आज का दिन- 23 सितंबर 2026, एकादशी व्रत का पारण हरिवासर की अवधि में नहीं होता है!

आज का दिन- 23 सितंबर 2026, एकादशी व्रत का पारण हरिवासर की अवधि में नहीं होता है!

प्रेषित समय :22:09:39 PM / Tue, Sep 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8875863494)
* परिवर्तिनी एकादशी- 22 सितम्बर 2026, मंगलवार
* पारण का समय - 06:21 एएम से 08:46 एएम, 23 सितम्बर 2026
* एकादशी तिथि प्रारम्भ - 21 सितम्बर 2026 को 08:00 पीएम बजे
* एकादशी तिथि समाप्त - 22 सितम्बर 2026 को 09:43 पीएम बजे

अच्युतम केशवम रामनारायणम, कृष्ण दामोदरम् वासुदेवम् हरे.
श्रीधरम् माधवम् गोपिकावल्लभम, जानकी नायकम श्रीरामचन्द्रम् भजे..

पारण, व्रत को पूरा करने को कहा जाता है. एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करते हैं.
एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी माना जाता है. एकादशी व्रत का पारण हरिवासर की अवधि में भी नहीं होता है.
हरिवासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई समयावधि होती है.
व्रत पूर्ण हो जाने के बाद पहले भोजन के लिए सबसे सही समय सवेरे होता है.
मध्याह्नकाल में पारण से बचें लेकिन सवेरे किसी कारण से पारण नहीं हो पाए तो मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए.
कभी-कभी एकादशी व्रत दो दिनों के लिए लगातार हो जाता है तब स्थानीय मान्यताओं के अनुसार पहली या दूजी एकादशी करनी चाहिए.
श्रीविष्णुभक्त ऐसे अवसर पर दोनों एकादशी करते हैं.
सन्यासी और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रीनारायणभक्तों को दूजी एकादशी का व्रत करना चाहिए.
यथासंभव व्रत नियमों का पालन करना चाहिए तथा किसी भी प्रकार की उलझन होने पर स्थानीय धर्मगुरु के निर्देशानुसार निर्णय करना चाहिए.
जानबूझ कर नियमों के उल्लंघन से ही व्रतभंग होता है इसलिए अनजाने में हुई गलती के लिए मन में आशंकाएं नहीं पालें और व्रत के अंत में पारण के समय जाने-अनजाने हुई गलतियों के लिए अपनी भाषा और भाव में श्रीविष्णुदेव से क्षमा प्रार्थना कर भोजन ग्रहण करें!
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-