओं को सामूहिक रूप से अग्नि में प्रवेश करते हुए दिखाया गया है. इससे पहले महारावल रतन सिंह की मृत्यु और चित्तौड़ की पराजय का घटनाक्रम दिखाया गया है.

संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी पद्मावत वर्ष 2018 में प्रदर्शित हुई थी. इसमें दीपिका पादुकोण के अलावा शाहिद कपूर और रणवीर सिंह प्रमुख भूमिकाओं में थे. फिल्म मलिक मुहम्मद जायसी के प्रसिद्ध महाकाव्य पद्मावत से प्रेरित थी और इसके निर्माण तथा प्रदर्शन से पहले ही यह विवादों में घिर गई थी. फिल्म में इतिहास के चित्रण, पात्रों की प्रस्तुति और जौहर के दृश्य को लेकर विभिन्न संगठनों ने आपत्तियां जताई थीं.

फिल्म के जौहर दृश्य को लेकर स्वरा की आलोचना उस समय भी व्यापक विवाद का कारण बनी थी. उनके बयान को लेकर कुछ लोगों ने उनकी आलोचना की थी, जबकि दूसरी ओर कई लोगों ने इसे महिलाओं के अधिकार और यौन हिंसा के बाद पीड़िताओं के सामाजिक पुनर्वास से जोड़कर देखा था. अब वर्षों बाद उनके उसी दृष्टिकोण को दोहराए जाने के कारण बहस फिर सामने आ गई है.

स्वरा की ताजा प्रतिक्रिया का केंद्र यह है कि किसी महिला की गरिमा और जीवन का मूल्य उसके साथ हुई यौन हिंसा से कम नहीं हो जाता. उनके बयान को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है. दूसरी ओर, जौहर को लेकर अलग दृष्टिकोण रखने वाले लोगों का तर्क है कि ऐतिहासिक घटनाओं को वर्तमान समय के सामाजिक मानकों के आधार पर पूरी तरह नहीं समझा जा सकता. उनके अनुसार जौहर को उस समय की युद्ध परिस्थितियों, सामाजिक संरचना और महिलाओं के सामने मौजूद विकल्पों के ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए.

यही अंतर इस बहस को केवल एक फिल्म के दृश्य की आलोचना तक सीमित नहीं रहने देता. एक पक्ष इसे ऐतिहासिक घटना और राजपूत महिलाओं के आत्मबलिदान के रूप में देखता है, जबकि दूसरा पक्ष यह सवाल उठाता है कि आधुनिक समाज में ऐसे दृश्यों की प्रस्तुति का महिलाओं, विशेषकर यौन हिंसा की पीड़िताओं पर क्या प्रभाव पड़ सकता है. पद्मावत का जौहर दृश्य इसी ऐतिहासिक और आधुनिक दृष्टिकोण के बीच बहस का केंद्र बना हुआ है.

स्वरा भास्कर की टिप्पणी में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उन्होंने अपनी आपत्ति को केवल फिल्म की कलात्मक स्वतंत्रता के सवाल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे दुष्कर्म पीड़िताओं के जीवन और सामाजिक सम्मान के प्रश्न से जोड़ा. उनका कहना है कि किसी भी महिला के साथ यौन हिंसा होने के बाद उसके जीवन को समाप्त मानने की मानसिकता को चुनौती दी जानी चाहिए.

वहीं, फिल्म में जौहर के चित्रण को लेकर यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि पद्मावत एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित सिनेमाई रचना है और फिल्म में प्रस्तुत घटनाओं को लेकर इतिहासकारों तथा साहित्यिक स्रोतों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं. इसलिए फिल्म के किसी दृश्य को इतिहास का अंतिम और निर्विवाद दस्तावेज मानने के बजाय उसे उसके साहित्यिक और सिनेमाई संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा.

सोशल मीडिया पर स्वरा के ताजा बयान के बाद एक बार फिर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं. कुछ लोग उनके सवाल को महिलाओं के जीवन और अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण विमर्श मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे जौहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि की अनदेखी बता रहे हैं. इस तरह पद्मावत के एक दृश्य से शुरू हुई बहस अब इतिहास, स्त्री सम्मान, यौन हिंसा और सिनेमा की सामाजिक जिम्मेदारी जैसे कई सवालों तक पहुंच गई है.

फिलहाल स्वरा भास्कर ने अपने पुराने रुख से पीछे हटने के बजाय उसे और स्पष्ट किया है. उनका ताजा बयान इस बात पर केंद्रित है कि किसी महिला के साथ हुई हिंसा उसके जीवन का अंत नहीं होनी चाहिए. दूसरी ओर, जौहर को लेकर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण रखने वाले लोगों के लिए यह दृश्य एक अलग अर्थ रखता है. यही वैचारिक अंतर पद्मावत के जौहर दृश्य को रिलीज के वर्षों बाद भी बहस का विषय बनाए हुए है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-