गणेश चतुर्थी पर आजमाएं ये 16 शुभ उपाय, घर आएगी सुख समृद्धि और दूर होंगी परेशानियां

गणेश चतुर्थी पर आजमाएं ये 16 शुभ उपाय, घर आएगी सुख समृद्धि और दूर होंगी परेशानियां

प्रेषित समय :19:19:09 PM / Sun, Sep 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

धर्म डेस्क. गणेश चतुर्थी केवल भगवान गणेश की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि घर-परिवार में शुभता, समृद्धि और सकारात्मकता का संकल्प लेने का अवसर भी माना जाता है. इस वर्ष 14 सितंबर 2026, सोमवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश उत्सव का शुभारंभ हो रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि को भगवान गणेश के प्राकट्य का पर्व मनाया जाता है. गणेश भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा, व्रत, अभिषेक और भोग अर्पित करते हैं.

गणेशजी को विघ्नहर्ता और बुद्धि-विवेक के देवता माना गया है. यही कारण है कि गणेश चतुर्थी पर की गई पूजा में केवल दर्शन और आराधना ही नहीं, बल्कि अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए विशेष उपायों का भी उल्लेख मिलता है. ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन उपायों को श्रद्धा के साथ करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है. हालांकि इनका फल आस्था और मान्यता का विषय है.

इस गणेश उत्सव में यदि आप भी घर में सुख-शांति, समृद्धि और शुभता की कामना कर रहे हैं तो इन उपायों को जान सकते हैं.

अभिषेक के साथ करें गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का शुद्ध जल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार अभिषेक के दौरान भगवान गणेश का ध्यान करते हुए गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है. पूजा के बाद मावे के लड्डुओं का भोग लगाकर प्रसाद परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांट सकते हैं.

मान्यता है कि इस तरह पूजा करने से मन को शांति मिलती है और भक्त भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना करता है.

घर में स्थापित करें गणेश यंत्र
ज्योतिषीय मान्यताओं में गणेश यंत्र को भगवान गणेश से संबंधित शुभ यंत्र माना गया है. गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से इसकी स्थापना और पूजा की जा सकती है. मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है.

यंत्र की स्थापना करते समय उसकी पूजा और नियमित देखभाल के लिए किसी योग्य विद्वान से विधि जानना उचित रहेगा.

परेशानियों से मुक्ति के लिए हाथी को खिलाएं हरा चारा
यदि जीवन में लगातार परेशानियां बनी हुई हैं तो गणेश चतुर्थी के अवसर पर हाथी को हरा चारा खिलाने की धार्मिक परंपरा भी बताई गई है. इसके बाद गणेश मंदिर में जाकर अपनी समस्या के समाधान की प्रार्थना करें.

यह उपाय करुणा, सेवा और जीवों के प्रति संवेदना का संदेश भी देता है. यदि आसपास हाथी उपलब्ध न हो तो केवल इस उपाय के लिए किसी असुरक्षित या अवैध व्यवस्था की तलाश न करें.

धन संबंधी परेशानी में घी और गुड़ का भोग
धन और समृद्धि की कामना करने वाले भक्त गणेश चतुर्थी की सुबह स्नान आदि के बाद भगवान गणेश को शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगा सकते हैं. पूजा के बाद इसे गाय को खिलाने की परंपरा बताई गई है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह उपाय आर्थिक परेशानियों से राहत और घर में समृद्धि की कामना से किया जाता है.

21 गुड़ की गोलियां और दूर्वा अर्पित करें
गणेशजी को दूर्वा अत्यंत प्रिय मानी जाती है. गणेश चतुर्थी पर 21 गुड़ की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर दूर्वा के साथ भगवान गणेश को अर्पित करने की परंपरा है.

पूजा के दौरान अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखकर श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें. गणेश आराधना में 21 संख्या का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है.

नौकरी और पदोन्नति के लिए विशेष पूजा
नौकरी में तरक्की या पदोन्नति की कामना रखने वाले लोग गणेश चतुर्थी पर पीले रंग की गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा कर सकते हैं. पूजा में पांच हल्दी की गांठ भगवान गणेश को अर्पित करते हुए 'श्री गणाधिपतये नमः' मंत्र का जाप करने की परंपरा बताई गई है.

इसके बाद 108 दूर्वा पर गीली हल्दी लगाकर भगवान गणेश को अर्पित करने का विधान भी बताया जाता है. मान्यता के अनुसार इस उपाय को गणेश उत्सव के दौरान लगातार करने से कार्यक्षेत्र में सफलता की कामना की जाती है.

जरूरतमंदों को करें दान
गणेश चतुर्थी पर पूजा के साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है. गणेश मंदिर में दर्शन करने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को कपड़े, भोजन, फल या अनाज का दान किया जा सकता है.

दान के साथ अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा देना भी परंपरा का हिस्सा है. धार्मिक दृष्टि से दान को पुण्य का कार्य माना गया है और यह समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद का माध्यम भी बनता है.

विवाह में आ रही बाधा के लिए करें गणेश आराधना
बेटी के विवाह में देरी या बाधा की चिंता हो तो गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को मालपुए का भोग लगाने की धार्मिक मान्यता है. विवाह की कामना से व्रत रखकर गणेशजी की पूजा और प्रार्थना की जा सकती है.

इसी तरह लड़के के विवाह में बाधा आ रही हो तो भगवान गणेश को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाने की परंपरा बताई गई है. धार्मिक मान्यताओं में गणेशजी को विवाह से जुड़े विघ्न दूर करने वाला देवता भी माना जाता है.

दूर्वा से बनाएं गणेशजी की प्रतिमा
गणेश चतुर्थी पर दूर्वा से भगवान गणेश की छोटी प्रतिमा बनाकर पूजा करने की परंपरा भी बताई गई है. पूजा में मोदक, गुड़, फल और मावा-मिष्ठान अर्पित किए जा सकते हैं.

दूर्वा गणेश पूजा का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है. इसलिए दूर्वा से बनी प्रतिमा की पूजा को विशेष श्रद्धा से किया जाता है.

व्रत रखें और तिल के लड्डू का भोग लगाएं
गणेश चतुर्थी पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु शाम को भगवान गणेश की पूजा के बाद गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ कर सकते हैं. इसके बाद तिल से बने लड्डुओं का भोग लगाने और प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है.

पूजा के अंत में अपनी मनोकामना के लिए भगवान गणेश से प्रार्थना करें.

घर में लाएं नृत्य करते गणेश
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में गणेशजी की अलग-अलग प्रतिमाओं का अलग महत्व बताया गया है. घर में नृत्य करते हुए गणेशजी की प्रतिमा रखना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे घर में प्रसन्नता और समृद्धि का वातावरण बनता है.

इसे घर में ऐसे स्थान पर रखने की सलाह दी जाती है जहां से भगवान गणेश की दृष्टि मुख्य द्वार की ओर हो.

बांसुरी को माना गया है शुभ
वास्तु मान्यताओं में बांसुरी को भी घर के लिए शुभ वस्तुओं में शामिल किया गया है. मान्यता है कि बांसुरी रखने से घर का वातावरण सकारात्मक रहता है और वास्तु संबंधी दोषों को दूर करने में सहायता मिलती है.

इसे घर के पूजा या शुभ स्थान पर साफ-सुथरे तरीके से रखा जा सकता है.

एकाक्षी नारियल की पूजा
एकाक्षी नारियल को धार्मिक दृष्टि से विशेष शुभ माना जाता है. मान्यता है कि जिस घर में इसकी विधि-विधान से स्थापना कर नियमित पूजा की जाती है, वहां सकारात्मकता बनी रहती है और धन-धान्य की कमी नहीं होती.

इसे पूजा स्थल पर सम्मानपूर्वक रखकर नियमित पूजा की जा सकती है.

पूजा घर में रखें शंख
शंख को हिंदू पूजा परंपरा में अत्यंत पवित्र माना गया है. वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर के पूजा स्थल में शंख रखना शुभ होता है. पूजा के समय शंखनाद को भी सकारात्मक वातावरण से जोड़ा जाता है.

धार्मिक मान्यता है कि शंख की उपस्थिति से घर में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.

उत्तर दिशा में रखें कुबेर की प्रतिमा
धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में भगवान कुबेर को धन और समृद्धि से जोड़ा गया है. उन्हें उत्तर दिशा का स्वामी माना जाता है. इसलिए उत्तर दिशा में कुबेर की प्रतिमा रखने की परंपरा है.

गणेश उत्सव के दौरान घर की साफ-सफाई के साथ पूजा स्थल और उत्तर दिशा को व्यवस्थित करना भी शुभ माना जाता है.

गणेश उत्सव में उपाय से ज्यादा महत्वपूर्ण है श्रद्धा
गणेश चतुर्थी के ये सभी उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं. इनका उद्देश्य आस्था के साथ भगवान गणेश की आराधना करना है. किसी उपाय को आर्थिक समस्या, विवाह, नौकरी या अन्य जीवन की कठिनाइयों का निश्चित समाधान मानना उचित नहीं है.

गणेश उत्सव का सबसे बड़ा संदेश यही है कि विघ्नहर्ता गणेश की पूजा के साथ बुद्धि, संयम, सेवा और सकारात्मक कर्म को जीवन का हिस्सा बनाया जाए. भगवान गणेश को मोदक और दूर्वा अर्पित करने के साथ यदि हम अपने व्यवहार में विनम्रता, विवेक और दूसरों की सहायता का भाव भी जोड़ें, तो यही गणेश आराधना का सबसे सुंदर रूप बन सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-