बंगाल उपचुनाव में 24 घंटे में बदले कई समीकरण, नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी पलटा फैसला

बंगाल उपचुनाव में 24 घंटे में बदले कई समीकरण, नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी पलटा फैसला

प्रेषित समय :19:35:47 PM / Sat, Sep 19th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में छह अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव से पहले नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है. तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट के लिए शनिवार को रेजीनगर में उस समय नया मोड़ आया, जब उसके उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने नामांकन वापस लेने की घोषणा के करीब दो घंटे बाद ही चुनाव लड़ने का फैसला फिर से कायम कर दिया. इससे एक दिन पहले नंदीग्राम में तृणमूल उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने नामांकन वापस ले लिया था और इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की. लेकिन कुछ ही घंटों बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने नंदीग्राम के चुनावी घटनाक्रम को भी नया मोड़ दे दिया.

रेजीनगर में सुबह नाम वापसी का ऐलान, दोपहर में बदला फैसला
रेजीनगर से पूर्व तृणमूल विधायक रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार सुबह करीब 10:50 बजे पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि वह अपना नामांकन वापस लेने की तैयारी में हैं. उनके अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं पर दबाव और गिरफ्तारी का खतरा था तथा कई कार्यकर्ता प्रचार नहीं कर पा रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को नए चुनाव चिह्न के साथ चुनाव मैदान में उतरना पड़ रहा है. चौधरी के मुताबिक उन्होंने इस संबंध में ममता बनर्जी से बातचीत की थी.

हालांकि करीब दो घंटे बाद ही चौधरी ने अपना फैसला बदल दिया. दोपहर लगभग 12:30 बजे उन्होंने कहा कि वह चुनाव से पीछे नहीं हटेंगे और रेजीनगर में प्रचार शुरू करेंगे. उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी से दोबारा बातचीत हुई है और पार्टी के वरिष्ठ नेता उनके पक्ष में प्रचार के लिए रेजीनगर आएंगे.

नए चुनाव चिह्न के साथ मैदान में तृणमूल गुट
इस पूरे घटनाक्रम की एक अहम पृष्ठभूमि चुनाव चिह्न और पार्टी के नाम को लेकर चल रहा विवाद है. चुनाव आयोग की व्यवस्था के तहत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को आगामी उपचुनाव के लिए ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है. दूसरे तृणमूल गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और अलग चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है.

इस बदलाव के कारण रेजीनगर में चुनावी प्रचार पुराने तृणमूल नाम और चिह्न के बजाय नए नाम और चिह्न के साथ होगा. चौधरी ने सुबह नामांकन वापस लेने के संभावित कारणों में नए चिह्न के साथ चुनाव लड़ने को लेकर पैदा हुई परिस्थितियों का भी उल्लेख किया था. बाद में उन्होंने चुनाव मैदान में बने रहने की घोषणा की.

नंदीग्राम में पहले उम्मीदवार की वापसी
रेजीनगर की घटना से एक दिन पहले नंदीग्राम में ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया था. इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की. दोनों दलों के बीच यह चुनावी तालमेल ऐसे समय सामने आया, जब तृणमूल गुट स्वयं अपने उम्मीदवार और चुनाव चिह्न से जुड़ी परिस्थितियों से गुजर रहा है.

संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद नंदीग्राम की चुनावी तस्वीर में अचानक बदलाव आया. इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला सामने आया, लेकिन घटनाक्रम यहीं नहीं रुका.

समर्थन के कुछ घंटों बाद मिलन प्रधान गिरफ्तार
ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने उन्हें 2007 से जुड़े पुराने मामलों में गिरफ्तार कर लिया. पूर्व मेदिनीपुर पुलिस के अनुसार उनके खिलाफ चार लंबित गैर-जमानती वारंट थे. पुलिस ने जिन मामलों का उल्लेख किया, उनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, साक्ष्य मिटाने, घर में घुसने और हथियारों से संबंधित दंगों जैसे आरोप शामिल हैं.

मिलन प्रधान को शनिवार को अदालत में पेश किया गया और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें तीन अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

गिरफ्तारी की टाइमिंग पर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया है. पार्टी का कहना है कि मामले 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े हैं और इतने लंबे समय बाद, वह भी नामांकन दाखिल करने के बाद गिरफ्तारी किए जाने की परिस्थितियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि उम्मीदवार के जेल में रहने की स्थिति में भी पार्टी चुनाव प्रचार जारी रखेगी.

दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी लंबित गैर-जमानती वारंटों के आधार पर हुई. एक पुलिस अधिकारी के अनुसार प्रधान इन मामलों में आरोपपत्रित आरोपी हैं और लंबे समय से फरार बताए गए थे. पुलिस ने यह भी कहा कि चुनाव और उपचुनाव के दौरान लंबित गैर-जमानती वारंटों के निष्पादन को लेकर निर्वाचन प्रक्रिया में निर्देश लागू होते हैं.

दो सीटों पर चुनावी प्रक्रिया में असाधारण घटनाक्रम
नंदीग्राम और रेजीनगर के घटनाक्रम को केवल उम्मीदवारों के नामांकन से जुड़े बदलाव के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि दोनों सीटों पर उम्मीदवारों की स्थिति बहुत कम समय में बदली है. एक ओर नंदीग्राम में उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद दूसरे दल के उम्मीदवार को समर्थन दिया गया और फिर उस उम्मीदवार की गिरफ्तारी हो गई. दूसरी ओर रेजीनगर में उम्मीदवार ने खुद नामांकन वापस लेने की घोषणा की, लेकिन कुछ ही घंटों बाद चुनाव लड़ने का फैसला कायम रखा.

छह अक्टूबर को मतदान, नौ अक्टूबर को मतगणना
दोनों विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को उपचुनाव होना है और नौ अक्टूबर को मतगणना प्रस्तावित है. रेजीनगर में अब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट रबीउल आलम चौधरी के जरिए चुनाव मैदान में बना हुआ है. नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद उनके चुनाव प्रचार और आगे की चुनावी प्रक्रिया को लेकर घटनाक्रम पर नजर बनी हुई है.

इस बीच दोनों सीटों पर नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 19 सितंबर रही. इसलिए अंतिम उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होने के साथ अब चुनाव प्रचार, नए चुनाव चिह्न की पहचान और उम्मीदवारों की कानूनी स्थिति अगले चरण के प्रमुख मुद्दे होंगे. रेजीनगर में दो घंटे के भीतर बदला फैसला और नंदीग्राम में उम्मीदवारों की लगातार बदलती स्थिति ने उपचुनाव की प्रक्रिया को खासा घटनाप्रधान बना दिया है.