हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है, जिसे विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के दांपत्य जीवन से जोड़कर देखा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था और इसी तपस्या की स्मृति में हरतालिका व्रत की परंपरा मानी जाती है. सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और पति की सुख-समृद्धि की कामना से यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की कामना से व्रत और शिव-पार्वती का पूजन करती हैं. यह व्रत सामान्यतः निराहार और निर्जला रखा जाता है तथा पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय की आराधना की जाती है.
हरतालिका तीज के पूजन में केवल पूजा सामग्री ही नहीं, बल्कि मंत्रों का भी विशेष महत्व माना गया है. परंपरा के अनुसार पूजन की शुरुआत दीप प्रज्वलन और संकल्प से होती है. इसके बाद आचमन, प्राणायाम, पवित्रीकरण, देवताओं का आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, आभूषण, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य और आरती आदि विधियां संपन्न की जाती हैं. धार्मिक मान्यताओं में इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती को विभिन्न वस्तुएं अर्पित करने से अलग-अलग शुभ फल प्राप्त होने की बात कही गई है. यहां प्रस्तुत है हरतालिका व्रत की विस्तृत पूजन विधि, मंत्र, पूजन सामग्री और सरल उपाय.
हरतालिका व्रत का वैदिक एवं लौकिक मंत्रों से पूजन.
हरतालिका पूजन के लिए शिव, पार्वती, गणेश एव रिद्धि सिद्धि जी की प्रतिमा बालू रेत अथवा काली मिट्टी से बनाई जाती हैं. इसके बाद निम्न मंत्रो द्वारा शिव परिवार की पहले गणेश जी इसके बाद महादेव फिर माता पार्वती और कार्तिकेय जी की क्रम से पूजा करनी चाहिये.
हरतालिका तीज में भगवान शिव, माता गौरी एवम गणेश जी की पूजा का महत्व हैं. यह व्रत निराहार एवं निर्जला किया जाता हैं. शिव जैसा पति पाने के लिए कुँवारी कन्या इस व्रत को विधि विधान से करती हैं.
किसी भी पूजा से पहले दीपक जलाया जाता है उसके बाद पूजन का संकल्प लिया जाता है.
दीप प्रज्वलन का मंत्रः
शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदा.
शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपकाय नमोऽस्तु ते..
दीपो ज्योति परं ब्रह्म दीपो ज्योतिर्जनार्दन:.
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते..
आचमन
(अब निम्न मंत्र बोलते हुए तीन बार आचमन करें-
ॐ केशवाय नमः स्वाहा (आचमन करें)
ॐ नारायणाय नमः स्वाहा (आचमन करें)
ॐ माधवाय नमः स्वाहा (आचमन करें)
(निम्न मंत्र बोलकर हाथ धो लें)
ॐ हृषीकेशाय नमः हस्तप्रक्षालन
तत्पश्चात तीन बार प्राणायाम करें.
पवित्रकरण
(प्राणायाम के बाद अपने ऊपर एवं पूजन सामग्री पर निम्न मंत्र बोलते हुए जल छिड़कें)- 'ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्व-अवस्थाम् गतो-अपि वा.
यः स्मरेत् पुण्डरी-काक्षम् स बाह्य-आभ्यंतरह शुचि:॥
ॐ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु.'
पूजन संकल्प
संकल्प लेते समय हाथ में जल अक्षत पुष्प द्रव्य लिया जाता है, क्योंकि इस पूरी सृष्टि के पंचतत्व अग्रि, पृथ्वी, आकाश, वायु और जल में भगवान गणपति जल तत्व के अधिपति हैं. इसीलिए प्रथम पूज्य श्रीगणेश को सामने रखकर संकल्प लिया जाता है. ताकि श्रीगणेश की कृपा से पूजन कर्म बिना किसी बाधा के पूर्ण हो सके.
भगवती-उमा की पूजा के मंत्र
उमायै नम:
पार्वत्यै नम:
जगद्धात्र्यै नम:
जगत्प्रतिष्ठयै नम:
शांतिरूपिण्यै नम:
शिवायै नम:
भगवान शिव की आराधना के मंत्र
हराय नम:
महेश्वराय नम:
शम्भवे नम:
शूलपाणये नम:
शिवाय नम:
पशुपतये नम:
महादेवाय नम
आवाहन मंत्र
गजाननं भूतगणादिसेवितम कपित्थजम्बू फल चारू भक्षणं.
उमासुतम शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम..
आगच्छ भगवन्देव स्थाने चात्र स्थिरो भव.
यावत्पूजा करिष्यामि तावत्वं सन्निधौ भव..
अब नीचे दिया मंत्र पढ़कर प्रतिष्ठा (प्राण प्रतिष्ठा) करें -
मंत्र अस्यैप्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणा क्षरन्तु च.
अस्यै देवत्वमर्चाये मामेहती च कश्चन..
निम्न मंत्र से गणेश भगवान को आसान दें
रम्यं सुशोभनं दिव्यं सर्व सौख्यंकर शुभम.
आसनं च मया दत्तं गृहाण परमेश्वरः..
पाद्य पैर धुलना
उष्णोदकं निर्मलं च सर्व सौगंध्य संयुत्तम.
पादप्रक्षालनार्थाय दत्तं ते प्रतिगह्यताम..
आर्घ्य हाथ धुलना
अर्घ्य गृहाण देवेश गंध पुष्पाक्षतै:.
करुणाम कुरु में देव गृहणार्ध्य नमोस्तुते..
आचमन कराएं
सर्वतीर्थ समायुक्तं सुगन्धि निर्मलं जलं.
आचम्यताम मया दत्तं गृहीत्वा परमेश्वरः..
स्नान का मंत्र
गंगा सरस्वती रेवा पयोष्णी नर्मदाजलै:.
स्नापितोSसी मया देव तथा शांति कुरुश्वमे..
दूध से स्नान कराएं
कामधेनुसमुत्पन्नं सर्वेषां जीवन परम.
पावनं यज्ञ हेतुश्च पयः स्नानार्थं समर्पितं..
दही से स्नान कराएं
पयस्तु समुदभूतं मधुराम्लं शक्तिप्रभं.
ध्यानीतं मया देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यतां..
घी से स्नान कराएं
नवनीत समुत्पन्नं सर्व संतोषकारकं.
घृतं तुभ्यं प्रदास्यामि स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम...
शहद से स्नान कराएं
तरु पुष्प समुदभूतं सुस्वादु मधुरं मधुः.
तेजः पुष्टिकरं दिव्यं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम..
शर्करा गुड़ वाली चीनी से स्नान
इक्षुसार समुदभूता शंकरा पुष्टिकार्कम.
मलापहारिका दिव्या स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम..
पंचामृत से स्नान कराएं
पयोदधिघृतं चैव मधु च शर्करायुतं.
पंचामृतं मयानीतं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम..
शुद्धोदक शुद्ध जल से स्नान कराएं
मंदाकिन्यास्त यध्दारि सर्वपापहरं शुभम.
तदिधं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम..
वस्त्र अर्पित करें
सर्वभूषाधिके सौम्ये लोक लज्जा निवारणे.
मयोपपादिते तुभ्यं वाससी प्रतिगृह्यतां..
उपवस्त्र कपड़े का टुकड़ा अर्पण करें
सुजातो ज्योतिषा सह्शर्म वरुथमासदत्सव:.
वासोअस्तेविश्वरूपवं संव्ययस्वविभावसो..
यज्ञोपवीत जनेऊ अर्पित करें
नवभिस्तन्तुभिर्युक्त त्रिगुण देवतामयम |
उपवीतं मया दत्तं गृहाणं परमेश्वर : ||
मधुपर्क दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण अर्पण करें
कस्य कन्स्येनपिहितो दधिमध्वा ज्यसन्युतः.
मधुपर्को मयानीतः पूजार्थ् प्रतिगृह्यतां..
गंध चंदन अबीर गुलाल चढ़ाएं
श्रीखण्डचन्दनं दिव्यँ गन्धाढयं सुमनोहरम. विलेपनं सुरश्रेष्ठ चन्दनं प्रतिगृह्यतां..
रक्त लाल चंदन चढ़ाएं
रक्त चन्दन समिश्रं पारिजातसमुदभवम.
मया दत्तं गृहाणाश चन्दनं गन्धसंयुम..
रोली लगाएं
कुमकुम कामनादिव्यं कामनाकामसंभवाम .
कुम्कुमेनार्चितो देव गृहाण परमेश्वर्:..
सिन्दूर चढ़ाएं
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्.
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यतां..
अक्षत चढ़ाएं
अक्षताश्च सुरश्रेष्ठं कुम्कुमाक्तः सुशोभितः.
माया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वरः..
पुष्प चढ़ाएं
पुष्पैर्नांनाविधेर्दिव्यै: कुमुदैरथ चम्पकै:.
पूजार्थ नीयते तुभ्यं पुष्पाणि प्रतिगृह्यतां..
पुष्प माला चढ़ाएं
माल्यादीनि सुगन्धिनी मालत्यादीनि वै प्रभो.
मयानीतानि पुष्पाणि गृहाण परमेश्वर:..
बेल का पत्र चढ़ाएं
त्रिशाखैर्विल्वपत्रैश्च अच्छिद्रै: कोमलै: शुभै:.
तव पूजां करिष्यामि गृहाण परमेश्वर :..
दूर्वा चढ़ाएं
त्वं दूर्वेSमृतजन्मानि वन्दितासि सुरैरपि.
सौभाग्यं संततिं देहि सर्वकार्यकरो भव..
दूर्वाकर दूर्वा हरि दूब चढ़ाएं
दूर्वाकुरान सुहरिता नमृतान मंगलप्रदाम.
आनीतांस्तव पूजार्थ गृहाण गणनायक:..
शमीपत्र अर्पण करें
शमी शमय ये पापं शमी लाहित कष्टका.
धारिण्यर्जुनवाणानां रामस्य प्रियवादिनी..
अबीर गुलाल चढ़ाएं
अबीरं च गुलालं च चोवा चन्दन्मेव च.
अबीरेणर्चितो देव क्षत: शान्ति प्रयच्छमे..
आभूषण चढ़ाएं
अलंकारान्महा दव्यान्नानारत्न विनिर्मितान.
गृहाण देवदेवेश प्रसीद परमेश्वर:..
सुगंध तेल चढ़ाएं
चम्पकाशोक वकु ल मालती मीगरादिभि:.
वासितं स्निग्धता हेतु तेलं चारु प्रगृह्यतां..
धूप दिखाएं
वनस्पतिरसोदभूतो गन्धढयो गंध उत्तम :.
आघ्रेय सर्वदेवानां धूपोSयं प्रतिगृह्यतां..
दीप दिखाएं
आज्यं च वर्तिसंयुक्तं वहिन्ना योजितं मया.
दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम..
धूप दीप दिखाने के बाद अपने हाथ धो लें.
नैवेद्य मिठाई अर्पण करें
शर्कराघृत संयुक्तं मधुरं स्वादुचोत्तमम.
उपहार समायुक्तं नैवेद्यं प्रतिगृह्यतां..
मध्येपानीय आचमन के लिये जल दिखाएं
अतितृप्तिकरं तोयं सुगन्धि च पिबेच्छ्या.
त्वयि तृप्ते जगतृप्तं नित्यतृप्ते महात्मनि..
ऋतुफल फल
नारिकेलफलं जम्बूफलं नारंगमुत्तमम.
कुष्माण्डं पुरतो भक्त्या कल्पितं प्रतिगृह्यतां..
आचमन भगवान को जल दिखाकर किसी पात्र में डालें
गंगाजलं समानीतां सुवर्णकलशे स्थितन.
आचमम्यतां सुरश्रेष्ठ शुद्धमाचनीयकम..
अखंड ऋतुफल सूखे मेवे चढ़ाएं
इदं फलं मयादेव स्थापितं पुरतस्तव.
तेन मे सफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि..
ताम्बूल पूंगीफलं पान, सुपारी लौंग, इलायची चढ़ाएं
पूंगीफलम महद्दिश्यं नागवल्लीदलैर्युतम.
एलादि चूर्णादि संयुक्तं ताम्बूलं प्रतिगृह्यतां..
दक्षिणा दान अर्पण करें
हिरण्यगर्भ गर्भस्थं हेमबीजं विभावसो:.
अनन्तपुण्यफलदमत : शान्ति प्रयच्छ मे..
आरती करें
चंद्रादित्यो च धरणी विद्युद्ग्निंस्तर्थव च.
त्वमेव सर्वज्योतीष आर्तिक्यं प्रतिगृह्यताम..
पुष्पांजलि करें
नानासुगन्धिपुष्पाणि यथाकालोदभवानि च .
पुष्पांजलिर्मया दत्तो गृहाण परमेश्वर:..
प्रार्थना करें
रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्य रक्षक:.
भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात..
..अनया पूजया श्री गणपति: देवता प्रीयतां न मम.. ऐसा बोलकर हाथ जोड़कर प्रणाम करें.
जय महादेव
प्रश्न नहीं स्वाध्याय करें
हरतालिका व्रत पूजन की सामग्री
1- फुलेरा विशेष प्रकार से फूलों से सजा होता है.
2- गीली काली मिट्टी अथवा बालू रेत.
3- केले का पत्ता.
4- विविध प्रकार के फल एवं फूल पत्ते.
5- बेल पत्र, शमी पत्र, धतूरे का फल एवं फूल, तुलसी मंजरी.
6- जनेऊ, नाडा, वस्त्र,.
7- माता गौरी के लिए पूरा सुहाग का सामग्री, जिसमे चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, महावर, मेहँदी आदि एकत्र की जाती हैं. इसके अलावा बाजारों में सुहाग पूड़ा मिलता हैं जिसमे सभी सामग्री होती है.
8- घी, तेल, दीपक, कपूर, कुमकुम, सिंदूर, अबीर, चन्दन, नारियल, कलश.
9- पञ्चामृत - घी, दही, शक्कर, दूध, शहद.
हरतालिका व्रत के विशेष सरल उपाय
देवी भागवत के अनुसार माता पार्वती का अभिषेक आम अथवा गन्ने के रस से किया जाए तो लक्ष्मी और सरस्वती ऐसे भक्त का घर छोड़कर कभी नहीं जातीं. वहां नित्य ही संपत्ति और विद्या का वास रहता है.
शिवपुराण के अनुसार लाल व सफेद आंकड़े के फूल से शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है.
माता पार्वती को घी का भोग लगाएं तथा उसका दान करें. इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा वह निरोगी होता है.
माता पार्वती को शक्कर का भोग लगाकर उसका दान करने से भक्त को दीर्घायु प्राप्त होती है. दूध चढ़ाकर दान करने से सभी प्रकार के दु:खों से मुक्ति मिलती है. मालपूआ चढ़ाकर दान करने से सभी प्रकार की समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाती है.
हरतालिका व्रत के दिन शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव को चमेली के फूल चढ़ाने से वाहन सुख मिलता है. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने से मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है.
भगवान शिव की शमी पत्रों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है. बेला के फूल से पूजन करने पर शुभ लक्षणों से युक्त पत्नी मिलती है. धतूरे के पुष्प के पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है. लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है.
भगवान शिव पर ईख गन्ना के रस की धारा चढ़ाई जाए तो सभी आनन्दों की प्राप्ति होती है. शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है.
देवी भागवत के अनुसार वेद पाठ के साथ यदि कर्पूर, अगरु सुगंधित वनस्पति, केसर, कस्तूरी व कमल के जल से माता पार्वती का अभिषेक करने से सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है तथा साधक को थोड़े प्रयासों से ही सफलता मिलती है.
जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती. दूर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है. कनेर के फूलों से शिव पूजन करने से नवीन वस्त्रों की प्राप्ति होती है. हरसिंगार के पुष्पों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है.
देवी भागवत के अनुसार माता पार्वती को केले का भोग लगाकर दान करने से परिवार में सुख-शांति रहती है. शहद का भोग लगाकर दान करने से साधक को धन प्राप्ति के योग बनते हैं. गुड़ की वस्तुओं का भोग लगाकर दान करने से दरिद्रता का नाश होता है.
भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है. तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है.
द्राक्षा दाख के रस से यदि माता पार्वती का अभिषेक किया जाए तो भक्तों पर देवी की कृपा बनी रहती है.
शिवपुराण के अनुसार जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है. भगवान शिव को गेंहू चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है.
देवी भागवत के अनुसार माता पार्वती को नारियल का भोग लगाकर उसका दान करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. माता को विभिन्न प्रकार के अनाजों का भोग लगाकर गरीबों को दान करने से लोक-परलोक में आनंद व वैभव मिलता है.
माता पार्वती का अभिषेक दूध से किया जाए तो व्यक्ति सभी प्रकार की सुख-समृद्धि का स्वामी बनता है.

