भारत में iPhone Duo की कीमत ने चौंकाया, अमेरिका से इतना महंगा क्यों है फोल्डेबल आईफोन

भारत में iPhone Duo की कीमत ने चौंकाया, अमेरिका से इतना महंगा क्यों है फोल्डेबल आईफोन

प्रेषित समय :21:35:19 PM / Sat, Sep 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. Apple ने फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार में कदम रखते हुए अपना पहला फोल्डेबल iPhone Duo भारत में लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इसके 256 जीबी मॉडल की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपये रखी है, जबकि 2 टीबी स्टोरेज वाला टॉप मॉडल 4,49,900 रुपये में उपलब्ध होगा. कीमत सामने आते ही सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि अमेरिका में यही फोन 1,999 डॉलर की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है, जबकि भारत में इसकी कीमत करीब तीन लाख रुपये से शुरू हो रही है.

पहली नजर में दोनों कीमतों की तुलना करें तो भारतीय ग्राहकों को यह फोन काफी महंगा दिखाई देता है. लेकिन कीमतों के अंतर को केवल डॉलर-रुपये के विनिमय दर से समझना सही नहीं होगा. भारत में आयात शुल्क, जीएसटी, लॉजिस्टिक्स, वितरण और उत्पाद की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई कारक अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं.

अमेरिकी कीमत को सीधे भारतीय कीमत से जोड़ना सही नहीं
अमेरिका में Apple की बताई गई 1,999 डॉलर की कीमत को भारत की कीमत से सीधे तुलना करने पर अंतर काफी बड़ा दिखाई देता है. लेकिन अमेरिकी बाजार में प्रदर्शित कीमत में आमतौर पर सेल्स टैक्स शामिल नहीं होता. वहां ग्राहक को जिस राज्य में फोन खरीदा जा रहा है, उसके अनुसार अतिरिक्त बिक्री कर देना पड़ सकता है.

दूसरी ओर, भारत में उपभोक्ता के लिए घोषित कीमत में 18 प्रतिशत जीएसटी शामिल है. इसलिए दोनों देशों की कीमतों की वास्तविक तुलना करने के लिए कर व्यवस्था को भी गणना में शामिल करना जरूरी है.

यही कारण है कि केवल वेबसाइट पर दिखाई देने वाली कीमत देखकर यह निष्कर्ष निकालना कि भारत में Apple अपने फोल्डेबल फोन को बहुत ज्यादा महंगा बेच रहा है, पूरी तस्वीर नहीं बताता.

भारत में अभी तैयार फोन के रूप में आ रहा Duo
iPhone Duo की भारतीय कीमत को प्रभावित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण फिलहाल इसका आयातित यूनिट के रूप में उपलब्ध होना है. Apple ने भारत में iPhone के कई मॉडलों का उत्पादन बढ़ाया है. स्थानीय स्तर पर निर्माण होने वाले फोन में आयात से जुड़ी कई लागत कम हो जाती हैं और इससे कीमत को नियंत्रित करना आसान होता है.

लेकिन फोल्डेबल iPhone के मामले में शुरुआती स्थिति अलग है. पहली पीढ़ी के इस डिवाइस को फिलहाल भारत में पूरी तरह तैयार यूनिट के रूप में आयात किया जा रहा है. ऐसे में आयात शुल्क और अन्य संबंधित लागत अंतिम कीमत में जुड़ती हैं.

फोल्डेबल फोन की निर्माण प्रक्रिया भी सामान्य स्मार्टफोन से अधिक जटिल होती है. इसमें डिस्प्ले, हिंज मैकेनिज्म और अन्य बेहद सटीक कंपोनेंट की जरूरत होती है. बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने से पहले कंपनियों को उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता नियंत्रण और सप्लाई चेन को स्थिर करने में समय लगता है.

टैक्स हटाकर देखें तो तस्वीर कितनी बदलती है
दिए गए आंकड़ों के आधार पर अगर 2,99,900 रुपये की भारतीय कीमत से 18 प्रतिशत जीएसटी को अलग किया जाए तो कीमत करीब 2,54,153 रुपये रह जाती है.

इसके बाद अनुमानित 28 प्रतिशत आयात शुल्क के प्रभाव को भी अलग करके देखें तो मूल कीमत करीब 1,98,557 रुपये के आसपास बैठती है. डॉलर में यह राशि लगभग 2,087 डॉलर के बराबर बनती है.

अमेरिका की 1,999 डॉलर की सूची कीमत से तुलना करें तो अंतर करीब 88 डॉलर का रह जाता है.

हालांकि, यह केवल एक अनुमानित गणना है. वास्तविक कीमत का निर्धारण Apple की आयात लागत, सप्लाई चेन, सीमा शुल्क के मूल्यांकन और अन्य व्यावसायिक लागतों पर निर्भर करता है. इसलिए केवल जीएसटी और आयात शुल्क घटाकर निकाली गई राशि को कंपनी की वास्तविक लागत नहीं माना जा सकता.

फोल्डेबल तकनीक भी बढ़ा रही है कीमत
iPhone Duo के महंगे होने की वजह सिर्फ भारतीय टैक्स व्यवस्था नहीं है. फोल्डेबल फोन की तकनीक स्वयं सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में महंगी पड़ती है.

फोल्डेबल डिस्प्ले को बार-बार मोड़ने और खोलने के बावजूद लंबे समय तक काम करने योग्य बनाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण है. इसके अलावा हिंज सिस्टम, पतली बॉडी में ज्यादा हार्डवेयर को फिट करना और स्क्रीन की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी विशेष इंजीनियरिंग की आवश्यकता होती है.

Apple का यह पहला फोल्डेबल iPhone होने के कारण शुरुआती पीढ़ी के उत्पाद की लागत भी अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है. जैसे-जैसे उत्पादन का स्तर बढ़ेगा और तकनीक परिपक्व होगी, लागत में कमी आने की संभावना बन सकती है.

क्या भारत में उत्पादन शुरू होने पर सस्ता होगा फोन
भविष्य में iPhone Duo की कीमत में कमी की संभावना काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि Apple भारत में इसका उत्पादन कब शुरू करता है.

भारत में Apple पहले ही अपने iPhone उत्पादन का बड़ा हिस्सा स्थानीय स्तर पर कर रहा है. यदि फोल्डेबल मॉडल का निर्माण भी देश में बड़े पैमाने पर शुरू होता है तो आयात से जुड़ी कुछ लागत कम हो सकती है. इससे कंपनी को भारतीय बाजार के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी कीमत तय करने की गुंजाइश मिल सकती है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि स्थानीय उत्पादन शुरू होते ही फोन की कीमत में भारी गिरावट आ जाएगी. फोल्डेबल तकनीक की उत्पादन लागत, स्क्रीन और हिंज जैसे महंगे कंपोनेंट तथा Apple की वैश्विक मूल्य निर्धारण रणनीति भी कीमत को प्रभावित करेगी.

16 अक्टूबर से प्री-ऑर्डर, 23 अक्टूबर से बिक्री
भारत में iPhone Duo के लिए 16 अक्टूबर से प्री-ऑर्डर शुरू होने की जानकारी दी गई है, जबकि इसकी बिक्री 23 अक्टूबर से शुरू होगी.

यानी भारतीय ग्राहक के लिए यह सिर्फ एक नया iPhone नहीं, बल्कि Apple के फोल्डेबल बाजार में प्रवेश का पहला अनुभव होगा. करीब तीन लाख रुपये की शुरुआती कीमत निश्चित रूप से इसे प्रीमियम श्रेणी का उत्पाद बनाती है. लेकिन कीमत को समझने के लिए सिर्फ अमेरिका और भारत की लिस्ट प्राइस की तुलना करने के बजाय जीएसटी, आयात शुल्क, उत्पादन लागत और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ देखना ज्यादा सही तस्वीर देता है.

फिलहाल iPhone Duo के मामले में भारत की ऊंची कीमत का सबसे बड़ा सवाल टैक्स से ज्यादा यह है कि क्या Apple भविष्य में इसका उत्पादन भारत में शुरू करता है और क्या बढ़ते उत्पादन के साथ फोल्डेबल तकनीक की लागत नीचे आती है. यही दो कारक आने वाले समय में भारतीय ग्राहकों के लिए इस फोन की कीमत को प्रभावित कर सकते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-