बेगूसराय. बिहार के बेगूसराय के जिला जज-3 अरुण कुमार की अदालत ने न्यायालय के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर सख्त रुख अपनाते हुए पंजाब के भटिंडा जिले के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है. मामला सड़क दुर्घटना में मृत व्यक्ति की पत्नी को मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण में निर्धारित मुआवजा राशि दिलाने से जुड़ा है. अदालत ने भटिंडा के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर से दुर्घटना के आरोपी वाहन मालिक की चल-अचल संपत्ति का विवरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, लेकिन कई बार आदेश और पत्राचार के बावजूद रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई. इसके बाद अदालत ने 8 सितंबर 2026 को निष्पादन वाद संख्या 05/2024 की सुनवाई के दौरान वेतन रोकने का आदेश जारी किया.
हादसे में गई थी पति की जान
मामला 26 जनवरी 2020 का है. बेगूसराय जिले के वनद्वार निवासी अर्चना कुमारी के पति ओमप्रकाश कुमार की कैटिंग चौक के पास एक जीप की टक्कर से मौत हो गई थी. दुर्घटना में शामिल जीप का पंजीयन नंबर PB03AJ/7306 बताया गया है. वाहन पंजाब का था और उसके मालिक सुखमेंदर सिंह, पिता माखन सिंह, निवासी पक्का कलां तलवंडी, जिला भटिंडा, पंजाब बताए गए हैं.
पति की मौत के बाद अर्चना कुमारी ने मुआवजे के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में मोटर एक्सीडेंट क्लेम केस संख्या 37/2020 दाखिल किया. मामले में सुखमेंदर सिंह के अलावा बेगूसराय के मुंगेरीगंज निवासी आयुष कुमार और बिहार सरकार, जिलाधिकारी बेगूसराय को भी पक्षकार बनाया गया था.
करीब 14.72 लाख रुपये मुआवजे का आदेश
मोटर दुर्घटना दावा मामले की सुनवाई के बाद 23 जून 2023 को अदालत ने अपना फैसला सुनाया. जिला जज-3 की अदालत ने वाहन मालिक सुखमेंदर सिंह को छह प्रतिशत ब्याज के साथ करीब 14 लाख 72 हजार रुपये अर्चना कुमारी को भुगतान करने का आदेश दिया.
सुनवाई के दौरान सुखमेंदर सिंह की ओर से यह दलील दी गई थी कि वह संबंधित जीप को बेगूसराय निवासी आयुष कुमार को नोटरी पब्लिक के माध्यम से बेच चुके हैं. हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और मुआवजा राशि के भुगतान की जिम्मेदारी वाहन मालिक पर तय की.
फैसला आने के बाद भी जब अर्चना कुमारी को निर्धारित मुआवजा राशि नहीं मिली तो उन्हें न्यायालय के आदेश को लागू कराने के लिए दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
मुआवजे की वसूली के लिए दाखिल हुआ निष्पादन वाद
फैसले के बावजूद राशि का भुगतान नहीं होने पर अर्चना कुमारी ने आरोपी वाहन मालिक की चल और अचल संपत्तियों से मुआवजा राशि की वसूली के लिए निष्पादन वाद यानी एक्सीक्यूशन केस संख्या 05/2024 दाखिल किया.
इसी मामले की सुनवाई के दौरान जिला जज-3 अरुण कुमार की अदालत ने 19 दिसंबर 2024 को पंजाब के भटिंडा जिले के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर से सुखमेंदर सिंह की चल-अचल संपत्ति का विवरण उपलब्ध कराने को कहा, ताकि अदालत के आदेश के अनुसार मुआवजा राशि की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके.
बार-बार पत्र भेजने के बाद भी नहीं आई रिपोर्ट
अदालत के आदेश के बाद भी संबंधित रिपोर्ट न्यायालय को उपलब्ध नहीं कराई गई. बताया गया कि वर्ष 2026 तक न्यायालय की ओर से कई बार भटिंडा के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया. इसके बावजूद रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुई.
मामले में न्यायालय ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को भी पत्र भेजकर भटिंडा के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर से न्यायालय के आदेश का अनुपालन कराने को कहा. इसके बावजूद आदेश के अनुपालन की स्थिति में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई.
अदालत ने अपनाया सख्त रुख
लगातार आदेश के बावजूद रिपोर्ट नहीं आने के बाद बेगूसराय जिला जज-3 अरुण कुमार की अदालत ने सख्त रुख अपनाया. 8 सितंबर 2026 को एक्सीक्यूशन केस संख्या 05/2024 की सुनवाई करते हुए अदालत ने भटिंडा के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर के वेतन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया.
अदालत ने आदेश की प्रति पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को भेजने का निर्देश दिया है. साथ ही 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि न्यायालय के निर्देश के अनुपालन में क्या कार्रवाई की गई.
कोषागार और डीडीओ को भी भेजा आदेश
वेतन रोकने के आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अदालत ने आदेश की प्रति डीडीओ सचिवालय तथा जिला कोषागार पदाधिकारी, भटिंडा को भेजने का निर्देश दिया है. इसका उद्देश्य न्यायालय के आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारी के वेतन भुगतान पर रोक लगाने की कार्रवाई सुनिश्चित करना है.
इसके साथ ही आदेश की प्रति जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भटिंडा को भी भेजने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने उनसे न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है.
तीन साल बाद भी मुआवजे का इंतजार
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दुर्घटना में पति को खोने वाली अर्चना कुमारी लंबे समय से मुआवजा राशि के लिए न्यायालय की प्रक्रिया से गुजर रही हैं. दावा प्रकरण में फैसला 23 जून 2023 को आ चुका है और करीब 14 लाख 72 हजार रुपये छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश भी हो चुका है. इसके बावजूद वास्तविक राशि उनके हाथों तक नहीं पहुंच सकी है.
अदालत के फैसले के बाद भी मुआवजा नहीं मिलने के कारण उन्हें निष्पादन वाद दाखिल करना पड़ा. अब इसी निष्पादन वाद में अदालत को संबंधित वाहन मालिक की संपत्ति का विवरण हासिल करने के लिए दूसरे राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश जारी करने पड़े.
न्याय के आदेश के अनुपालन का मामला
यह मामला केवल मुआवजा राशि की वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन से भी जुड़ा है. किसी अदालत द्वारा पारित आदेश को संबंधित सरकारी अथवा प्रशासनिक स्तर पर लागू कराया जाना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसी कारण बेगूसराय की अदालत ने पहले पत्राचार और निर्देशों के माध्यम से संबंधित जानकारी हासिल करने का प्रयास किया और लंबे समय तक रिपोर्ट नहीं आने के बाद कठोर कदम उठाया.
अब अदालत के 8 सितंबर 2026 के आदेश के बाद पंजाब प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है और भटिंडा के जिलाधिकारी सह डिप्टी कमिश्नर की ओर से संपत्ति संबंधी रिपोर्ट कब न्यायालय में प्रस्तुत होती है, इस पर निगाह रहेगी.
अर्चना कुमारी के लिए भी यह आदेश महत्वपूर्ण है, क्योंकि अदालत के फैसले के बावजूद अब तक उन्हें मुआवजा राशि नहीं मिल सकी है. अदालत की सख्ती के बाद निष्पादन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो मुआवजा वसूली का रास्ता खुल सकता है. हालांकि वास्तविक भुगतान कब तक हो पाएगा, यह संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायालय के आगे के आदेशों पर निर्भर करेगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

