यूक्रेन युद्ध में फंसी मेडिकल पढ़ाई का मामला, हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

यूक्रेन युद्ध में फंसी मेडिकल पढ़ाई का मामला, हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

प्रेषित समय :18:36:51 PM / Tue, Sep 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे भोपाल निवासी एक छात्र के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण मेडिकल शिक्षा पूरी करने के बाद अनिवार्य इंटर्नशिप की शर्त बड़ी कानूनी चुनौती बन गई है. छात्र ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर कर नेशनल मेडिकल कमीशन के विदेशी मेडिकल स्नातकों से संबंधित वर्ष 2021 के नियमों को चुनौती दी है. उसका कहना है कि युद्ध की परिस्थितियों में उसी विदेशी मेडिकल संस्थान में 12 माह की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है.

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की युगल पीठ ने मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 29 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की है.

युद्ध के कारण यूक्रेन लौटना हुआ मुश्किल
याचिका के अनुसार छात्र ने वर्ष 2021 में नीट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद यूक्रेन के टेरनोपिल स्थित होरबाचेव्स्की टेरनोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था. उसे यूक्रेन के शिक्षा एवं विज्ञान मंत्रालय की ओर से 14 जून 2021 को अध्ययन के लिए आमंत्रण मिला था.

छात्र ने 3 नवंबर 2021 को करीब 1900 अमेरिकी डॉलर फीस जमा की और 7 नवंबर को यूक्रेन पहुंच गया. उसकी कक्षाएं 10 दिसंबर 2021 से शुरू हुईं. इसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध की स्थिति बनने पर उसे अन्य विद्यार्थियों के साथ यूक्रेन छोड़कर भारत लौटना पड़ा.

याचिका में कहा गया है कि इसके बाद से वह भोपाल से ऑनलाइन माध्यम से अपनी पढ़ाई जारी रख रहा है.

इंटर्नशिप की शर्त बनी विवाद का केंद्र
मामले का मुख्य विवाद विदेशी मेडिकल स्नातकों के लिए लागू नियमों से जुड़ा है. छात्र के अनुसार, वर्ष 2021 के नियमों में विदेशी मेडिकल संस्थान में अध्ययन और उसके बाद इंटर्नशिप से संबंधित ऐसी शर्तें हैं, जिनका युद्ध की परिस्थितियों में पालन करना उसके लिए संभव नहीं है.

छात्र ने स्थायी मेडिकल पंजीयन के लिए निर्धारित अतिरिक्त शर्तों को भी चुनौती दी है. उसका कहना है कि यदि उसे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बावजूद संबंधित विदेशी संस्थान में निर्धारित अवधि की इंटर्नशिप पूरी करने के लिए वापस यूक्रेन जाना पड़े, तो मौजूदा परिस्थितियों में यह गंभीर व्यावहारिक कठिनाई पैदा करता है.

कटऑफ तारीख को लेकर भी विवाद
याचिका में 18 नवंबर 2021 से लागू हुए नियमों की वैधता और उनके छात्र पर लागू होने को लेकर भी सवाल उठाया गया है. छात्र का तर्क है कि उसने नए नियम लागू होने से पहले ही विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर ली थी.

उसने 3 नवंबर को फीस जमा करने और 7 नवंबर को यूक्रेन पहुंचने का उल्लेख करते हुए कहा कि उसे 18 नवंबर 2021 की कटऑफ तारीख से पहले विदेशी संस्थान में अध्ययनरत विद्यार्थी माना जाना चाहिए.

याचिका में संबंधित नियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि नए नियम लागू होने से पहले विदेशी संस्थानों में पढ़ाई शुरू कर चुके विद्यार्थियों के लिए पुराने नियम लागू किए जाने का प्रावधान मौजूद है.

एनएमसी के जवाब से बढ़ा विवाद
मामले में छात्र ने सूचना के अधिकार के तहत नेशनल मेडिकल कमीशन से जानकारी मांगी थी. याचिका के अनुसार, 2 मार्च 2023 को दिए गए जवाब में एनएमसी ने कहा कि छात्र पर वर्ष 2021 के नियम लागू होंगे. इसका आधार उसकी कक्षाओं के 10 दिसंबर 2021 से शुरू होने को बताया गया.

छात्र की ओर से अब इसी स्थिति को हाई कोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई है. उसका कहना है कि केवल कक्षाएं शुरू होने की तारीख के आधार पर उसे नए नियमों के दायरे में रखना उचित नहीं है, जबकि उसने इससे पहले प्रवेश और फीस से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर ली थी.

केंद्र के जवाब से तय होगी आगे की दिशा
हाई कोर्ट ने फिलहाल नियमों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है. युगलपीठ ने केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है. अब अगली सुनवाई में केंद्र और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि याचिकाकर्ता के मामले में 2021 के नियम किस प्रकार लागू होते हैं और युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों में इंटर्नशिप की अनिवार्यता को लेकर क्या कानूनी स्थिति बनती है.

मामला अनूप पंचोरिया बनाम भारत संघ, डब्ल्यूपी-12555-2023 के रूप में दर्ज है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-