आज का दिन- 6 सितंबर 2026, अजा एकादशी से मिला राजा हरिश्चन्द्र को खोया राज्य!

आज का दिन- 6 सितंबर 2026, अजा एकादशी से मिला राजा हरिश्चन्द्र को खोया राज्य!

प्रेषित समय :19:39:55 PM / Sat, Sep 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
* अजा एकादशी - 7 सितम्बर 2026, सोमवार
* पारण का समय - 06:16 एएम से 08:46 एएम, 8 सितम्बर 2026
* पारण के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - 02:42 पीएम
* एकादशी तिथि प्रारम्भ - 6 सितम्बर 2026 को 07:29 पीएम बजे
* एकादशी तिथि समाप्त - 7 सितम्बर 2026 को 05:03 पी एम बजे

सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र का नाम धर्मग्रंथों में बड़े आदर के साथ लिया जाता है जिन्होंने सत्यनिष्ठा के कारण सबकुछ खो दिया लेकिन अपने सत्यपथ से हटे नहीं. एक समय की बात है कि देवताओं ने इनकी परीक्षा लेने की योजना बनाई. राजा ने सपने में देखा कि ऋषि विश्वामित्र को उन्होंने अपना सारा राजपाट दान कर दिया है. प्रात:काल विश्वामित्र उनके द्वार पर आकर कहने लगे कि तुमने सपने में मुझे अपना राज्य दान कर दिया है. राजा हरिश्चन्द्र ने सत्यनिष्ठ व्रत का पालन करते हुए संपूर्ण राज्य विश्वामित्र को सौंप दिया. दान के लिए दक्षिणा चुकाने हेतु राजा हरिश्चन्द्र को पूर्व जन्म के कर्मफल के कारण पत्नी, पुत्र एवं स्वयं को बेचना पड़ा. हरिश्चन्द्र को श्मशान के प्रबंधक ने खरीद लिया जो श्मशान भूमि में लोगों के दाह संस्कार का काम करवाता था.

राजा हरिश्चन्द्र को श्मशान भूमि में दाह संस्कार के लिए कर वसूली का काम दिया गया. एक दिन सौभाग्य से गौतम ऋषि से राजा हरिश्चन्द्र की मुलाकात हो गई. गौतम ऋषि ने राजा से कहा कि- हे राजन्! पूर्व जन्म के कर्मों के कारण यह कष्टमय जीवन है इसलिए आप अजा एकादशी का व्रत रखकर भगवान श्रीविष्णु की पूजा करें और रात में जागरण करते हुए भगवान का ध्यान करेंगे तो आपको कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी. राजा ने ऋषि के निर्देशानुसार अजा एकादशी का व्रत किया. इसी दिन इनके पुत्र को एक जहरीले सांप ने काट लिया और मरे हुए पुत्र को लेकर इनकी पत्नी श्मशान में दाह संस्कार के लिए आई. राजा हरिश्चंद्र ने सत्यधर्म का पालन करते हुए पत्नी से भी अपने ही पुत्र के दाह संस्कार के लिए कर मांगा. उनकी पत्नी के पास कर चुकाने के लिए धन नहीं था इसलिए उसने अपनी साड़ी का आधा हिस्सा फाड़कर राजा को कर के रूप में दे दिया. राजा ने जैसे ही साड़ी का टुकड़ा लिया आसमान से फूलों की वर्षा होने लगी. समस्त देवगण राजा हरिश्चन्द्र की जय-जयकार करने लगे. इंद्रदेव ने कहा कि- हे राजन्! आप सत्यनिष्ठ व्रत की परीक्षा में सफल हुए. आप अपना राज्य स्वीकार कीजिए. इस तरह अजा एकादशी व्रत के शुभ प्रभाव से राजा हरिश्चन्द्र को अपना खोया हुआ राजपाट और परिवार फिर से मिल गया!

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है!

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-