26 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध कर्म, 10 अक्टूबर को पितृ विसर्जन जानिए 2026 की पूरी श्राद्ध तिथि

26 सितंबर से शुरू होंगे श्राद्ध कर्म, 10 अक्टूबर को पितृ विसर्जन जानिए 2026 की पूरी श्राद्ध तिथि

प्रेषित समय :22:13:24 PM / Tue, Sep 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

विशेष समय प्रातः 10 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक

अपने-अपने इष्ट देवता, कुल देवता, कुल देवी एवं पितृ देवताओं के प्रति श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के लिए वर्ष 2026 के आश्विन मास के श्राद्ध की तिथियां जारी की गई हैं. एस्ट्रो निर्मल की ओर से भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पितृ पक्ष के श्राद्ध कर्म की तिथि विवरणिका साझा की गई है. इसके अनुसार इस वर्ष श्राद्ध कर्म का क्रम 26 सितंबर 2026 से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा. 10 अक्टूबर को अमावस्या श्राद्ध के साथ पितृ विसर्जन होगा.

दी गई जानकारी के अनुसार श्राद्ध के विशेष समय का उल्लेख भी किया गया है. श्राद्ध कर्म के लिए प्रातः 10 बजे से मध्याह्न 1.30 बजे तक का समय विशेष बताया गया है. साथ ही यह कहा गया है कि अलग-अलग ऋषियों के अलग-अलग मतों के कारण श्राद्ध के समय को लेकर शास्त्रीय विधान में मतभेद हो सकते हैं. इसलिए अधिक जानकारी के लिए अपने निकटस्थ ब्राह्मण से संपर्क करने की सलाह दी गई है.

26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध से शुरुआत
वर्ष 2026 के श्राद्ध क्रम की शुरुआत 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध से होगी. इसके बाद प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक प्रतिदिन संबंधित तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म किया जाएगा.

तिथि विवरण इस प्रकार है-

26 सितंबर 2026 — पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर 2026 — प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर 2026 — द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026 — तृतीया श्राद्ध
30 सितंबर 2026 — चतुर्थी श्राद्ध
इस दिन चतुर्थी तिथि 14.55 बजे तक रहेगी, इसके बाद पंचमी का प्रवेश होगा.
1 अक्टूबर 2026 — पंचमी श्राद्ध
पंचमी तिथि 12.35 बजे तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी का प्रवेश होगा और षष्ठी श्राद्ध किया जाएगा.
2 अक्टूबर 2026 — षष्ठी श्राद्ध
षष्ठी तिथि प्रातः 10.15 बजे तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी श्राद्ध होगा.
3 अक्टूबर 2026 — सप्तमी एवं अष्टमी श्राद्ध
इस दिन सप्तमी तिथि प्रातः 7.59 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी का प्रवेश होगा और अष्टमी श्राद्ध किया जाएगा.
4 अक्टूबर 2026 — नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026 — दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026 — एकादशी श्राद्ध एवं इन्द्रा एकादशी व्रत
इस दिन ब्राह्मण को फलाहार का भोजन कराने की बात कही गई है.
7 अक्टूबर 2026 — द्वादशी श्राद्ध
8 अक्टूबर 2026 — त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026 — चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026 — अमावस्या श्राद्ध एवं पितृ विसर्जन
श्राद्ध के दिनों में पंचबलि का विधान
एस्ट्रो निर्मल की ओर से दी गई जानकारी में श्राद्ध के सभी दिनों में पंचबलि का उल्लेख किया गया है. इसमें गोबलि, श्वानबलि, काकबलि, देवादिबलि और पिपीलिकादिबलि शामिल हैं.

पितरों के निमित्त अपने गोत्र, वंश और नाम का उच्चारण करके ब्राह्मणों को भोजन, दान और पुण्य कार्य कराने की बात कही गई है. इसके साथ ही हवन, तिल से तर्पण और गौ सेवा का भी उल्लेख किया गया है.

पिता, माता, दादी और बाबा के श्राद्ध में घर पर ही ब्राह्मण-ब्राह्मणी को आदर सहित भोजन कराने की बात कही गई है. दी गई जानकारी में स्पष्ट किया गया है कि शास्त्र परंपरा में स्त्री-पुरुष दोनों के लिए ब्राह्मण भोजन का ही विधान है. भोजन के बाद वस्त्र, द्रव्य दक्षिणा और फल आदि देकर उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करने तथा पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने की बात कही गई है.

अतिथि, संत-महात्मा और भिक्षुक के सम्मान पर जोर
श्राद्ध कर्म के दौरान अतिथि, अभ्यागत, संत-महात्मा और भिक्षुक का भी यथायोग्य दान-पुण्य के माध्यम से सम्मान करने की बात कही गई है. वहीं तर्पण आदि की क्रियाएं विद्वान ब्राह्मणों के माध्यम से संपन्न कराने की सलाह दी गई है.

दी गई जानकारी में विशेष रूप से कहा गया है कि किसी भी परिस्थिति में पितृ श्राद्ध का त्याग नहीं करना चाहिए. संबंधित तिथि का संज्ञान लेकर श्राद्ध कर्म को पूर्ण करने की बात कही गई है.

जीवित माता-पिता और वृद्धजनों का सम्मान ही सबसे महत्वपूर्ण श्राद्ध
श्राद्ध कर्म से जुड़ी इस जानकारी में जीवित माता-पिता और वृद्धजनों के सम्मान को भी विशेष महत्व दिया गया है. इसमें कहा गया है कि अपने जीवित माता-पिता एवं वृद्धजनों का सम्मान करना, उनकी हर छोटी से छोटी बात का ध्यान रखना और उन्हें किसी भी प्रकार की पीड़ा या तकलीफ नहीं देना ही जीवन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण श्राद्ध है.

इस संदेश में पितृ श्रद्धा को केवल निर्धारित तिथियों में किए जाने वाले कर्मकांड तक सीमित न रखते हुए जीवित माता-पिता और वृद्धजनों के प्रति सम्मान को भी महत्वपूर्ण बताया गया है.

10 अक्टूबर को अमावस्या श्राद्ध और पितृ विसर्जन
श्राद्ध पक्ष का अंतिम क्रम 10 अक्टूबर 2026 को होगा. इस दिन अमावस्या श्राद्ध एवं पितृ विसर्जन किया जाएगा. इसके साथ 26 सितंबर से शुरू होने वाला श्राद्ध कर्म का क्रम पूरा होगा.

दी गई जानकारी के अनुसार श्राद्ध के समय को लेकर शास्त्रीय विधान में अलग-अलग ऋषियों के अलग-अलग मत हैं. इसलिए तिथि और श्राद्ध कर्म से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अपने निकटस्थ ब्राह्मण से संपर्क करने की सलाह दी गई है.

इस प्रकार वर्ष 2026 में श्राद्ध कर्म 26 सितंबर की पूर्णिमा श्राद्ध से शुरू होकर 10 अक्टूबर की अमावस्या श्राद्ध एवं पितृ विसर्जन तक चलेगा. इस अवधि में निर्धारित तिथियों के अनुसार श्राद्ध कर्म, पंचबलि, तर्पण, हवन, गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन, दान-पुण्य और पितरों के निमित्त किए जाने वाले अन्य कर्म संपन्न करने का विवरण दिया गया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-