छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी और साली को वॉट्सएप पर अभद्र मैसेज भेजना 'मानसिक क्रूरता', तलाक की अर्जी हुई मंजूर

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी और साली को वॉट्सएप पर अभद्र मैसेज भेजना

प्रेषित समय :15:37:39 PM / Thu, Sep 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर/अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि पत्नी और उसकी बहनों (साली) को वॉट्सएप पर आपत्तिजनक व अभद्र संदेश भेजना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है. जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने अंबिकापुर कुटुंब न्यायालय (फैमिली कोर्ट) के पुराने फैसले को रद्द करते हुए पीड़िता की तलाक की अर्जी को स्वीकार कर लिया है.

अंबिकापुर फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द
मामला अंबिकापुर की रहने वाली अर्चना सिंह का है, जिनका विवाह 5 दिसंबर 2021 को बिहार (भोजपुर) निवासी आनंद कुमार गुप्ता के साथ हुआ था. शादी के बाद से ही पति द्वारा उत्पीड़न किए जाने पर महिला ने अंबिकापुर फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी. हालांकि, कुटुंब न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद पीड़िता ने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की.

दहेज में एसी की मांग और जान से मारने की धमकी
अपील याचिका में पत्नी ने आरोप लगाया था कि विवाह के तुरंत बाद से ही पति ने शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना देनी शुरू कर दी थी. आरोपी पति दहेज में एयर कंडीशनर (AC) की मांग कर रहा था. मांग पूरी न होने पर उसने महिला के जेवर बेचने और उसे जान से मारने की धमकियां दीं.

प्रताड़ना से तंग आकर महिला अपने मायके अंबिकापुर लौट आई. इसके बावजूद पति का दुर्व्यवहार बंद नहीं हुआ और उसने महिला तथा उसकी दो छोटी बहनों के मोबाइल पर लगातार अभद्र और आपत्तिजनक वॉट्सएप मैसेज भेजना जारी रखा.

वॉट्सएप चैट बना मुख्य आधार
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोपी पति अदालत में उपस्थित नहीं हुआ. पीठ ने मामले में प्रस्तुत किए गए वॉट्सएप चैट्स के रिकॉर्ड्स को महत्वपूर्ण और ठोस साक्ष्य माना. अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह का व्यवहार किसी भी महिला के लिए गंभीर मानसिक प्रताड़ना के समान है और ऐसे माहौल में वैवाहिक जीवन को जारी रखना संभव नहीं है.

अदालत ने शादी को विधिवत भंग करते हुए तलाक की डिक्री जारी कर दी. इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने पीड़िता अर्चना सिंह को स्थायी भरण-पोषण (Permanent Alimony) के लिए अलग से आवेदन प्रस्तुत करने की भी स्वतंत्रता दी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-