शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे ₹4.33 लाख करोड़, जानें गिरावट की 5 बड़ी वजहें

शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे ₹4.33 लाख करोड़, जानें गिरावट की 5 बड़ी वजहें

प्रेषित समय :16:10:16 PM / Thu, Sep 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई/नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार (24 सितंबर) को एक बार फिर भारी बिकवाली का दौर देखने को मिला. बाजार में चौतरफा दबाव के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 1 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के दौरान निफ्टी 50 फिसलकर 23,200 के स्तर के पास आ गया, वहीं सेंसेक्स में भी 1,200 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट देखी गई.

निवेशकों को ₹4.33 लाख करोड़ का चपत
बाजार में आई इस अचानक गिरावट से निवेशकों की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा है. बीएसई (BSE) पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹480.68 लाख करोड़ रह गया, जो पिछले सत्र में ₹485.01 लाख करोड़ था. इस तरह महज एक ही दिन में निवेशकों के करीब ₹4.33 लाख करोड़ स्वाहा हो गए.

बाजार में गिरावट की 5 मुख्य वजहें

1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में ऐतिहासिक उछाल
गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना रहा. अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 5.11% तक पहुंच गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है. जब अमेरिका जैसे सुरक्षित बाजार में सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते और जोखिम वाले बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर वहां निवेश करने लगते हैं.

2. क्रूड ऑयल फिर $100 के पार
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) बड़ी चिंता बन गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक बार फिर $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर $102-$106 के दायरे में पहुंच गईं. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, जिससे देश के आयात बिल और महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है.

3. मजबूत डॉलर और वैश्विक बाजारों का दबाव
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से अमेरिकी डॉलर को मजबूती मिली है. मजबूत डॉलर और महंगे कच्चे तेल का द्विस्तरीय असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ता है. इससे भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ता है और आयात महंगा हो जाता है. वैश्विक स्तर पर नकारात्मक संकेतों ने भी घरेलू निवेशकों के सेंटीमेंट को कमजोर किया.

4. बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरों में बिकवाली
दिग्गज फाइनेंशियल और बैंकिंग शेयरों—जैसे Bajaj Finance, HDFC Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank—में भारी बिकवाली दर्ज की गई. इसके अलावा बीमा (Insurance) सेक्टर के शेयरों पर भी दबाव दिखा. इसका मुख्य कारण IRDAI द्वारा जारी कंसल्टेशन पेपर है, जिसमें इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन और कमीशन नियमों में बदलाव के प्रस्ताव हैं. बाजार को आशंका है कि इससे कंपनियों की मार्जिन पर असर पड़ सकता है.

5. एक्सपायरी के कारण बढ़ा उतार-चढ़ाव
डेरिवेटिव्स सेगमेंट की मंथली/वीकली एक्सपायरी के चलते भी बाजार में काफी वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) रही. पहले से ही वैश्विक दबाव झेल रहे बाजार में ट्रेडर्स द्वारा अपनी पोजीशन रोलओवर करने और बड़े सौदों के एडजस्टमेंट के कारण बिकवाली का दबाव और ज्यादा बढ़ गया.

आगे कैसा रहेगा बाजार का रुख?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट किसी एक वजह से नहीं, बल्कि वैश्विक और घरेलू कारकों के एक साथ हावी होने से आई है. आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर-रुपये के विनिमय दर और IRDAI के अंतिम फैसलों पर निर्भर करेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-