'सेवा संकल्प अभियान': डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़: 'वसुंधरा' परियोजना से सुशासन और पारदर्शी राजस्व सेवाओं का नया दौर


प्रेषित समय :15:15:50 PM / Sun, Sep 20th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक

रायपुर, 20 सितंबर 2026

छत्तीसगढ़ सरकार राज्य के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 'सेवा के संकल्प' के साथ एक ऐतिहासिक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रही है. राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा शुरू की गई 'वसुंधरा' (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के माध्यम से प्रदेश भर के पुराने और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जा रहा है, जिससे आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी.

सफलता का आधार: दंतेवाड़ा का क्रांतिकारी मॉडल

​इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता की मजबूत नींव दंतेवाड़ा जिले के क्रांतिकारी मॉडल पर आधारित है. दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए. इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया.

विस्तृत खाका: 12.89 करोड़ पृष्ठों का डिजिटलीकरण

दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग से प्रेरणा लेते हुए अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है. इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं. इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा.

वित्तीय ढांचा और समयबद्ध कार्यान्वयन

इस विशाल परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए 65.41 करोड़ रुपए की कुल एकमुश्त पूंजीगत लागत (CAPEX) और 50 लाख रुपए प्रति वर्ष का परिचालन व्यय (OPEX) तय किया गया है, जिसकी वित्तीय व्यवस्था राज्य के अधोसंरचना मद और केंद्र सरकार की DILRMP 3.0 योजना से की जाएगी. योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों के भीतर वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप तैयार किया जाएगा, जिसके बाद कार्यदायी एजेंसियों का चयन कर एक वर्ष के भीतर सभी अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सत्यापन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा.

तकनीकी नवाचार: AI और ब्लॉकचेन से सुरक्षा

 ​'वसुंधरा' परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसमें आधुनिकतम तकनीकों का समावेश है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन और स्मार्ट सर्च इंजन की मदद से दशकों पुराने रिकॉर्ड भी पलक झपकते ही खोजे जा सकेंगे. वहीं अभिलेखों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या हेरफेर को रोकने के लिए ब्लॉकचेन आधारित सुरक्षा, डिजिटल हस्ताक्षर और यूनिक QR व बारकोड प्रणाली लागू की जाएगी.

त्वरित सेवाएं और सुशासन का नया युग

​इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने के बाद वर्तमान में नकल प्राप्ति में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर मात्र कुछ मिनटों का रह जाएगा और यह सेवा नागरिकों को 24 घंटे उपलब्ध रहेगी. नागरिक अब वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्रों और कियोस्क के माध्यम से घर बैठे आसानी से प्रमाणित अभिलेख प्राप्त कर सकेंगे. सुगम ऑनलाइन पेमेंट गेटवे और अधिकारियों के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से आम जनता को राहत मिलेगी. छत्तीसगढ़ सरकार का यह नवाचार न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर पूरी तरह अंकुश लगाएगा, बल्कि राज्य में डिजिटल गवर्नेंस, पारदर्शिता और सुशासन के एक नए युग का सूत्रपात भी करेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-