नई दिल्ली. चेक बाउंस के सात मामलों में सजा का सामना कर रहे अभिनेता राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तत्काल आत्मसमर्पण करने से छूट देते हुए शर्त रखी है कि याचिकाकर्ताओं की ओर से 5 करोड़ रुपये कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा किए जाएं. न्यायालय ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर 2026 की तारीख तय की है.
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 8 सितंबर 2026 को यह आदेश पारित किया. राजपाल यादव और उनकी पत्नी की ओर से दायर याचिकाओं का मौखिक उल्लेख अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड सौरभ त्रिवेदी ने किया था.
पीठ ने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा अगले दिन तक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में पांच करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर उन्हें आत्मसमर्पण करने से छूट दी जाती है.
सात चेक बाउंस मामलों में दोषसिद्धि का मामला
राजपाल यादव की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें हाई कोर्ट ने चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था. ये मामले परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के तहत जारी किए गए कथित अनादरित चेक और शिकायतकर्ता की रकम वापस नहीं करने से जुड़े हैं.
मामले में राजपाल यादव पर शिकायतकर्ता से लिए गए ऋण की राशि वापस नहीं करने का आरोप था. अदालतों के समक्ष सुनवाई के दौरान भुगतान को लेकर कई बार आश्वासन और प्रतिबद्धताएं दी गईं, लेकिन अभियोजन पक्ष के अनुसार इनका पूरी तरह पालन नहीं हुआ.
दिल्ली हाई कोर्ट ने इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए दोषसिद्धि में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था और परिवीक्षा का लाभ देने की मांग भी खारिज कर दी थी.
हाई कोर्ट ने कहा था अदालत के आश्वासनों का सम्मान जरूरी
दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने जुलाई में राजपाल यादव और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए निचली अदालत की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था.
हाई कोर्ट ने माना था कि राजपाल यादव को कई अवसर दिए गए, लेकिन शिकायतकर्ता को भुगतान करने से संबंधित अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासनों का बार-बार पालन नहीं किया गया. अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गंभीरता की कमी के रूप में देखा.
हाई कोर्ट ने परिवीक्षा का लाभ देने से इनकार करते हुए कहा था कि बार-बार अदालत में किए गए वादों का उल्लंघन और न्यायिक प्रक्रिया की अवहेलना आरोपी को राहत देने के पक्ष में नहीं जाती.
फैसले में अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि कानून कोई ऐसी पटकथा नहीं है जिसे किसी अभिनेता की इच्छा के अनुसार दोबारा लिखा जा सके.
तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये जुर्माना
दिल्ली हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि कायम रखते हुए सजा में संशोधन किया था. राजपाल यादव को सातों चेक बाउंस मामलों में तीन-तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी. हालांकि सभी सजाएं एक साथ चलने का निर्देश दिया गया था.
इसके अलावा प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था.
इस प्रकार सात मामलों में जुर्माने की कुल राशि 7.35 करोड़ रुपये तक पहुंचती है. हाई कोर्ट ने सजा को संशोधित करते हुए भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था.
राजपाल यादव की पत्नी राधा राजपाल यादव भी इन मामलों में कार्यवाही का सामना कर रही थीं. हाई कोर्ट ने उनके मामले में भी सजा में संशोधन किया था. उन्हें सातों मामलों में प्रत्येक के लिए 5.51 लाख रुपये का जुर्माना भरने का निर्देश दिया गया था. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में उन्हें तीन महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा. सभी डिफॉल्ट सजाएं भी एक साथ चलने का निर्देश दिया गया था.
भुगतान के आश्वासनों को लेकर हुआ था विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान राजपाल यादव की ओर से शिकायतकर्ता की रकम चुकाने को लेकर अलग-अलग समय पर दिए गए बयानों पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई थी.
2 अप्रैल को हाई कोर्ट ने एक चेक बाउंस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था. यह मामला एम/एस मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर किया गया था. सुनवाई के दौरान अदालत ने भुगतान को लेकर राजपाल यादव के रुख और उनके वकील की ओर से रखे गए पक्ष के बीच कथित अंतर पर भी सवाल उठाए थे.
अदालत ने उस दौरान यह टिप्पणी भी की थी कि यदि न्यायाधीश किसी पक्ष के साथ नरमी से पेश आता है तो इसका अर्थ यह नहीं कि अदालत कमजोर है.
अदालत के वादे पूरे नहीं करने पर जताई थी नाराजगी
हाई कोर्ट ने राजपाल यादव की हिरासत और बाद की राहत पर सुनवाई के दौरान यह भी कहा था कि उनकी परेशानी का मूल कारण उनके द्वारा अदालत के सामने किए गए आश्वासनों का पालन नहीं करना था.
अदालत की टिप्पणी थी कि वह इसलिए जेल गए क्योंकि उन्होंने स्वयं अदालत के सामने किए गए वादे को पूरा नहीं किया.
अदालत ने कार्यवाही के दौरान राजपाल यादव के कथित बयान का भी उल्लेख किया था, जिसमें उन्होंने शिकायतकर्ता को भुगतान करने के बजाय पांच बार और जेल जाने की बात कही थी. हाई कोर्ट ने इस टिप्पणी को उनके आचरण और कानूनी दायित्वों का पालन करने की अनिच्छा के संकेत के रूप में देखा था.
पहले भी आत्मसमर्पण और हिरासत की स्थिति बनी
मामले में राजपाल यादव को इससे पहले भी आत्मसमर्पण करना पड़ा था. उपलब्ध विवरण के अनुसार, अदालत के आदेशों का पालन नहीं होने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई और उन्होंने अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया.
एक चरण में उन्होंने शिकायतकर्ता के पक्ष में 1.5 करोड़ रुपये जमा किए थे, जिसके बाद सजा पर अंतरिम रोक से संबंधित राहत मिली थी.
हाई कोर्ट ने बाद में उन्हें ऊपरी अदालत में कानूनी उपाय तलाशने का अवसर देते हुए सजा के क्रियान्वयन से दो महीने की सुरक्षा भी प्रदान की थी.
अब राजपाल यादव ने हाई कोर्ट के जुलाई के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दोषसिद्धि पर अंतिम फैसला नहीं दिया
सुप्रीम कोर्ट का 8 सितंबर का आदेश फिलहाल अंतरिम राहत तक सीमित है. पीठ ने राजपाल यादव को स्थायी रूप से सजा से मुक्त नहीं किया है और न ही सातों मामलों में उनकी दोषसिद्धि को निरस्त किया है.
पीठ ने याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. तत्काल राहत का लाभ पांच करोड़ रुपये कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने की शर्त से जुड़ा है.
इसका अर्थ है कि अब सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर आगे सुनवाई करेगा और यह देखा जाएगा कि दोषसिद्धि तथा सजा के संबंध में राजपाल यादव की चुनौती पर क्या राहत दी जा सकती है.
अब 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राजपाल यादव को फिलहाल आत्मसमर्पण से राहत मिल गई है, लेकिन यह राहत शर्त के साथ दी गई है. पांच करोड़ रुपये जमा करने के बाद ही आदेश के अनुसार आत्मसमर्पण से छूट प्रभावी होगी.
मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होगी. तब अदालत के सामने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका आगे विचार के लिए आएगी, जिसमें सातों चेक बाउंस मामलों में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए राजपाल यादव को प्रत्येक मामले में तीन महीने की सजा और 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था.
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश ने अभिनेता को तत्काल आत्मसमर्पण करने से राहत जरूर दी है, लेकिन सातों मामलों में उनकी दोषसिद्धि और सजा पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

