जयपुर. राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव के नतीजों के बीच जयपुर नगर निगम में नई पीढ़ी की राजनीतिक एंट्री ने सबका ध्यान खींचा है. महज 21 साल की उम्र में कांग्रेस प्रत्याशी फैज हसन ने वार्ड 71 से जीत दर्ज कर नगर निगम की राजनीति में कदम रखा है. फैज हसन ने 5,426 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय प्रत्याशी मोहम्मद सलीम को 170 वोटों के अंतर से हराया. सलीम को 5,256 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी निशा गौड़ तीसरे स्थान पर रहीं.
फैज हसन की जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह जयपुर नगर निगम में युवा पीढ़ी की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी का उदाहरण बनकर सामने आई है. जिस समय राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में भाजपा राज्यभर में बढ़त बनाए हुए है, उसी समय जयपुर के एक वार्ड में कांग्रेस ने 21 वर्षीय युवा चेहरे पर भरोसा जताया और वह चुनाव जीतने में सफल रहा.
21 साल की उम्र में चुनाव जीतकर बनाया स्थान
फैज हसन की उम्र महज 21 वर्ष है. इतनी कम उम्र में नगर निगम पार्षद का चुनाव जीतना उनके राजनीतिक सफर की बड़ी शुरुआत मानी जा रही है. वार्ड 71 में उनका मुकाबला निर्दलीय मोहम्मद सलीम और भाजपा प्रत्याशी निशा गौड़ से था.
मतगणना के बाद फैज हसन को 5,426 वोट मिले. निर्दलीय उम्मीदवार मोहम्मद सलीम 5,256 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे. दोनों के बीच मुकाबला काफी करीबी रहा और अंत में फैज हसन ने 170 वोटों से बाजी मार ली.
भाजपा प्रत्याशी निशा गौड़ तीसरे स्थान पर रहीं. इस तरह वार्ड 71 में कांग्रेस प्रत्याशी ने भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवार दोनों को पीछे छोड़कर जीत हासिल की.
स्थानीय राजनीति में युवा चेहरे की दस्तक
फैज हसन की जीत को केवल एक वार्ड के चुनाव परिणाम के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. कम उम्र में चुनाव जीतने वाले इस युवा चेहरे ने स्थानीय राजनीति में नई पीढ़ी की भूमिका को लेकर चर्चा तेज कर दी है.
जेन जी यानी नई पीढ़ी का एक वर्ग अब केवल मतदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि सीधे राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. नगर निगम जैसे स्थानीय निकायों में युवाओं की भागीदारी का सीधा संबंध शहर की रोजमर्रा की समस्याओं से भी है. सड़क, सफाई, यातायात, पेयजल, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक सुविधाएं और डिजिटल सेवाएं जैसे मुद्दे युवा मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण होते हैं.
ऐसे में 21 वर्षीय फैज हसन की जीत को जयपुर की स्थानीय राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है.
जयपुर में भाजपा की बढ़त के बीच कांग्रेस की जीत
फैज हसन की व्यक्तिगत जीत ऐसे समय हुई है, जब जयपुर नगर निगम के घोषित परिणामों में भाजपा ने बढ़त बनाई है. 150 वार्ड वाले जयपुर नगर निगम में 120 वार्डों के परिणाम घोषित होने तक भाजपा ने 63 सीटों पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस 44 वार्डों में विजयी रही, जबकि निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवारों ने 13 वार्डों में जीत हासिल की.
शेष वार्डों में मतगणना जारी थी. अंतिम परिणाम सामने आने के बाद ही जयपुर नगर निगम में राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी.
इन परिणामों के बीच वार्ड 71 में कांग्रेस के युवा उम्मीदवार की जीत पार्टी के लिए भी महत्वपूर्ण है. खासतौर पर तब, जब नगर निगम चुनाव में भाजपा कई वार्डों में मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है.
राजस्थान में भाजपा ने बनाई बढ़त
राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में अब तक सामने आए परिणामों में भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई है. मतगणना वाले 10,244 वार्डों में से 8,700 से अधिक वार्डों के परिणाम दोपहर तक घोषित हो चुके थे.
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने 3,587 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 3,050 वार्डों में विजयी रही. निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 2,024 वार्डों में जीत हासिल की.
इसके अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने 56, माकपा ने 37, बहुजन समाज पार्टी ने 15, आम आदमी पार्टी ने 10 और भारत आदिवासी पार्टी ने आठ वार्डों में जीत दर्ज की.
निर्दलीय उम्मीदवारों की बड़ी संख्या में जीत ने कई नगर निकायों में राजनीतिक समीकरण को दिलचस्प बना दिया है.
उदयपुर में भाजपा को बहुमत
प्रमुख नगर निगमों के परिणामों में भी अलग-अलग तस्वीर सामने आई है. उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में भाजपा ने 53 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया. कांग्रेस को 23 वार्ड मिले, जबकि तीन सीटों पर निर्दलीय और एक सीट पर माकपा उम्मीदवार विजयी रहे.
उदयपुर का परिणाम भाजपा के लिए मजबूत प्रदर्शन के रूप में सामने आया. यहां पार्टी ने कांग्रेस के मुकाबले स्पष्ट बढ़त हासिल की.
अजमेर और पाली में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर
अजमेर और पाली में कांग्रेस ने भाजपा की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. अजमेर के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 32 वार्ड मिले. निर्दलीय उम्मीदवारों ने 11 वार्डों में जीत हासिल की.
65 वार्ड वाले पाली नगर निगम में भी कांग्रेस आगे रही. कांग्रेस ने 29 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 21 सीटें मिलीं. निर्दलीय उम्मीदवार 15 वार्डों में विजयी रहे.
इन परिणामों से स्पष्ट है कि राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में मतदाताओं का रुझान शहर-दर-शहर अलग रहा है.
भरतपुर में निर्दलीयों का दबदबा
भरतपुर में निर्दलीय उम्मीदवारों ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया. 65 वार्ड वाले नगर निकाय में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 36 वार्डों में जीत हासिल की या बढ़त बनाई. भाजपा को 20 और कांग्रेस को सात वार्ड मिले. बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी एक-एक वार्ड में जीत दर्ज की.
भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह क्षेत्र है. इसके बावजूद यहां निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
309 शहरी निकायों के लिए हुआ था चुनाव
राजस्थान में शहरी निकाय आम चुनाव 2026 के तहत 309 शहरी निकायों के लिए दो चरणों में मतदान हुआ. मतदान 9 और 11 सितंबर को कराया गया. चुनाव में 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल थीं.
कुल 10,245 पार्षदों का चुनाव होना है. राज्य में एक करोड़ 44 लाख से अधिक मतदाता मतदान के लिए पात्र थे. स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी ने इन चुनावों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया.
2028 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम परीक्षा
राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है. स्थानीय निकायों के नतीजे दोनों दलों को संगठन की स्थिति, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुझान को समझने का अवसर देंगे.
हालांकि नगर निगम चुनाव और विधानसभा चुनाव के मुद्दे अलग होते हैं, फिर भी स्थानीय चुनावों में प्रदर्शन राजनीतिक दलों के लिए जमीनी संगठन और जनसमर्थन का महत्वपूर्ण संकेत देता है.
फैज हसन की जीत ने बदली चर्चा की दिशा
राज्यभर के चुनावी आंकड़ों के बीच जयपुर के वार्ड 71 का परिणाम अपनी अलग वजह से चर्चा में है. यहां 21 वर्षीय फैज हसन ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर यह संदेश दिया है कि स्थानीय राजनीति में नई पीढ़ी के लिए भी जगह बन रही है.
फैज हसन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद सलीम को 170 वोटों से हराया. भाजपा प्रत्याशी निशा गौड़ तीसरे स्थान पर रहीं. अब उनकी चुनौती चुनाव जीतने के बाद वार्ड की स्थानीय समस्याओं और मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की होगी.
जयपुर नगर निगम के अंतिम परिणाम और बोर्ड गठन के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 21 वर्षीय फैज हसन जैसे युवा चेहरे स्थानीय शासन में किस तरह अपनी भूमिका निभाते हैं. फिलहाल उनकी जीत ने राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में जेन जी की राजनीतिक एंट्री को चर्चा का एक नया मुद्दा बना दिया है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

