बलरामपुर. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनावों में प्रत्याशियों की न्यूनतम आयु सीमा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों की वास्तविक उम्र तय करने के मामले में आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को प्राथमिक या अंतिम साक्ष्य नहीं माना जाएगा. कोर्ट के अनुसार, केवल शैक्षणिक रिकॉर्ड, मान्यता प्राप्त बोर्ड की 10वीं की अंकसूची और सक्षम प्राधिकारी द्वारा समय पर जारी जन्म प्रमाण पत्र ही कानूनी रूप से मान्य और विश्वसनीय दस्तावेज हैं.
यह फैसला बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत कृष्णानगर के सरपंच चुनाव से जुड़े एक विवाद में आया है. चुनाव में विजयी घोषित प्रत्याशी जसिला तिथियो का निर्वाचन हाईकोर्ट ने अमान्य करार दे दिया है.
क्या है पूरा विवाद?
ग्राम पंचायत कृष्णानगर में सरपंच पद के लिए हुए मतदान में जसिला तिथियो ने सर्वाधिक मत प्राप्त कर जीत हासिल की थी. इसके बाद प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सूरजपती राम ने निर्वाचन न्यायाधिकरण (इलेक्शन ट्रिब्यूनल) के समक्ष याचिका दायर कर चुनाव को चुनौती दी. याचिका में आरोप लगाया गया कि नामांकन दाखिल करते समय जसिला की आयु पंचायत चुनाव लड़ने की अनिवार्य संवैधानिक सीमा यानी 21 वर्ष से कम (लगभग 19 वर्ष) थी.
स्कूली और 10वीं कक्षा के शैक्षणिक दस्तावेजों की जांच में जसिला की जन्मतिथि 12 अप्रैल 2004 दर्ज पाई गई, जिसके आधार पर नामांकन के समय उनकी उम्र 21 वर्ष पूरी नहीं हो रही थी. न्यायाधिकरण ने इस आधार पर निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया था, जिसे बाद में जसिला ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी.
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत बाद में बनवाए गए जन्म प्रमाण पत्र को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि वह दस्तावेज चुनाव याचिका दायर होने के पश्चात जारी कराया गया था.
अदालत ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-F का हवाला देते हुए दोहराया कि पंचायत प्रतिनिधि बनने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना अनिवार्य है. कोर्ट ने न्यायाधिकरण के पूर्व आदेश को सही ठहराते हुए रिट याचिका खारिज कर दी, जिससे सरपंच का निर्वाचन पूरी तरह रद्द हो गया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

